छात्र, मजदूर और राजनीति…

कोरोना महामारी ने पूरे देश की कमर तोड़ दी है। पूरा देश कोरोना संकट की मार झेल रहा है। छोटे दुकानदारों से लेकर रेहड़ी वालों और उद्योगपतियों तक हर कोई संकट की इस घड़ी से जूझ रहा है। देश की रीढ़ की हड्डी – हमारे देश के मजदूर सबसे ज्यादा लॉकडाउन की मार झेल रहे हैं। ग्रह मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 4 करोड़ प्रवासी मजदूर हैं जो रोजी रोटी के लिए अपने गांव निवासी कि छोड़कर बड़े शहरों में जाकर मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

अब सवाल उठता है कि क्या वजहें है जिनकी वजह से ये लोग अपना गांव परिवार छोड़ शहरों में मजदूरी करने जाते हैं। रोजगार की कमी, गरीबी, बड़े परिवार और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से मजदूर अपने गांव को छोड़ शहर जाकर मजदूरी करने के लिए मजबूर होते हैं।

देश में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। लॉकडाउन के चलते अपने गांव से दूर शहरों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचने के लिए 1 मई से भारत सरकार द्वारा श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने का एलान किया गया था। पटरियों पर थड़तड़ती हुई पहली श्रमिक स्पेशल ट्रेन ने 1200 प्रवासी मजदूरों को तेलंगाना के लिंगंपल्ली स्टेशन से झारखंड की राजधानी रांची के करीब हटिया स्टेशन पहुंचाया था। इसके बाद ट्रेनों के चलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं लिया। अब तक 1600 से ज्यादा ट्रेनें 30 लाख से भी ज्यादा मुसाफिरों को उनकी मंजिलों तक पहुंचा चुकी है। अपने घर लौट चुके प्रवासी मजदूरों में 80 प्रतिशत मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। रेलवे की मानें तो अगले 10 दिनों में 2600 ट्रेनों के माध्यम से 25 लाख और मजदूरों को उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाया जाएगा।

सिर्फ़ प्रवासी मजदूर ही नहीं, देश में शैक्षणिक संस्थाओं कि कमी होने के कारण देश भर के लाखों बच्चे बड़े शहरों में पढ़ने जाते है। इनमे से एक शहर शैक्षणिक संस्थाओं के लिहाज से देश का सबसे बड़ा केंद्र है – कोटा। राजस्थान के इस शहर में देश भर के लगभग 1.5 लाख बच्चे यहां इंजीनियरिंग और मेडिकल एडमिशन टेस्ट की तैयारी करने आते हैं। लॉकडाउन होने के बाद कोटा में विभिन्न राज्यों के छात्र फंसे हुए थे। कोटा में फंसे छात्रों ने सोशल मीडिया के जरिए उनको उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने की गुहार लगाई। वजह थी – खाने की मैस का बंद हो जाना, कुछ मकान मालिकों द्वारा घर खाली करने के लिए कहना।

लॉकडाउन हुआ तो शहर भर की सभी कोचिंगों पर भी ताले लग गए। पढ़ाई ऑनलाइन कराई जाने लगी। इस वक़्त जब कोरोना का आतंक पूरी दुनिया में फैल रहा था तब बच्चे दूसरे शहर में फंसे हुए थे तो माता पिता को बेचैनी होने लगी। उनके तरफ से भी राज्यों की सरकारों से बच्चों को उनके घरों तक पहुंचाने की अपील की जाने लगी। जिसके बाद योगी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के सभी छात्रों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाया गया।

राजस्थान परिवहन ने भेजा 36 लाख रुपए का बिल

इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटा फंसे हजारों छात्रों को वापस लाने के लिए 530 बसों को राजस्थान भेजा था। उत्तर प्रदेश आने के बाद छात्रों को 14 दिनों के लिए क्वांरंटाइन में रखा गया था। इस पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने योगी आदित्यनाथ के इस कदम को अन्याय बताया। नीतीश कुमार ने कहा कि सिर्फ़ कोटा में फंसे छात्रों को ही उनके घरों तक पहुंचना प्रवासी मजदूरों के साथ नाइंसाफी है। इसके बाद बिहार में विपक्षीय पार्टी के नेता ने नीतीश सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें भी बिहार के छात्रों को वापस लाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के मॉडल को अपनाना चाहिए।

