कोरोना संकट के बीच कोलकाता में 300 से ज्यादा नर्सों ने दिया इस्तीफा

देशभर में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल से एक बुरी खबर सामने आई है। यहां बड़ी तादाद में नर्सें काम छोड़कर अपने घर लौट रही हैं, जिसके कारण बंगाल अब एक बड़े संकट में घिरता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में काम करने वाली 300 से ज्यादा नर्सों ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है और अपने गृहराज्य मणिपुर, त्रिपुरा, ओडिशा और झारखंड लौट रही हैं। कोलकाता के निजी अस्पतालों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस हफ्ते की शुरुआत में मणिपुर की 185 नर्सों ने नौकरी से इस्तीफा दिया था। इसके बाद शनिवार को 169 नर्सों ने भी इस्तीफा दे दिया। इनमें 92 मणिपुर की, 43 त्रिपुरा की, 32 ओडिशा की और दो नर्सें झारखंड की हैं। एक निजी अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान पहले से ही नर्सों की कमी है और ऐसे में इन नर्सों के चले जाने से दिक्कत और बढ़ेगी। इस निजी अस्पताल की भी नौ नर्सें नौकरी छोड़कर जा चुकी हैं। कोलकाता और हावड़ा में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में नर्सों का इस्तीफा आने वाले समय में बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।

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Image Credit : New Indian Express

AHEI ने मुख्य सचिव से दखल देने को कहा

एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटल्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया (AHEI) ने मुख्य सचिव राजीव सिन्हा को पत्र लिखकर इस मामले में दखल देने की मांग की है। AHEI एक गैर-संवैधानिक संगठन है और कोलकाता के 17 निजी अस्पताल इसके सदस्य हैं। AHEI के अध्यक्ष प्रदीप लाल मेहता ने अपने पत्र में लिखा, ‘हालांकि ये नर्सें इस्तीफा क्यों दे रही हैं, इसकी सही वजह अभी पता नहीं है, लेकिन अभी भी ड्यूटी कर रही दूसरी नर्सों से पता चला है कि मणिपुर सरकार इन नर्सों को घर लौटने के लिए अच्छा वेतन दे रही है। शायद इसी वजह से नर्सें नौकरी छोड़कर जा रही हैं।’

मणिपुर सरकार ने कहा, नहीं जारी की एडवाइजरी

वहीं मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस दावे को खारिज करते हुए एक वी़डियो जारी करके कहा है, ‘राज्य की ओर से इस तरह की कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है। हमने किसी भी नर्स को लौटने के लिए नहीं कहा है। हमें तो उन पर गर्व है कि वे दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई व अन्य शहरों में मरीजों की सेवा कर रही हैँ।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमने पहले ही कहा है कि हम कोरोना मरीजों का इलाज करने वाली नर्सों को पुरस्कृत करेंगे। हालांकि ऐसे डॉक्टर और नर्स, जिन्हें उनके अस्पताल में किसी तरह की परेशानी है, मैं उन पर वहां रुकने का दबाव नहीं डाल सकता। यह उनका खुद का फैसला है। शायद यही कारण है कि वे वापस लौट रही हैं।’

नर्सों को अपने परिवार और माता-पिता की चिंता

इसी हफ्ते इस्तीफा देकर मणिपुर के लिए रवाना हुई एक नर्स ने बताया कि सुरक्षा की चिंता और अभिभावकों का दबाव, यह दो कारण हैं, जिनके चलते उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी। उन्होंने कहा, ‘हमारे अभिभावक चिंतित हैं और यहां रोजाना मामले बढ़ने से हम भी काफी तनाव में हैं। हमारा राज्य एक हरित प्रदेश है और हम घर वापस जाना चाहते हैं। इसमें राज्य सरकार हमारी मदद कर रही है। परिवार और माता-पिता हमारी प्राथमिकता हैं।’ एक अन्य नर्स ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘अगर हम जिंदा बचे तो आगे भी नौकरी मिल जाएगी।’ इस बीच पश्चिम बंगाल में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण से 10 और लोगों की मौत हो जाने से कुल मृतक संख्या बढ़ कर 153 हो गई है। वहीं, पिछले 24 घंटे में संक्रमण के कम से कम 84 नए मामले सामने आने के साथ कुल मामले बढ़कर 1407 हो गए हैं।


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