17 साल के लड़के ने दिखाई बहादुरी, चिंकारा को बचाने के लिए हथियारबंद शिकारियों से जा भिड़ा

राजस्थान के बिश्नोई समुदाय को प्रकृति और पशु-पक्षियों की हिफाजत करने के लिए जाना जाता है। इसी समुदाय का 17 साल का एक लड़का मुकेश बिश्नोई सोशल मीडिया पर मशहूर हो गया है। जोधपुर-जैसलमेर हाईवे पर बसे भालू रजवा (केतु) गांव में रहने वाले मुकेश ने ऐसा काम किया है कि हर जगह उसकी तारीफ हो रही है। मुकेश ने रविवार को जोधपुर के एक गांव में चिंकारा का शिकार करने आए कुछ हथियारबंद लोगों का बहादुरी से सामना किया और उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया। हालांकि वह चिंकारा को तो नहीं बचा पाया, लेकिन उसने एक शिकारी की बंदूर जरूर छीन ली। उसकी बहादुरी की तारीफ पूरे गांव सहित सोशल मीडिया पर भी हो रही है। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा ने इस साहसिक काम के लिए मुकेश को प्रशस्ति पत्र भी दिया है।

17 साल के लड़के ने दिखाई बहादुरी, चिंकारा को बचाने के लिए हथियारबंद शिकारियों से जा भिड़ा - सूचना
Image Credit : Hindustan Times

चिंकारा को बचाने वाली टीम का हिस्सा हैं मुकेश

मुकेश बिश्नोई चिंकारा की रक्षा करने वाली 15 सदस्यीय टीम का हिस्सा हैं। कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। चिंकारा के मांस के लिए शिकारी उसका शिकार करते हैं। 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले मुकेश ने कहा, ‘लॉकडाउन से पहले हमारी टीम हफ्ते में दो बार रात को गश्त लगाती थी, लेकिन लॉकडाउन में हम हफ्ते के सातों दिन काम कर रहे हैं। पेड़-पौधों और वन्यजीवों की रक्षा करना हमारा धर्म है।’ रविवार रात को टीम के बाकी सदस्यों को उनके घर छोड़ने के बाद मुकेश अपने दोस्त पुखराज के साथ घर लौट रहे थे। दोनों भालू अनूपगढ़ के एक सरकारी स्कूल में पानी पीने के लिए रुके थे। तभी उन्होंने गोली चलने की आवाज सुनी।

अकेले ही किया हथियारबंद शिकारियों का पीछा

घटना के बारे में मुकेश ने बताया, ‘हमने गोली चलने की आवाज सुनी और अपनी जीप लेकर उस दिशा में भागे। कुछ दूरी पर हमने देखा कि चार हथियारबंद लोग चिंकारा को लेकर जा रहे हैं। हमें देखते ही उन्होंने दौड़ना शुरू कर दिया। हमारी जीप रेत में धंस गई, इसलिए मैं उनके पीछे दौड़ने लगा। इतने में दो शिकारी चिंकारा को लेकर भाग निकले। एक शिकारी ने पीछे से मुझे धक्का दिया और अपने एक साथी को मेरी पकड़ से छुड़ा लिया। इस दौरान मैंने एक शिकारी से उसकी बंदूक छीन ली। बंदूक वहीं छोड़ सभी शिकारी भाग निकले।’ मुकेश व पुखराज ने चिंकारा के शरीर से बह रहे खून के निशान के जरिए शिकारियों का पीछा किया। कुछ देर बाद पुलिस व वन विभाग की टीम वहां पहुंची, लेकिन तब तक शिकारी वहां से गायब हो चुके थे।

सोशल मी़डिया पर मुकेश की तारीफ कर रहे लोग

इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के अधिकारी प्रवीण कासवां ने मुकेश की बहादुरी का किस्सा ट्विटर पर शेयर किया। इसके बाद इंडियन फॉरेस्ट सर्विस ने भी अपने आधिकारिक अकाउंट पर इस ट्वीट को शेयर किया और देखते ही देखते मुकेश बिश्नोई सोशल मीडिया के हीरो बन गए।

पर्यावरण संरक्षण के लिए पश्चिमी राजस्थान में काम करने वाली एक गैर सरकारी संस्था- द ईआरडीएस फ़ाउंडेशन ने मुकेश बिश्नोई का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें मुकेश ने घटना के बारे में विस्तार से बताया है। वीडियो में वह कहते हैं कि उन्होंने शिकारियों की बंदूक पकड़ ली, लेकिन वे भाग निकले।

हिरण, खासकर चिंकारा के शिकार को रोकने के लिए राजस्थान का बिश्नोई समुदाय विख्यात है। समाज के कई लोग हिरणों को बचाने की कोशिश में शिकारियों की गोली का शिकार हो चुके है। राजस्थान के बिश्नोई बाहुल्य इलाकों में हिरणों की संख्या सबसे ज्यादा पाई जाती है।


Connect With US- Facebook | Twitter | Instagram

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *