मुंबई के धारावी में पैर पसारता कोरोना वायरस, बुरे सपने की आहट

मुंबई में बसी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी कोरोना वायरस के कारण एक बार फिर सुर्खियों में है। बुधवार को यहां कोरोनावायरस के पांच और मामले सामने आए, जिससे घनी आबादी वाली इस झुग्गी बस्ती में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। मुंबई की तुलना में धारावी 10 गुना ज्यादा घनी आबादी वाला इलाका है। धारावी की झुग्गी बस्ती 613 एकड़ में फैली है और इसमें कई छोटे उद्योग, चमड़े का सामान, मिट्टी के बर्तन और कपड़ा फैक्ट्रियां हैं। ऐसे में इस बस्ती में वायरस का प्रसार प्रशासन व सरकार के लिए बुरा सपना साबित हो सकता है। अगर वक्त रहते इसकी रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।

Coronavirus: Dharavi sets off alarm bells for Mumbai municipal ...
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तीसरे चरण से कुछ ही दूर मुंबई

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। बुधवार को 65 नए मरीजों के पॉजिटिव पाए जाने के बाद यह आंकड़ा 1083 पर पहुंच गया है। राज्य में अब तक 64 लोगों की मौत हो चुकी है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कोरोना वायरस का संक्रमण तीसरे चरण (Community Spread) में पहुंचने से चंद कदम ही दूर है। हालांकि अभी तक इसका अधिकृत एलान नहीं हुआ है, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल का कहना है कि देश के कुछ इलाकों में कोरोना संक्रमण तीसरे चरण में पहुंच चुका है। उनका यह इशारा साफ तौर पर मुंबई की ओर ही है, क्योंकि देश में मुंबई ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां मरीजों की संख्या बेतहाशा बढ़ रही है। धारावी के अलावा अब कोरोना का संक्रमण बांद्रा टर्मिनस से सटे बेहरामपाड़ा और कुर्ला के जरीमरी आदि झुग्गियों तक फैल गया है।

संकरी गलियों में घुटती जिंदगी

धारावी में करीब 15 लाख लोग छोटी-छोटी झुग्गियों में रहते हैं। इनमें से ज्यादातर दूसरे राज्यों से आए मजदूर हैं। यह मुंबई का सबसे भीड़भाड़ वाला इलाका है। यहां की संकरी गलियों और एक कमरे से भी कम जगह में बनी झुग्गियों में इतनी बड़ी आबादी रहती है कि यहां सामाजिक दूरी (Social Distancing) बनाए रखने के नियम का पालन भी काफी मुश्किल है। ऐसे में यहां कोरोना का संक्रमण फैलना किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, यहां रहने वाले करीब 3000 लोगों को क्वारंटीन सेंटर भेज दिया गया है। खबर यह भी है कि यहां रहने वाले बहुत से लोग पुलिस व प्रशासन की मदद नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोगों को वायरस के मुकाबले इस बात का डर ज्यादा है कि उनकी नौकरी चली जाएगी या उन्हें क्वारंटीन सेंटर भेज दिया जाएगा।

Image Credit : New York Times

वायरस से ज्यादा सजा का डर

एक अधिकारी ने बताया, ‘धारावी में संक्रमण के सही आंकड़े जान पाना काफी मुश्किल है। कई बार लोग डर के मारे यह भी नहीं बताते कि वे इस दौरान कहां-कहां गए थे। लोगों को डर है कि अगर वे ऐसा करेंगे तो लॉकडाउन के नियमों का पालन नहीं करने के लिए उन्हें सजा दी जाएगी।’ यहां के लोगों को इस बात की जानकारी है कि इस खतरनाक वायरस ने उनके घरों में पैर पसारना शुरू कर दिया है, लेकिन फिर भी वे एक साथ रहने को मजबूर हैं। एकॉर्न फाउंडेशन के डायरेक्टर विनोद शेट्टी के मुताबिक, ‘हम एक ऐसी बस्ती की बात कर रहे हैं जहां 10×10 फीट की टिन की झुग्गी में 10-12 लोग एक साथ रहते हैं। आप उनसे ये उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि वे सारा दिन घर पर बैठे रहेंगे। ये लोग एक गैलन पानी के लिए 25 रुपए खर्च करते हैं तो आप उनसे जल्दी-जल्दी हाथ धोने के लिए कैसे कहेंगे। जहां 8-8 लोग एक ही सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करते हों, आप उनसे कैसे कहेंगे कि वे अपने घरों से बाहर न निकलें। यह कैसे मुमकिन है।’

बेकाबू हो सकते हैं हालात

ये सारी बातें इस बात का सबूत हैं कि धारावी में इस महामारी से लड़ना कितना मुश्किल साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर धारावी में इस वायरस को और फैलने से नहीं रोका गया तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती है और अस्पतालों पर बोझ बढ़ सकता है। कमोबेश यही हाल दूसरे राज्यों के अस्पतालों का भी हो सकता है क्योंकि धारावी में रहने वाले कई प्रवासी मजदूर लॉकडाउन से पहले अपने-अपने घर लौट गए। ऐसे में मुमकिन है कि इनमें से कई लोगों के जरिए कोरोना वायरस को फैलने में मदद मिली होगी। हालांकि कई प्रवासी मजदूर ऐसे भी हैं जो अपनी झुग्गियों में ही हैं और उन्हें प्रशासन या सरकार की और से भोजन व जरूरत का सामान मुहैया कराया जा रहा है। डर इस बात का भी है कि जब लॉकडाउन खत्म होगा तो ये मजदूर अपने घर जाएंगे और अगर जाने-अंजाने में इनके जरिए गांवों में यह वायरस फैला तो स्थिति काफी भयावह हो सकती है क्योंकि आज भी देश के कई गांव ऐसे हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं न के बराबर हैं। ऐसे में धारावी में इस वायरस को फैलने से रोकना बहुत जरूरी है और अधिकारियों के लिए यह काम बहुत मुश्किल।

Source : ET


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