भारतीय बाजार में चीनी कंपनियों का दबदबा कम कर सकता है डिजिटल इंडिया अभियान

भारत और चीन के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव का असर अब बाजारों पर भी दिखने लगा है। आने वाले समय में इस तनाव का सबसे ज्यादा असर भारत की मोबाइल इंडस्ट्री पर पड़ेगा, जहां फिलहाल भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश है। हालांकि इसमें चीनी मोबाइल कंपनियां का बहुत बड़ा हाथ है। यह चीनी कंपनियां भारत में बहुत से लोगों को रोजगार भी प्रदान करती हैं। यदि इन्हें अचानक बाजार से हटाया जाता है तो भारत को इसका सीधे तौर पर बहुत बड़ा नुकसान होगा और साथ ही साथ उसके डिजिटल इंडिया के सपने को भी तगड़ा झटका लगेगा।

भारतीय बाजार पर 72 फीसदी चीनी कंपनियों का कब्जा

साल 2014 में भारत में 2 बड़ी मोबाइल फोन निर्माता कंपनियां थीं, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 258 हो गई है। इसमें चीन का बहुत बड़ा हाथ है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के बाजार में 72 फीसदी कब्जा चीनी स्मार्टफोन कंपनियों का है। भारत के बाजार में भारतीय मूल की कंपनियों का कुछ ही हिस्सा है। जिसमें Micromax का 1.1 फीसदी, Intex का 0.1 फीसदी, Lava का 1.2 फीसदी और Karbbon 0.2 फीसदी है। इनमें से अब अधिकतर कंपनियों के नए स्मार्टफोन बाजार में कम आ रहे हैं।

वहीं अगर चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बात की जाए अकेले KBK ग्रुप ने बाजार पर 38 फीसदी कब्जा किया हुआ है। जिसमें कंपनी के RealMe, Vivo, Oppo और One Plus जैसे स्मार्टफोन शामिल हैं। इनके अलावा 28 फीसदी के साथ Xiaomi दूसरे नंबर है, जिसने बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार पर कब्जा कर रखा है। इन चीनी कंपनियों ने भारत में मोबाइल निर्माण करने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ मिलकर निवेश किया है। इसके अलावा भारत में बिकने वाले मोबाइल फोन के 99 फीसदी पार्ट्स भारत में ही बनते हैं।

Xiaomi और KBK ने भारत में किया है करोड़ों का निवेश

Xiaomi ने भारत में सात से अधिक प्लांट की स्थापना की है। जो 2500 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। जिसमें 95 प्रतिशत महिला कर्मचारी शामिल हैं। पिछले साल Xiaomi ने भारत में 3500 करोड़ रुपए का निवेश किया था। Xiaomi अभी भारत में PCBA (Printed Circuit Board Assembly) के साथ मिलकर मोबाइल पार्ट्स की असेंबलिंग भी करता है। Xiaomi के अलावा KBK ग्रुप ने भी 7,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जो भारत में मोबाइल फोन के साथ-साथ स्मार्ट टेलीविजन का उत्पादन करेगा। KBK ग्रुप ने फिलहाल 7,000 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया है। कंपनी के उपाध्यक्ष और सीईओ माधव सेठ का कहना है कि कंपनी साल 2020 के अंत भारत में 10,000 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करेगी।

Vivo India के डायरेक्टर-ब्रांड स्ट्रैटिजी निपुन मेरी ने हाल ही में कहा था, “हमारे पास एक साल में 33.5 मिलियन हैंडसेट बनाने की अधिकतम क्षमता है और 10,000 से ज्यादा लोग जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, जो हमारे ग्रेटर नोएडा के कारखाने में काम कर रहे हैं।”

Covid -19 के बाद तीन आयामों से मोबाइल बिक्री में होगी बढ़ोतरी

Covid-19 का असर भारत की मोबाइल इंडस्ट्री पर भी देखने को मिला है। मोबाइल इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने एक बार फिर मोबाइल की बिक्री में बढ़ोत्तरी के लिए तीन नए आयाम बताए हैं। TechARC के संस्थापक और मुख्य विश्लेषक ने कहा “पहला आयाम भावुकता है, जहां नागरिक हाल के घटनाक्रमों के बारे में बुरा महसूस कर रहे हैं, जो बिक्री को प्रभावित करने की संभावना रखते हैं, यद्यपि अभी यह अस्थायी है। वहीं दूसरा आयाम यह है कि हमें चीनी कंपनियों द्वारा पिछले कुछ वर्षों में निवेश, उनके प्रौद्योगिकी निर्माण और तंत्र पर ध्यान देना होगा। इसके अलावा तीसरा और सबसे महत्त्वपूर्ण आयाम बाजार की वास्तविकता है। चीनी कंपनियों को इस स्तर तक पहुंचने में 3 साल तक का समय लगा है। यदि अगर हम अचानक से उन्हें अपने चार्ट से हटा देते हैं, तो उनके शून्य को कौन भरेगा?”

2025 तक 100 बिलियन डॉलर का बाजार बन सकता है भारत

यदि भारत चीनी कंपनियों को भारतीय बाजारों से हटाना चाहता है तो उसे अपनी नीतियों पर काम करना होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार यदि भारत अपनी 3R (Restart, Restore और Recycle ) नीति पर काम करता है तो वह 2025 तक मोबाइल फोन में 100 बिलियन डॉलर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट पर 40 बिलियन डॉलर तक का बाजार बन सकता है। फिलहाल 198 देश मोबाइल फोन का निर्माण करते है, जिसमें चीन और वियतनाम सबसे ज्यादा संख्या में मोबाइल का निर्माण करते है। इस मामले में भारत तीसरे नंबर पर आता है।

यदि भारत भविष्य में आगे बढ़ना चाहता है तो उसे निर्यात बढ़ाना होगा। Indian Cellular and Electronics Association (ICEA) के अध्यक्ष, पंकज मोहिन्द्रो ने कहा “यह कोई रहस्य नहीं है कि भारत की आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चीन में अपनी जड़ें रखता है। आत्म-निर्भरता बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं। इस बीच हमें भरोसा है कि भारतीय और चीनी नेतृत्व मौजूदा सीमा गतिरोध से एक स्थायी समाधान निकालेंगे।” यदि भारतीय कंपनियों को अपने इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूत करना है तो भारत को अपने इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को बढ़ावा देना होगा। तभी आगे जाकर आत्मनिर्भर भारत बन सकता है।


Connect With US- Facebook | Twitter | Instagram

1 Comment

Leave a Reply