योगी सरकार के इस कदम के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की वाह-वाही पूरे देश में हुई। योगी आदित्यनाथ ने भी विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छात्रों से बातचीत कर उनका हाल जाना। छात्रों ने भी उन्हें उनके घरों तक पहुंचने के लिए यूपी सरकार का धन्यवाद किया।

इसके बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उत्तर प्रदेश सरकार को बकाया 36 लाख रुपए का भुगतान करने के लिए कहा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोटा में फंसे राज्य के छत्रों को लाने के लिए 530 बसें भेजी गई थीं। सरकार का अनुमान था कि छात्रों की संख्या 10 हज़ार के करीब होगी लेकिन वहां जाकर मालूम हुआ कि छात्रों की संख्या 12 हज़ार है।

उत्तर प्रदेश परिवहन के अधिकारियों ने राजस्थान परिवहन के अधिकारियों से अन्य बसों का इंतजाम कराया। राजस्थान परिवहन द्वारा 96 बसों का इंतजाम किया गया था। जिसके एवज में राजस्थान परिवहन द्वारा उत्तर प्रदेश परिवहन से बसों के भुगतान की लिखित अपील करने को कहा। राजस्थान परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बताया कि अब तक 19 लाख रुपए का एडवांस भुगतान ही उत्तर प्रदेश सरकार किया गया था। बकाया राशि के भुगतान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को बिल भेजा गया है। शुक्रवार, 22 मई को योगी सरकार द्वारा शेष राशि का भुगतान भी कर दिया गया है जिसकी जानकारी उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दी।

प्रियंका का प्रस्ताव, बसें हम देंगे आप सिर्फ़ मजदूरों को लाएं

देश में कोई काम बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के पूर्ण हो जाए यह मुश्किल है। उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने 16 मई को योगी सरकार को कांग्रेस सरकार के खर्चे पर 1000 बसें देने के प्रस्ताव की पेशकश की। राजस्थान सरकार ने बसों को आगरा में राजस्थान उत्तरप्रदेश बॉर्डर पर खड़ा कर योगी सरकार से बसों को राज्य में लाने की चिट्ठी लिखकर अनुमति मांगी। लेकिन यह मामला बाद में तूल पकड़ता दिखाया दिया। योगी सरकार द्वारा कांग्रेस महासचिव को चिट्ठी लिखकर बसों के रजिस्ट्रेशन नंबर, चालक और परिचालक के दस्तावेज की सूची देने के लिए चिट्ठी लिखी और फिटनेस टेस्ट के लिए 500 बसों को लखनऊ और 500 बसों को दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर भेजने के लिए कहा। बाद में दोनों ही सरकारों की तरफ से चिट्ठी के जरिए बातचीत का दौर लगातार जारी रहा। दोनों ही सरकारें एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगती हुई नजर आईं।

योगी सरकार ने प्रियंका गांधी वाड्रा पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन 1000 बसों की सूची उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी गई है, उनमें से सिर्फ 879 रजिस्ट्रेशन नंबर ही बसों के हैं बाकी के नंबर सामान ढोने वाले वाहन, एम्बुलेंस, मोटरसाइकिल, थ्री-व्हीलर और कारों के दिए गए हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी द्वारा इन आरोपों को नकारते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया गया। प्रियंका ने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो बसों पर भारतीय जनता पार्टी का झंडा और योगी आदित्यनाथ की फोटो लगा ले लेकिन प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचा दे।

आगरा के ऊंचा नांगला क्षेत्र में उत्तर प्रदेश-राजस्थान बॉर्डर पर खड़ी बसों को आगरा प्रसाधन द्वारा उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश की अनुमति ना देने पर प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव संदीप सिंह और यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू धरने पर बैठ गए। जिसके तहत मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि सोमवार, 18 मई को योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रियंका गांधी वाड्रा के 1000 बसों के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।


Connect With US- Facebook | Twitter | Instagram

Leave a Reply