आखिर रोड़ पर ही क्यों बिलख पड़ा मजदूर, जानिए इस वायरल तस्वीर के पीछे की दर्दनाक कहानी

Image credit :NDTV

जब से देश में कोरोनवायरस के कारण लाॅकडाउन लागू हुआ है तब से सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना देश के प्रवासी मजदूरों को करना पड़ रहा हैं। जिन्हें अपना पेट भरने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रहीं हैं। कई मजदूर भूखे पेट पैदल ही अपने घर के लिए निकल पड़े हैं। नंगे पैर कड़कड़ाती धूप में मजदूरों के साथ चलते छोटे बच्चे, सूटकेस पर लेटे हुए एक छोटे बच्चें को ले जाती उसकी माँ। ऐसी कई मजदूरों से जुड़ी तस्वीरें इंटरनेट पर हमें रोज देखने को मिल रहीं हैं। हाल ही इनके आलावा इंटरनेट पर एक और तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें एक प्रवासी मजदूर सड़क किनारे बैठकर रो रहा था। जिसके बारें में लोंगो ने काफी जानना चाहा था। आखिर कौन था वों शख्स और क्यों सड़क किनारे बैठकर रो रहा था। आईये जानतें हैं उस शख्स के बारे में।

बेटे की मौत की खबर सुनकर बिलख पड़ा एक बाप

तस्वीर में दिख रहा ये मजदूर बिहार के बेगूसराय का है। इस मजदूर का नाम रामपुकार पंडित है। 38 साल का यह शख्स दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरी करता था और बिहार में अपने परिवार को पालता था। लाॅकडाउन लागू होने के कारण यह मजदूर बेरोजगार हो गया और दिल्ली से अपने घर बेगूसराय के लिए निकल पडा़। जब रामपुकार को कोई साधन या मदद नहीं मिली तो वह पैदल ही चल पड़ा। इसी दौरान रामपुकार को एक दिन फोन पर खबर मिली कि उसके नवजात बेटे की किसी कारणवश मौत हो गई। जिसके बाद वह खुद को रोक नहीं पाया और धूप में सड़क किनारे फोन पर बात करते हुए ही बिलख पडा़।

तस्वीर देखने के बाद एक महिला मदद के लिए आगे आई।

जब रामपुकार दिल्ली के निजामुद्दीन पुल के वहाँ बैठकर अपने बेटे की मौत की खबर सुनकर रोड़ पर रो रहा था। उसी दौरान न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के फोटोग्राफर अतुल यादव ने उसकी यह तस्वीर ली और उन्होंने ने उनकी मदद भी करनी चाहीं। बाद में जब यह तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हुई तो यह तस्वीर देखकर एक महिला उनकी मदद करने के लिए आगे आई और उन्हें भोजन कराया और 5500 रुपये की ट्रेन की टिकट कराकर उनके घर बेगूसराय पहुंचाया।

परिवार से मिले लेकिन 9 साल की बेटी को गले भी नहीं लगा पाए रामपुकार

रामपुकार तीन दिन तक दिल्ली के निजामुद्दीन पुल पर फंसे रहें। बाद में एक एंबुलेंस आई और अस्पताल में उनकी कोरोना की जांच की गई जिसमें उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। बाद में रामपुकार ट्रेन से अपने घर बेगूसराय पहुंचे। जहां पहुंचते ही प्रशासन ने उनकी कोरोना की फिर से जांच कराई और क्वांरटीन सेंटर में रखा, अभी वहां उनकी रिपोर्ट आना बाकी है। इसकी खबर मिलते ही उनकी पत्नी और 9 साल की बेटी पूनम उनसे मिलने अस्पताल पहुंच गई। दोनों मां बेटी दूर से ही रामपुकार को देखती रही और चाह कर भी रामपुकार दोनों को गले न लगा सके।

बेटी मेरे लिए खाना लाई थी, लेकिन कमजोर होने के कारण खुद के हाथों से खा नहीं सका

रामपुकार ने अस्पताल में बताया ”मैं जब अपनी आंखें खोलता हूं तो मेरा सिर घूमता है और काफी कमजोरी महसूस होती है। अस्पताल में ही मेरी बेटी पूनम और पत्नी मिलने आए, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि वो मेरे पास नहीं आ सकते और मैंने दूर से उन लोगों को देखा। हम तीनों रो रहे थे और एक दूसरे को गले लगाना चाहते थे। मैं अपनी बेटी को अपने पास बुलाना चाहता था, लेकिन मुझे केवल कुछ मीटर की दूरी और 10 मिनट की मुलाकात ही मिल पाई। मेरी पत्नी और बेटी, मेरे लिए सत्तू, चूड़ा और खीरा लाए थे, लेकिन मैं इतना कमजोर हो गया हूं कि खुद उठकर खा भी नहीं सकता। मेरी ऐसी हालत देखकर मेरे बच्चे भी खाना नहीं खा रहे हैं और मेरा एक दोस्त भी आज मेरे गांव बरियारपुर से मुझसे मिलने आया। मैं अपने परिवार में अकेला कमाने वाला हूं और मैं ही इस हालत में हूं। मैं सरकार से अपील करता हूं कि इस कठिन समय में मेरी और मेरे जैसे बाकी लोगों की मदद करे। वरना हम गरीब लोग तो मर ही जाएंगे।”


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