माय गवर्नमेंट के सीईओ ने बताया, आरोग्य सेतु ऐप में निजी जानकारी लीक होने का खतरा नहीं

कोरोना वायरस से बचाव के लिए केंद्र सरकार के नीति आयोग ने कुछ हफ्तों पहले आरोग्य सेतु नाम का एक ऐप बनाया था। इस ऐप के देशभर में फिलहाल करीब नौ करोड़ यूजर्स हैं। सरकार ने सभी सरकारी और प्राइवेट जॉब करने वालों के लिए इस ऐप को डाउनलोड करना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि इस ऐप के लॉन्च के समय से ही इसकी सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस ऐप से यूजर्स की निजी जानकारियां सरकार को मिल रही हैं। लोग इस बात को लेकर भी फिक्रमंद हैं कि सरकार उनकी निजी जानकारियों का किस तरह इस्तेमाल करेगी। वहीं इस ऐप से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इस ऐप का उद्देश्य लोगों की जानकारी चुराना नहीं बल्कि उन्हें सतर्क करना है।

माय गवर्नमेंट के सीईओ ने बताया, आरोग्य सेतु ऐप में निजी जानकारी लीक होने का खतरा नहीं
Image Credit : Times Now

फ्रांस के हैकर ने बताई थीं ऐप में खामियां

आरोग्य सेतु ऐप में डेटा सुरक्षा के सवाल पर सरकार ने सफाई दी कि इसमें यूजर्स की निजी जानकारी लीक होने का कोई खतरा नहीं है। सरकार को यह सफाई इसलिए देनी पड़ी क्योंकि हाल ही में फ्रांस के एक हैकर और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट इलियट एल्डर्सन ने दावा किया था कि आरोग्य सेतु ऐप की सुरक्षा में कई खामियां हैं। उसने ट्विटर के जरिए आरोग्य सेतु टीम से कहा था कि आपके ऐप में सिक्योरिटी का इश्यू है। नौ करोड़ लोगों की प्राइवेसी को खतरा है। क्या आप मुझसे अलग से बात कर सकते हैं? हैकर ने यह भी कहा कि राहुल गांधी सही थे। ऐसा उसने इसलिए कहा क्योंकि कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आरोग्य सेतु ऐप में डेटा की सुरक्षा पर सवाल उठाया था। अब इलियट एल्डर्सन ने आरोग्य सेतु ऐप को हैक करने का दावा करते हुए ट्वीट किया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, सेना, गृह मंत्रालय में कितने लोगों की तबीयत ठीक नहीं है और यह जानकारी उन्हें आरोग्य सेतु ऐप से ही मिली है।

माय गवर्नमेंट के सीईओ ने कहा, सुरक्षित है ऐप

आरोग्य सेतु ऐप की सुरक्षा पर उठे सवालों का जवाब देते हुए माय गवर्नमेंट के सीईओ अभिषेक सिंह कहते हैं, ‘आरोग्य सेतु ऐप को एनआईसी और तकनीकी टीम ने बनाया है, ऐप में साइन इन करने में एक आईडी जेनरेट होती है और वह उस नंबर के व्यक्ति को ही मिलती है। इसके बाद इस ऐप में आगे बढ़ने के लिए आपसे कई सवाल पूछे जाएंगे जिसके बाद आप यह जान सकेंगे कि आप कोरोना से कितने सुरक्षित हैं।’ वह आगे बताते हैं, ‘इस ऐप के यूजर को कोरोना के रिस्क जोन में जाने या किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर ही नोटिफिकेशन मिलता है।’ ऐप से जुड़ी जानकारी लीक होने होने के बारे में उनका कहना है, ‘भारत सरकार केवल मेडिकल इमरजेंसी जैसी सुविधा के लिए ही यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल करेगी। इसके अलावा किसी और काम में इस डेटा का इस्तेमाल नहीं होगा। यह ऐप किसी की भी व्यक्तिगत पहचान को उजागर नहीं करेगा। कोरोना संक्रमित मरीज की जानकारी किसी भी व्यक्ति को साझा नहीं करेगा।’ उन्होंने बताया कि 30 दिन के बाद हम सामान्य व्यक्ति का डेटा सर्वर से हटा देते हैं। वहीं कोरोना संक्रमित मरीज का डेटा 60 दिन में हटा दिया जाता है।

