गरीबी की मजबूरी, बच्चों के इलाज के लिए मां बेचने निकली अपने ही शरीर के अंग

गरीबी की मजबूरी, बच्चों के इलाज के लिए मां बेचने निकली अपने ही शरीर के अंग (Image Credit: India.com)

गरीबी लोगों को उस हद से भी गुजर जाने के लिए मजबूर कर देती है जिसका वह अपने जीवन में सोच भी नहीं सकते हैं। ऐसी ही एक गरीबी से आई मजबूरी की कहानी केरल के कोच्चि शहर से आ रही है। जहां की एक महिला ने अपने उधार चुकाने और अपने बच्चों के इलाज के लिए अपने ही शरीर के अंग बेचने का फैसला किया है।

44 साल की शांति ने अपने घर के बाहर ही एक बोर्ड लगा दिया है जिसमें वह अपने 5 बच्चों के साथ रहती है। घर के बाहर बोर्ड पर लिखा है कि ‘बच्चों के इलाज के लिए और उधार को चुकाने के लिए मां के शरीर के अंग (दिल के साथ) बेचने के लिए उपलब्ध है।’

शांति के बड़े बेटे का पिछले साल जुलाई में एक दुर्घटना होने के कारण ब्रेन पर प्रभाव पड़ा है और उन्हें ब्रेन सर्जरी करवाने की जरूरत है। उनका दूसरा दूसरा बेटा जन्म से ही मानसिक बीमारी का शिकार है। उनकी 11 साल की बेटी भी सड़क दुर्घटना के कारण न्यूरो की बीमारी से पीड़ित है। उनका तीसरा बेटा कोरोना के कारण अपनी नौकरी खो बैठा है और अंत में उनका चौथा बेटा स्कूल में पड़ रहा है।

घर का सारा भार उनके बड़े बेटे से उनके ऊपर आ गया है। “हम लंबे समय से किराए के मकान में रह रहे हैं। हम अपना किराया देने में असमर्थ हैं। मेरे तीन बच्चों स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं और काम करने में असमर्थ हैं। हमने करीब 20 लाख रुपये के कर्ज को निपटाने के लिए दयालु लोगों की मदद मांगी है।”शांति ने The Indian Express को बताया।

शांति के पति ने परिवार को बहुत पहले ही छोड़ दिया था। शांति ड्राइविंग टीचर के रूप में काम करती थी लेकिन जब से उनकी बेटी के साथ हादसा हुआ है तब से वह काम पर नहीं जा रही है। जैसे ही उनकी कहानी ने मीडिया का ध्यान आकर्षित किया उनके परिवार को आश्रय गृह में भेज दिया गया है। केरल की राज्य सरकार ने बच्चों के इलाज का ध्यान रखने का वादा किया है और स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा ने भी उन्हें आश्वासन दिया कि वह अस्पताल के खर्चों को भर देंगे।


Connect With US- Facebook | Twitter | Instagram

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *