छत्तीसगढ़ : डॉक्टरों ने जिंदा महिला को बताया मृत, अंतिम संस्कार के वक्त चलती मिली सांसें

देशभर में कोरोना की दूसरी लहर का कहर जारी है। अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी के कारण रोजाना हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। इस महामारी के बीच छत्तीसगढ़ से एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है। यहां के सबसे बड़े अस्पताल भीमराव अंबेडकर अस्पताल में डॉक्टरों की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां के डॉक्टरों ने 75 साल की एक बुजुर्ग महिला को मृत घोषित कर दिया, जबकि अंतिम संस्कार के वक्त वह जिंदा निकली। महिला के जिंदा होने का पता तब चला जब परिवारवाले अंतिम संस्कार के लिए उसे श्मशान घाट ले गए। बताया जा रहा है कि महिला राजधानी रायपुर के कुशालपुर की रहने वाली है।

Woman found alive minutes before cremation, dies on way back to hospital
Image Credit : Newstrack

चिता पर लिटाते वक्त जिंदा मिली महिला

श्मशान घाट पर जब महिला को चिता पर लिटाया जा रहा था, तभी परिजनों को लगा कि शायद उनकी पल्स चल रही है। इसके बाद जब डॉक्टरों ने महिला की पल्स चेक की तो वह जिंदा मिली। इस घटना से वहां मौजूद सभी लोग घबरा गए। महिला के जिंदा होने की खबर मिलते ही उनके परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद महिला के परिजन उसे वापस अस्पताल ले गए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। महिला का कोविड टेस्ट भी निगेटिव आया था।

दोबारा अस्पताल ले जाते वक्त हुई मौत

महिला की नातिन निधि ने बताया कि उनकी नानी लक्ष्मी बाई अग्रवाल दोपहर को खाना खाते वक्त बेहोश हो गई थीं। हम लोग तुरंत उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उन्हें देखा और कहा कि उनकी मौत हो गई है। इसके बाद हम लोग नानी को लेकर गोकुल नगर श्मशान घर पहुंचे। वहां चिता पर लिटाते वक्त हमें महसूस हुआ कि नानी के शरीर में हरकत हो रही है। हमने तुरंत एक डॉक्टर को बुलवाया। डॉक्टर ने चेक करने के बाद बताया कि नानी की सांस चल रही है और उनका ऑक्सीजन लेवल करीब 85 है। डॉक्टर ने कहा कि वह जिंदा हैं और हम तुरंत उन्हें लेकर अस्पताल जाएं। हम उन्हें एंबुलेंस से लेकर वापस अस्पताल पहुंचे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाया आरोप

बुजुर्ग महिला की नातिन निधि ने अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनकी नानी का ईसीजी ठीक से नहीं किया गया और अस्पताल के कर्मचारियों ने भी उनकी कोई मदद नहीं की। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने वो कीमती वक्त बर्बाद कर दिया, जिसमें उनकी नानी को बचाया जा सकता था। वहीं अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि जब महिला को यहां लाया गया था, तो उनकी मौत हो चुकी थी।


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