मुरादाबाद : कोरोना की जांच के लिए आई टीम पर पथराव, पुलिस ने 17 लोगों को किया गिरफ्तार

देशभर में जहां कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए कोशिशें की जा रही हैं, वहीं कुछ ऐसी खबरें भी आ रही हैं जो इस महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर बना रही हैं। देश के कई हिस्सों में कोरोना की जांच के लिए गई मेडिकल टीमों पर पथराव जैसी शर्मनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में भी बुधवार को ऐसी ही एक घटना सामने आई, जिसने एक बार फिर कोरोना वॉरियर्स को सकते में डाल दिया है।

मुरादाबाद : कोरोना की जांच के लिए आई टीम पर पथराव, पुलिस ने 17 लोगों को किया गिरफ्तार
Image credit: Patrika

मुरादाबाद के नवाबपुरा इलाके में कोरोना वायरस के दो संदिग्ध मामलों की जांच करने आए डॉक्टर और पैरामेडिकल टीम पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। भीड़ ने न केवल एंबुलेंस और डॉक्टरों पर पत्थर फेंके, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों को बचाने के लिए आई पुलिस वैन पर भी पथराव किया। इस घटना में एक डॉक्टर सहित तीन लोग घायल हो गए हैं। पुलिस ने इस मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें सात महिलाएं शामिल हैं। सभी आरोपियों का मेडिकल टेस्ट कराने के बाद गुरुवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। उन्होंने पुलिस को आदेश दिया था कि आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और आपदा प्रबंधन नियम के तहत कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि पथराव और हमले में क्षतिग्रस्त हुई सार्वजनिक संपत्ति की भरपाई भी आरोपियों से ही कराई जाएगी।

हमले के बाद से मुरादाबाद के नवाबपुरा इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इस हमले में कई पुलिसवालों को भी चोंटें आई हैं। डीएम और एसएसपी ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर पथराव में शामिल सात महिलाओं समेत 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इन 17 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 188, 269, 270, 332, 353, 307 और कईअन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में शामिल 200 अज्ञात आरोपियों की खोज जारी है। इन पर जानलेवा हमले और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच से पता चलता है कि इस कार्य को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है।

वहीं खबरों को मानें तो जिस इलाके में यह घटना घटी है, वहां सरकारी नुमाइंदों या अफसरों के साथ मार-पीट और हमले की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। वहीं कुछ लोग इस घटना के विरोध और समर्थन में भी उतर आए हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इस घटना का विरोध कर रहे हैं तो कुछ इसे साजिश बता रहे हैं।

आपको बता दें कि यह हमला तब किया गया जब स्वास्थ्य विभाग की टीम एक कोरोना संक्रमित व्यक्ति के परिवार को क्वारंटीन करने के लिए पहुंची थी। कुछ न्यूज वेबसाइट के मुताबिक, मुरादाबाद के पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने बताया, ‘नागफनी थाना क्षेत्र के हॉटस्पॉट में बुधवार दोपहर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पर महिलाओं और कुछ लोगों ने पथराव कर दिया। स्वास्थ्य टीम पुलिस को साथ लेकर दो दिन पहले हुई कोरोना पॉजिटिव कारोबारी की मौत के बाद उसके परिवार और आस-पड़ोस के सदस्यों को क्वारंटीन करने गई थी। पथराव की सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंच गए, लेकिन उसके बाद भी हमले होते रहे। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।’

बताया यह भी जा रहा है कि नागफनी थाना क्षेत्र के नवाबपुरा के रहने वाले एक कोरोना पॉजिटिव कारोबारी की दो दिन पहले तीर्थंकर मेडिकल विश्वविद्यालय अस्पताल में मौत हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसके परिवार और आस-पास के 53 लोगों का टेस्ट किया, जिसमें से 17 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद इलाके को हॉटस्पॉट घोषित कर दिया गया था और स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही थी। इसी बीच घर में क्वारंटाइन किए गए मृतक के भाई की भी अचानक हालत बिगड़ गई। इस घटना के बाद मुरादाबाद के स्वास्थ्यकर्मियों ने कोरोनो संक्रमण की जांच के लिए डोर-टु-डोर स्क्रीनिंग करने से इनकार कर दिया है।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी शर्मनाक घटनाएं

