दिल्ली में लॉकडाउन के कारण कर्ज न चुका पाने की वजह से दो भाइयों ने साथ की खुदखुशी, फाइनेंसर बना रहा था दबाव

दो ज्‍वैलर भाइयों ने एक साथ की खुदकुशी, सुसाइड नोट में कही ये बात
दिल्ली में लॉकडाउन के कारण कर्ज न चुका पाने की वजह से दो भाइयों ने साथ की खुदखुशी, फाइनेंसर बना रहा था दबाव (Image Credit: Zee News)

राजधानी दिल्ली का दिल कहे जाने वाले चाँदनी चौक इलाके से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जहां आर्थिक तंगी से परेशान हो कर दो भाइयों ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। खुदकुशी करने वाले दोनों भाई ज्वेलरी का कारोबार करते थे। इस घटना के बाद उनके परिजनों का हाल बेहाल है। जानकारी के मुताबिक चाँदनी चौक इलाके में बुधवार यानी 26 अगस्त को दोपहर कर्ज से परेशान दो ज्वेलर भाइयों ने फंदा लगाकर जान दे दी। दोनों के शव मालीवाड़ा स्थित उनके कारखाने में मिले। इसके साथ ही मौके पर पुलिस ने घटनास्थल से सुसाइड नोट भी बरामद किया है, जिसमें दोनों ने आर्थिक स्थिति खराब होने का जिक्र किया है। 

47 वर्षीय अंकित और 42 वर्षीय अर्पित गुप्ता पिछले दस साल से चाँदनी चौक के बाजार में कृष्णा ज्वेलर्स नाम की दुकान चलाते थे। दोनों भाई अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे थे। यहाँ लॉकडाउन के चलते व्यापार में आई मंदी और बढ़ते कर्ज की वजह से इन दोनों भाइयों ने ऐसा कदम उठाया। इधर परिवार में मृतकों की माँ ऊषा देवी और पिता अधेश्वर दास गुप्ता का रो-रो कर बुरा हाल है।

78 वर्षीय पिता अधेश्वर कहते हैं कि, “दोनों भाइयों में बड़ा प्यार था। आस-पड़ोस से लेकर नाते-रिश्तेदार भी उन्हें राम-लक्ष्मण कहते थे। जो बड़ा कहता, वही छोटा वाला करता। हर काम में साथ-साथ। सुबह, शाम और दोपहर बस काम-काम और काम। इसी काम ने मेरे दोनों लालों को मुझसे छीन लिया। दोनों भाई एक साथ चले गए। ये भी नहीं सोचा कि उनके बाद हमारा क्या होगा? बच्चों का क्या होगा?”

वहीं, 72 बर्षीय माँ ऊषा देवी का कहना है कि, “बच्चों को हमारी इतनी भी चिंता नहीं करनी चाहिए थी। वो डरते थे कि कहीं पैसा मांगने वाले लोग हमारे बूढ़े मां-बाप को कुछ ना बोल दें। इज्जत की फिक्र थी। कितने कष्ट में रहे होंगे हमारे लाल कि एक साथ फांसी लगा ली। आगे ऊषा देवी कहतीं हैं कि एक रात पहले हम सब ने साथ में खाना खाया था। वो अपने काम के बारे में ज्यादा बताते नहीं थे, फिर भी इतना तो मालूम था कि परेशान हैं। सुबह दुकान पर जाते हुए रोज की तरह दोनों ने हमारे पैर छुए थे। हमें क्या पता था कि वे आखिरी बार पैर छू रहे हैं।”

वहीं ऊषा देवी की भाभी मंजू गुप्ता का कहना है कि, “व्यापार चलाने के लिए बच्चों ने कर्ज ले रखा था। फिर लॉकडाउन लग गया। जिससे कर्ज लिया था वो दुकान पर बाउंसर भेजने लगे। गालियां देने लगे और घर-परिवार को भी तबाह करने की बात कहते थे। बच्चे चोर-लफंगे तो थे नहीं कि इस सब से निपट पाते। कुछ नहीं सूझा तो गलत काम कर बैठे।”

यहाँ पुलिस ने शुरुआती जांच में पाया कि एक फाइनेंसर का नाम उभरकर सामने आ रहा है। पुलिस का मानना है कि उसके दबाव में आकर दोनों भाईयों ने फांसी लगाकर खुदखुशी कर ली। इसी के साथ आरोप है कि फाइनेंसर के बाउंसर लगातार कारोबारी भाईयों पर ब्याज पर ली गई रकम और ब्याज लौटाने के लिए तंग कर रहे थे। पुलिस ने दोनों भाइयों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। और मामले में सभी पहलुओं पर पुलिस ने तफ्तीश शुरू कर दी है। 

सीताराम बाजार में पिछले कई सालों से ज्वेलरी शॉप चला रहे कमल गुप्ता बताते हैं कि इसमें कोई दोहराई नहीं है कि लॉकडाउन ने कमर तोड़ दी है। सरकार केवल घोषणाएं कर रही है। आज भी हमें बिना गिरवी रखे बैंक एक लाख रुपए का लोन नहीं देता। चार-पांच रोज भागना होता है सो अलग। लेकिन, इन दोनों के मामले में ‘वायदा बजार’ एक बड़ी वजह है। दोनों भाई इस काम में लगे हुए थे। जो लोग ये काम करवाते हैं या आपको पैसे देते हैं, वो ही इस तरह से पैसों की वसूली भी करते हैं। इसे आप व्यापारियों का जुआ मानिए। खेलिए। जीते तो ठीक। हार गए तो सब सत्यानाश। पता नहीं सरकार क्यों जुआ खिलवा रही है?

दिल्ली-6 में बीस बरसों से ज्वेलरी शॉप के मालिक अविनाश अग्रवाल कहते हैं कि जाहिर सी बात है। बैंक लोन देता नहीं। मैं व्यापारी हूं, मुझे कल ही कुछ माल उठाना है। माल एक करोड़ रुपए का है। मेरे पास चालीस लाख ही हैं। अब कैसे होगा? क्या एक दिन में सरकारी बैंक मुझे लोन दे देगा? चलो, एक हफ्ते में दे देगा? मेरा जवाब है, नहीं। आप चाहे तो चेक कर लो। अब ऐसे में मुझे पैसे के लिए तो प्राइवेट फाइनेंसर के पास ही जाना होगा। ज्यादा ब्याज भी देना होगा और इसके खतरे अलग हैं, लेकिन रास्ता क्या है?’

कोरोना वायरस की वजह से व्यापार में आई मंदी को लेकर बहुत से ऐसे व्यापारी भी हैं जो कर्ज में पूरी तरह डूब चुके हैं। वहीं इस घटना के सामने आने के बाद व्यापारियों में काफी भी  गुस्सा है। 


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