अफ्रीकी मूल के सिद्दी समुदाय से कर्नाटक विधान परिषद पहुँचने वाले पहले व्यक्ति बने शांताराम बुदना

अफ्रीकी मूल के 55 वर्षीय सिद्दी आदिवासी शांताराम बुदना सिद्दी को राज्यपाल वजुभाई वाला ने कर्नाटक विधान परिषद का सदस्य नामित किया है। 75 सदस्यों वाली विधान परिषद में लंबित कार्यकाल के बाद रिक्त पदों को भरने के लिए उच्च सदन में चार अन्य पूर्व मंत्री एएच विश्वनाथ और सीपी योगेश्वर, शिक्षाविद तलवार सबन्ना और भाजपा महिला विंग की अध्यक्ष भारती शेट्टी के साथ सिद्दी को भी मनोनीत किया गया।

Shantharam is India's first legislator from African-origin Siddi ...
Image Credit: Indian Express

उत्तरी कन्नड़ जिले सिरसी और येल्लापुर के बीच हितलाहल्ली में एक साधारण से घर में रहने वाले सिद्दी अपने समुदाय में स्नातक की पढ़ाई करने वाले पहले व्यक्ति हैं। सिद्दी ने 1989 में वनवासी कल्याण आश्रम से एक युवा कैडर के रूप में जुड़े थे और वर्तमान में आश्रम के सचिव पद पर कार्यरत हैं। वे अपने गाँव में आदिवासी लड़के और लड़कियों के लिए एक सामान्य छात्रावास चलाते हैं, ताकि वे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें। उन्होंने कन्नड़ और हिन्दी में बात करते हुए बताया, “स्नातक होने पर मुझे एक स्कूल शिक्षक के रूप में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था लेकिन मैंने अपने क्षेत्र में खेती करना और अपने समुदाय के कल्याण के लिए काम करना पसंद किया।”

उन्होंने कहा, “विधान परिषद में हमारे आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने और सभी की सेवा करने का मौका मिलने से मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। लोगों की सेवा करना ईश्वर की सेवा करने के बराबर है। मैं केवल सिद्दी समुदाय के बारे में ही नहीं सोचता बल्कि राज्य के सभी आदिवासी समुदायों के बारे में बराबर सोचता हूँ। यहाँ 54 आदिवासी समुदाय हैं जो कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जिनसे निपटने के लिये विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर मिलकर काम करने की जरूरत है।”

राज्य सरकार ने सिद्दी समुदाय को वोटिंग अधिकारों के अलावा शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण सहित इसके लाभों को बढ़ाने के लिए अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी है। सिद्दी ने कहा, “मैं अपने समुदाय को विधायिका में आवाज देने और सभी के हित के लिए कानून बनाने का अवसर देने के लिए राज्य सरकार का आभारी हूं।”

येलापुर के स्थानीय निकाय अधिकारी डीजी हेगड़े ने बताया, “सिद्दी एक जातीय समूह है जो दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका के बंटू-भाषी लोगों से आया और पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा दास के तौर पर तस्करी कर भारत लाया गया। उनके बाल घने और घुंघराले और त्वचा का रंग गहरा होता है, उनकी कद-काठी मजबूत होती है। कई लोग बागानों और कृषि क्षेत्र में मजदूरों के रूप में काम करते हैं। हाल में ही नामित हुए सिद्दी पश्चिमी घाट संरक्षण कार्य बल के सदस्य के रूप में ग्रामीण और वन क्षेत्रों में अन्य जनजातीय समुदायों जैसे गॉलिस और लाम्बानी के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं।”

बता दें कि, सिद्दी जनजाति 6000 लोगों का एक छोटा समुदाय है, जिनमें से अधिकांश पश्चिमी घाट के जंगलों में निवास करते हैं। उनकी भाषा, रहन-सहन और संस्कृति अलग है।

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