मुरादाबाद में हुई पत्थरबाजी की घटना नई नहीं है। इससे पहले भी देश के अलग- अलग हिस्सों में ऐसी शर्मनाक घटनाएं हो चुकी हैं-

नई दिल्ली : राजधानी के निजामुद्दीन इलाके में मरकज की एक इमारत से 2000 से ज्यादा जमातियों को निकाला गया था। इनमें से 167 लोगों को क्वारंटाइन सेंटर ले जाया गया था, जहां जमातियों ने पूरी इमारत में जगह-जगह थूका था। उन्होंने पुलिस, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को गालियां दी थीं और उन पर भी थूका था। एक शख्स ने तो खुदकुशी करने की कोशिश भी की थी।

इंदौर (मध्य प्रदेश) : शहर के टाटपट्टी बाखल इलाके में कोरोना संक्रमितों की जांच करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम पर यहां के लोगों ने पथराव किया था। सिलावटपुरा में एक कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत के बाद टीम संदिग्धों की जांच के लिए आई थी।  

मुजफ्फरपुर (बिहार) : मुजफ्फरपुर में 11 साल की एक बच्ची की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों की जांच करने गई थी, लेकिन  भीड़ ने टीमों पर हमला कर दिया। दो पुलिस जवानों को पीट-पीटकर घायल कर दिया गया।  

सहारनपुर (यूपी) : सहारनपुर के जमालपुर गांव में एक मस्जिद के बाहर इकट्ठा लोगों को पुलिस ने हटने के लिए कहा था। इस बात पर लोग पथराव और मारपीट करने लगे। दो पुलिस जवानों को चोटें आईं। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें भी भीड़ ने छुड़ा लिया। इस मामले में पुलिस ने 26 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

रायपुर (छत्तीसगढ़) : यहां नगर निगम के कर्मचारी लॉकडाउन के दौरान सैनिटाइजेशन का काम कर रहे थे। लेकिन, कुछ लोगों ने इन कर्मचारियों से बदसलूकी की और उन्हें मारा-पीटा।

बेंगलुरु (कर्नाटक) : बेंगलुरु में कोरोना वायरस से जुड़ा डेटा लेने गई एक आशा कार्यकर्ता पर लोगों ने हमला किया था। कार्यकर्ता का आरोप है कि एक मस्जिद से लोगों को भड़काया गया और इसके बाद उन पर हमला किया गया।

रांची (झारखंड) : रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में मलेशिया की एक महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी। जिस घर से महिला मिली, उसके आसपास रहने वाले लोगों की जांच के लिए जब मेडिकल टीम यहां पहुंची तो स्थानीय लोगों ने इनका विरोध किया। ये लोग प्रशासन पर हिंदपीढ़ी क्षेत्र को बदनाम करने का आरोप लगा रहे थे। भीड़ ने टीम को वहां से भगा दिया।

जयपुर (राजस्थान) : शहर के रामगंज इलाके में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों पर कुछ लोगों ने पत्थर फेंके। हमले में दो पुलिसकर्मी घायल हुए। इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है।  

टोंक (राजस्थान) : कोतवाली इलाके में सर्वे करने पहुंची छह सदस्यीय टीम पर लोगों ने हमला किया था। लोगों ने मेडिकल टीम के सदस्यों से मारपीट व गाली-गलौज की और उनके कागजात फाड़कर नाली में फेंक दिए। इस मामले में दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

डॉक्टरों और पुलिस पर हमला करने वाले लोगों को शायद कोरोना वायरस की गंभीरता का अंदाजा नहीं है, तभी तो ये लोग उन्हें ही निशाना बना रहे हैं जो इन्हें इस खतरनाक बीमारी से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। जरा सोचिए, अगर डॉक्टर नहीं होंगे तो क्या हम इस महामारी से लड़ पाएंगे। ये डॉक्टर इस मुश्किल वक्त में हमारे लिए भगवान बनकर आए हैं, जो धर्म जाति से ऊपर उठकर सभी को बचाने में जुटे हैं। इसलिए जरूरत इस बात की है कि हम सभी इनका साथ दें और इस खतरनाक बीमारी से मिलकर लड़ें।


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