इंजीनियर से लेक्चरर और फिर किसान: मिट्टी नहीं, पानी में उगाते हैं सब्जियां

इंजीनियर से लेक्चरर और फिर किसान: मिट्टी नहीं, पानी में उगाते हैं सब्जियां
Image credit: Navbharattimes

कहते हैं कि शौक बड़ी चीज है। और यह सिद्ध किया है पंजाब के मोगा जिले में धर्मकोट सब डिवीजन में पड़ने वाले कैला गाँव निवासी 37 वर्षीय गुरकिरपाल सिंह ने। यह भी पढ़े: ट्रक में हेलमेट पहनने के लिए पुलिस ने काटा चालान, मालिक को पता चला तो उड़े होश

दरअसल, गुरकिलपाल ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। जिसके बाद लेक्चरर के तौर पर काम भी किया। लेकिन शौक के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ दी। और खुद को खेती के प्रति समर्पित कर दिया। आज वह बतौर किसान हाइड्रोपोनिक तरीके से पाइप में सब्जियाँ उगा रहे हैं।

खेती की इस पानी बचाऊ तकनीक के जरिये इंजीनियर से लेक्चरर और किसान बने गुरकिरपाल सिंह ने लोगों को खेती का एक नया रास्ता दिखाया है।

आप चाहें तो, इस तकनीक के जरिये 200 वर्ग फुट जैसी छोटी जगह पर भी सब्जियाँ उगा सकते हैं और एक लाख के खर्च से दोगुना तक कमा सकते हैं।

हाइड्रोपोनिक क्या है?

यह मूल रूप से इजराइल की तकनीक है, जिसमें मैंने अपनी जरूरत के लिहाज से कुछ सुधार किया। हाइड्रोपोनिक (हाइड्रो का मतलब है पानी और पोनिक का श्रम)। यह भी पढ़े: बेटे के दसवीं के सर्टिफिकेट में त्रुटि को सुधारने के लिए पिता ने चलाई 200 किलोमीटर साइकिल

इड्रोपोनिक खेती के लिए न तो जमीन चाहिए और न ही मिट्टी। इसमें नेट हाउस के भीतर प्लास्टिक के पाइपों में पौधों को लगाया जाता है। टाइमर से तापमान को फसल की जरूरत के अनुसार 35 डिग्री से कम पर नियंत्रित किया जाता है।

पौधों की जड़ों को पानी में भिगोकर रखा जाता है और पानी में पोषक तत्वों का घोल डाला जाता है। मसलन नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक और आयरन आदि को एक खास अनुपात में मिलाया जाता है। पानी सीधे जड़ों को पहुँचता है। उन्हें पोषक तत्व ढूंढने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसी पोषक तत्वों से भरे पानी के जरिये पौधे पनपते और तेजी से बढ़त पा जाते हैं। 

ऐसे शुरू हुआ सफर

गुरकिलपाल बताते हैं कि,  “मेरी नौकरी अच्छी चल रही थी, लेकिन मैं बंधी बंधाई नौकरी से कुछ अलग करना चाहता था। इसी के चलते 2012 में करीब साढ़े पाँच हज़ार स्क्वायर फीट जमीन पर पालीहाउस लगाया और उसमें टमाटर उगा दिए।

यह प्रयोग सफल रहा। इससे मैंने करीब एक लाख 40 हजार के टमाटर हासिल किए। इसके बाद उन्होंने पालीहाउस से ग्रीनहाउस का रूख किया। इसमें हाइड्रोपोनिक तकनीक से शिमला मिर्च, टमाटर आदि उगाए।


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