केवल संक्रमितों का डेटा ही जाएगा सरकार तक

ऐप के जरिए लोगों की निजी जानकारी सरकार को मिलने के सवाल पर अभिषेक कहते हैं, ‘इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन के लिए दी गई निजी जानकारी यूजर्स के स्मार्टफोन में ही सुरक्षित रहती है। अगर कोई यूजर कोरोना संक्रमित है, तभी उसकी जानकारी सरकार के पास जाएगी और वो भी इनक्रिप्टेड फॉर्म में। इसका भी केवल एक ही मकसद है कि पिछले 14 दिनों में आप जिन लोगों के संपर्क में आए हैं, उन्हें चेतावनी दी सके।’ उन्होंने कहा कि इस ऐप को अब तक नौ करोड़ लोग डाउनलो़ड कर चुके हैं और हर किसी का डेटा सर्वर में भेजने की जरूरत नहीं है। सिंह के मुताबिक, कोरोना महामारी खत्म होने के बाद लोगों को आरोग्य सेतु ऐप की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बकौल अभिषेक सिंह, हम सभी स्मार्टफोन यूजर्स को यह ऐप डाउनलोड करने के लिए कह रहे हैं। इस ऐप को सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 1.25 करोड़, महाराष्ट्र में 95 लाख और गुजरात में 52.44 लाख लोगों ने डाउनलोड किया है। लक्षद्वीप में 1200 लोगों ने ही इसे डाउनलोड किया है। उन्होंने कहा, ‘फिलहाल हमारी यही कोशिश है कि इस ऐप को सभी लोग डाउनलोड करें क्योंकि इस ऐप का फायदा तभी है जब इसे ज्यादा से ज्यादा लोग इस्तेमाल करें, जिससे सरकार आसानी से कोरोना संक्रमितों की पहचान कर सके।’

जियोफोन यूजर्स के लिए भी शुरू होगा यह ऐप

अभिषेक सिंह का कहना है कि देश में इस समय 40 से लेकर 50 करोड़ तक स्मार्टफोन यूजर्स हैं। इसके साथ ही फीचर फोन यूजर्स की भी कमी नहीं है। इसके अलावा 11 करोड़ जियोफोन यूजर्स भी हैं। तो ऐसे में इन सभी यूजर्स को आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप से जोड़ना बहुत जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि कोरोना वायरस को पूरी तरह से ट्रैक करने के लिए सरकार जल्द जियोफोन यूजर्स के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप लॉन्च करेगी। हालांकि, उन्होंने इस ऐप के लॉन्च का तारीख का खुलासा नहीं किया। वहीं सरकार ने बुधवार को फीचर फोन और लैंडलाइन यूजर्स के लिए आरोग्य सेतु आईवीआरएस सेवा शुरू की। इस सेवा के तहत फीचर फोन और लैंडलाइन यूजर्स 1921 टॉल-फ्री नंबर पर मिस्ड कॉल देकर वायरस से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं। खास बात यह है कि यह सेवा 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।

कैसे काम करता है आरोग्य सेतु ऐप

आरोग्य सेतु ऐप को कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए बनाया गया है। यह ऐप लोगों को बताएगा कि वे किसी कोरोना संक्रमित शख्स के संपर्क में आए हैं या नहीं। इसके अलावा इस ऐप से आप यह भी पता लगा सकते हैं कि आपको कोरोना संक्रमण का कितना खतरा है। यह ऐप हिंदी, अंग्रेजी और मराठी समेत 11 भाषाओं में उपलब्ध है। इस ऐप में कोरोना वायरस के रोकथाम के तरीके भी बताए गए हैं। इसके अलावा यह ऐप आपकी लोकेशन और ट्रैवल हिस्ट्री के आधार पर बताएगा कि आपको कोरोना संक्रमण का खतरा है या नहीं। ऐप को डाउनलोड करने के बाद नाम और मोबाइल नंबर के साथ इसमें खुद को रजिस्टर करना होगा। इसके बाद भाषा का चयन करना होगा। ऐप खोलते ही यह आपको बताएगा कि आपको कोरोना के संक्रमण का खतरा है या नहीं।


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