नौकरी चली गई, तो अब तेलंगाना के एक गैस गोदाम में काम करने को मजबूर हुआ शिक्षक

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लाॅकडाउन के कारण देश के सभी स्कूल अनिश्चितकाल तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। इसके कारण बच्चों का भविष्य संवारने वाले शिक्षकों का वर्तमान ही संकट में पड़ गया है। कुछ ऐसी ही स्थिति तेलंगाना के 32 साल के शिक्षक पेइली सत्यनारायण की भी हो गई है. जो लाॅकडाउन लगने से पहले सूर्यपेट शहर के एक निजी स्कूल में पढ़ाते थे। लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद होने होने के बाद सत्यनारायण बेरोजगार हो गए। स्कूल सत्यनारायण की कमाई का एकमात्र जरिया था, जिसके बाद उन्हें अपने परिवार को पालने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।

बच्चों को हिंदी पढ़ाते थे सत्यनारायण

सत्यनारायण के पास तेलगु साहित्य में मास्टर डिग्री है। वह स्कूलों में बच्चों को हिंदी पढ़ाते थे। स्कूल बंद होने के कारण वह अपने 8 महीने के बच्चे और अपनी पत्नी के साथ बेलगोंडा जिले में अपने गांव लौट गए। वहां सत्यनारायण ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम योजना के तहत आवेदन किया। सत्यनारायण को योजना के तहत एक स्थानीय टैंक में डिसिल्टिंग का कार्य मिला, जिसके लिए उन्हें 100 रुपए का दैनिक भुगतान किया जाता है।

लेकिन सत्यनारायण के लिए यह पर्याप्त नहीं था। इसलिए सत्यनारायण कपास के खेतों में मजदूर का काम करने लगे, जहां उन्हें 300 रुपए का दैनिक भुगतान किया जाता है। सत्यनारायण इसके पहले स्कूल में बच्चों को पढ़ाकर महीने में 15,000 रुपए कमाते थे। सत्यनारायण ने अपनी परिस्थिति के बारे में कहा “शिक्षकों को समाज में सम्मान मिलता है और यह एक महान पेशा है, लेकिन अगर मैं अपनी योग्यता के बारे में सोचता तो भुखमरी से मर जाता।”

तेलंगाना में कई शिक्षक गंवा चुके हैं नौकरी

सत्यनारायण जैसी हालत तेलंगाना में कई शिक्षकों की हैं। जो अपनी नौकरी गंवाने के बाद अपना पेट पालने के लिए कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। तेलंगाना में ही रहने वाले जहीर अहमद शेख लाॅकडाउन के पहले स्कूल में बच्चों को हिंदी पढ़ाते थे। जहीर 15,000 रुपए महीने तक कमाते थे, लेकिन लाॅकडाउन के बाद जहीर को भी अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। जिसके बाद जहीर अपने शहर मंचेरियल लौट गए। वहां वे अब एक गोदाम में टेम्पो में सिलेंडर करने का काम करने को मजबूर हो गए हैं। जहीर को इस काम के लिए एक सप्ताह में 500 रुपए का भुगतान किया जाता है।

जहीर ने कहा “चूंकि मैं हैदराबाद में नौकरी के बिना जीवित नहीं रह सकता था, इसलिए मैं अपने शहर लौट आया और गोदाम में काम कर रहा हूं। इतने कम पैसों से मेरा गुजर बसर नहीं हो पा रहा था। इसलिए मैं इमारतों की पेंटिंग भी कर रहा हूँ। कुल मिलाकर, अभी मैं एक महीने में 5,000 रुपए कमा रहा हूं।”

तेलंगाना में हैं 2 लाख से अधिक शिक्षक

लाॅकडाउन के कारण शिक्षकों को हो रहे नुकसान के बारे में तेलंगाना प्राइवेट टीचर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शेख शब्बीर अली ने कहा, “राज्य में 11,700 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं और उनके अधिकांश शिक्षकों ने नौकरी खो दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन स्कूलों में 1,20,350 शिक्षक काम कर रहे थे, लेकिन अनौपचारिक रूप से यह संख्या 250,000 से अधिक है।” लाॅकडाउन लगने के बाद बच्चों को पढ़ाई में नुकसान न हो इसके लिए कई स्कूलों ने बच्चों की ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी है।

इसके बावजूद कई शिक्षकों ने अपनी नौकरी खो दी। इस बारे में अली ने बताया कि कई प्रतिष्ठित स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं फिर से शुरू कर दी हैं, लेकिन उन्होंने बहुत कम शिक्षक लगाए हैं। कई जिलों में, कई बड़े स्कूलों ने समूह बनाए हैं और आम शिक्षकों को ऑनलाइन कक्षाएं लेने में शामिल कर रहे हैं।

अभी स्कूल खुलने की कोई संभावना नहीं

लाॅकडाउन के कारण शिक्षकों हो रहे नुकसान के बारे में तेलंगाना के स्कूल प्रबंधन संघ के अध्यक्ष पापी रेड्डी ने कहा “निजी स्कूलों को शिक्षकों की दुर्दशा के बारे में पता था लेकिन Covid-19 महामारी में अनिश्चितता के कारण हम भी असहाय थे। कुछ ऐसे स्कूल थे, जो शिक्षकों को वेतन का भुगतान करते थे। वह मानने लगे थे कि स्कूलों के फिर से खुलने के बाद निश्चित रूप से शिक्षकों को बकाया का भुगतान करेंगे। हालांकि उनके लिए यह जल्दबाजी भारी पड़ी और उन्हें कुछ शिक्षकों को नौकरी से हटाना पड़ा। “स्कूल खोलने के बारे में उनका कहना है कि जब तक Covid-19 के मामले न्यूनतम स्तर तक नहीं आते, तब तक स्कूलों के आंशिक रूप से फिर से खुलने की कोई संभावना नहीं है। सरकार छात्रों को अनुमति देने में जोखिम लेने के लिए भी तैयार नहीं है। कई निजी स्कूलों को लाॅकडाउन के कारण हुए भारी वित्तीय नुकसान के कारण उनके बंद होने का खतरा है।

पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में भी यही हाल

तेलंगाना की ही तरह आंध्र प्रदेश में भी कई शिक्षकों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। जिसके बाद कई शिक्षक फल सब्जियां बेचकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के प्राइवेट स्कूल टीचर्स यूनियन के अध्यक्ष डिडे अम्बेडकर ने कहा कि राज्य में 12,000 से अधिक मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं, जिनमें 125,000 शिक्षक कार्यरत हैं। कई स्कूलों ने फरवरी से अपने शिक्षकों को वेतन का भुगतान नहीं किया है। जिसके कारण शिक्षकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं।

स्कूल और सरकार दोनों ही दोषी नहीं

आंध्र प्रदेश में शिक्षकों को हो रही परेशानियों के बारे में शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा “राज्य सरकार Covid-19 के बढ़ते मामलों के कारण स्कूलों को फिर से खोलने पर कोई निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। हम नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हम एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों को देखने के बाद ही कुछ करेंगे।” वही NCERT के कार्यकारी समिति के सदस्य डॉ के रामदास ने कहा, “न तो निजी स्कूलों और न ही सरकार को मौजूदा स्थिति के लिए दोषी ठहराया जा सकता है। जैसा कि मैं समझता हूं, दिसंबर तक कम से कम प्राथमिक स्कूल खोलना संभव नहीं है, क्योंकि कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजकर जोखिम लेने को तैयार नहीं होगा।”


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