अमिता वरुण का 17वीं बार हुआ ट्रांसफर, 2018 में इलाहाबाद कोर्ट ने बताया था इसे “सत्ता का खेल”

अपनी ईमानदारी के कारण कई बार ट्रांसफर की सजा भुगत चुकीं ईओ अमिता वरुण का‌ 17वीं बार ट्रांसफर होने जा रहा है।

दरअसल, अधिकारी अमिता वरुण को उनके 13 साल के करियर में 17वीं बार स्थानांतरित किया जा रहा है। वरुण साल 2007 के बैच की अधिकारी हैं, और पिछले साल सितंबर से मेरठ के सरधना नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) के रूप में सेवारत हैं।

परन्तु इस बार स्थानीय राजनेताओं संग अमिता के वाद-विवाद शामिल रहे हैं। यही कारण है कि, रविवार की रात को उन्हें मेरठ के सरधना से बुलंदशहर के जहांगीराबाद में स्थानांतरित कर दिया गया।

22 सितंबर को सरधना में अमिता वरुण के कार्यकाल के दौरान दिल का दौरा पड़ने की वजह से एक संविदा कर्मचारी अजय छाबड़ा की मौत हो गई थी। परिजनों ने ईओ अमिता वरुण द्वारा उसका उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया था। साथ ही उसी उत्पीड़न के चलते उसकी मौत होने की बात कही थी।

यह है पूरा मामला

परिजनों ने ईओ व चेयरपर्सन के पुत्र के खिलाफ थाने में तहरीर भी दी थी। हालांकि तहरीर पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

वहीं, अजय छाबड़ा की तीन दिन पूर्व कुमार पैलेस में शोक सभा हुई थी, जिसमें बीजेपी विधायक संगीत सोम भी शामिल हुए थे। विधायक ने अजय की मौत पर दुख जताया था, और साथ ही ईओ के खिलाफ कार्रवाई कराने का परिजनों से वादा किया था। जिसके बाद अमिता का स्थानान्तरण कर दिया गया।

तबादला है ‘सत्ता का खेल’

बार-बार तबादलों से परेशान होकर साल 2018 में प्रांतीय सिविल सेवा अधिकारी अमिता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जहां दो न्यायाधीशों की एक पीठ ने उनके तबादलों के सिलसिले पर गौर फरमाते हुए इसे “सत्ता का खेल करार दिया था।”

इसके बाद कोर्ट ने यह भी कहा था, “हमें पिछले रिकॉर्डो से ऐसा कुछ भी नहीं मिला है कि याचिकाकर्ता (अमिता वरुण) किसी भी तरह के भ्रष्टाचार में शामिल रही हैं।”


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