शहरों की ओर वापस पलायन कर रहे हैं मजदूर, लॉकडाउन के दौरान बमुश्किल लौटे थे घर

Coronavirus | Lockdown forces migrant workers to walk from Manesar ...
शहरों की ओर वापस पलायन कर रहे हैं मजदूर, लॉकडाउन के दौरान बमुश्किल लौटे थे घर (साभार: The Hindu)

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान लाखों की तादाद में मजदूर अपने घर को लौट चुके थे, लेकिन काम की तलाश में फिर से एक बार यूपी, बिहार और झारखंड के मजदूर वापस शहरों की ओर लौट रहे हैं। आखिरकार, पेट पालने के लिए कमाई का जरिया ढूंढना होगा। रक्षाबंधन के बाद से ही दिल्ली के आनंद विहार बस स्टैंड के बाहर हजारों की तादाद में प्रवासी मजदूर शहर में वापस लौटने लगे हैं। किसी के मालिक या फिर ठेकेदार ने उन्हें वापस बुलाया है, या फिर लोग नौकरी की तलाश में दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा जैसे बड़े शहरों में लौट रहे हैं।

दिल्ली में रहकर काम करने वाले रामचंद्र आजमगढ़ से वापस दिल्ली लौट कर आ चुके हैं। कोरोना संक्रमण के बाद देशव्यापी लॉकडाउन के चलते काम बंद होने के बाद वे मजबूरन अपने घर लौट गए थे। लेकिन अब जब फैक्ट्री वापस खुलने लगी है, तो काम के सिलसिले में वापस उनका दिल्ली आना हुआ। उन्होंने बताया कि जिस कंपनी में वह काम कर रहे थे, उसके मालिक ने उन्हें वापस बुलाया है। जब गांव में ज्यादा काम नहीं है तो वापस शहर की तरफ लौटना पड़ेगा। मेरी दो लड़कियां हैं और एक लड़का है। इनका पेट कौन पालेगा।

रामचंद्र दिल्ली की एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे। अब फिर से उसी फैक्ट्री में काम करेंगे। दिल्ली के आनंद विहार बस स्टैंड में सवारियों का तांता लगा हुआ है, लेकिन कंडक्टर 20 से ज़्यादा सवारियां नहीं बैठा रहे हैं। बस पकड़ने की होड़ में मजदूर आपस में ही लड़-झगड जाते हैं, धक्का-मुक्की करते हुए एक साथ ही बस में प्रवेश कर लेते हैं। जिससे सरकार के बनाए हुए नियमों का भी उल्लंघन हो रहा है।

इसी कड़ी में, उत्तरप्रदेश के संभल जिले के रहने वाले दीपक बताते हैं कि होली के अवसर पर वे अपने गांव लौट कर आए थे। लेकिन लॉकडाउन की वजह से वे गांव में ही फंसे रह गए। दिल्ली में रहकर फल-सब्जियों का ठेला लगाया करते थे। दिल्ली में मकान मालिक कराया मांग रहा है। तक़रीबन 5 महीने का किराया बाकी है। लेकिन काम ना होने की वजह से खासी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। अब वापस दिल्ली लौटे हैं, तो फिर से फल का ठेला लगाएंगे।

इसी प्रकार यूपी के बिजनौर जिले के रहने वाले शादाब हिमाचल प्रदेश में रहकर पुताई का काम किया करते थे। लेकिन देशव्यापी लॉकडाउन के चलते अपनी नौकरी गंवा बैठे। काम धंधा बंद हो जाने के बाद वे जैसे-तैसे अपने गांव लौटे, लेकिन अब गुरुग्राम नौकरी की तलाश में आए हुए हैं। शादाब बताते हैं कि ठेकेदार ने उन्हें काम पर बुलाया है। गांव में रहकर भी राजमिस्त्री का काम किया है, लेकिन काम नहीं चल पाया। जितना पैसा मिल रहा था उतने में गुजारा करना बहुत मुश्किल है।

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