कर्नाटक के हुबली में कोरोना मरीजों का इलाज कर रही नर्स को झेलना पड़ रहा सोशल बायकॉट

भारत सहित पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है। दुनिया भर में डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना वॉरियर्स कहकर सम्मान दिया जा रहा है क्योंकि वे अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जिंदगी बचाने में जुटे हैं। ऐसे कई स्वास्थ्यकर्मी भी हैं जो कोरोना के मरीजों का इलाज करने के दौरान खुद इस वायरस का शिकार हो गए, लेकिन फिर भी वे अपने कर्तव्य का पालन करने से पीछे नहीं हटे। हमारे देश में भी डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मी, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी और अन्य लोग जो कोरोना के खिलाफ लड़ रहे हैं, उन्हें सम्मान की नजरों से देखा जा रहा है। वहीं कर्नाटक के हुबली जिले में इसके उलट एक मामला सामने आया है। यहां एक नर्स को अपनी ड्यूटी करने के कारण ही परेशान किया गया और उसके साथ भेदभाव किया गया।

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छह महीने से कर रहीं कोरोना मरीजों का इलाज

यह नर्स केआईएमएस नाम के एक सरकारी अस्पताल में काम करती हैं और पिछले छह महीने से वह कोरोना वायरस के वार्ड में लोगों के इलाज में जुटी हैं। कोरोना मरीजों के इलाज के दौरान उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को पूरी तरह से भुला दिया और कई महीनों तक अपने परिवार से भी नहीं मिलीं। तीन दिन पहले, उनके वार्ड की एक नर्स कोरोना पॉजिटिव निकली और उसे इलाज के लिए ले जाया गया। तभी से उनके मोहल्ले के लोगों ने उनका बहिष्कार करना शुरू कर दिया।

लोगों के बर्ताव से दुखी हैं नर्स

नर्स ने बताया, ‘मैं छह महीने से कोरोना वार्ड में काम कर रही हूं। मैंने अपना काम करने के लिए अपने परिवार को भी खुद से दूर रखा। मेरे वार्ड की कुछ नर्सों के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद लोगों ने मुझे और मेरे परिवार को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया है। उन्हें लगता है कि हम भी इस वायरस से पीड़ित हैं। लोग हमसे दूर भागते हैं, बात नहीं करते हैं और अपने बच्चों को भी हमारे बच्चों के पास आने नहीं देते।’ लोगों के इस बर्ताव से यह नर्स बेहद दुखी हैं। उन्हें इस बात की हैरानी है कि कोरोना वार्ड में काम करना कितना जोखिम भरा है, यह जानते हुए भी लोग उनके परिवार के साथ इतना बुरा बर्ताव कर रहे हैं। वह कहती हैं, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने हमें कोरोना वॉरियर्स कहकर संबोधित किया था, लेकिन लोग हमें उस नजर से नहीं देखते। इससे हमें काफी दुख होता है।’

कोरोना वॉरियर्स के लिए कानून बनाने की मांग

भेदभाव की शिकार इस नर्स के भाई ने बताया कि उनके मोहल्ले के लोगों ने उनके पूरे परिवार को अलग-थलग कर दिया है। वह कहते हैं, ‘मेरी बहन के साथ काम करने वाली एक नर्स के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद हमारी पूरी कॉलोनी ने हमें नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। लोग हमें देखकर रास्ता बदल लेते हैं और हमारे नजदीक तक नहीं आते।’ हुबली के एक स्थानीय कार्यकर्ता शाहजमन मुजाहिद ने प्रधानमंत्री मोदी से कोरोना वॉरियर्स की सुरक्षा के लिए एक कानून लाने की अपील की है। उनका कहना है कि ये लोग वही काम कर रहे हैं जो सरहद पर खड़े जवान करते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वॉरियर्स के साथ भेदभाव करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि लोगों की जिंदगी बचाने वालों की जिंदगी खुशहाल रहे।

Source : India Today


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