मोदी ने किया एशिया के सबसे बड़े सोलर प्लांट का लोकार्पण, होगा 750 मेगावॉट बिजली का उत्सर्जन

A view of the 750MW solar power plant that PM Narendra Modi inaugurated via videoconferencing, in Rewa on Friday.
Image Credit: Livemint

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मध्यप्रदेश के रीवा में बनने वाले एशिया के सबसे बड़ा सोलर प्लांट का लोकार्पण किया। यह प्लांट 750 मेगावॉट बिजली उत्पन्न करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को दिए संबोधन में कहा कि, “अभी तक रीवा व्हाइट टाइगर के लिए जाना जाता है, लेकिन अब पूरे विश्व में रीवा की पहचान सोलर प्लांट के लिए होगी। आने वाले समय में भारत दुनिया में क्लीन एनर्जी का मॉडल बनेगा।” यह प्रोजेक्ट के बाद हमारे किसानों, माध्यम व गरीब परिवारों और आदिवासियों को फायदा पहुंचाएगा। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के चलते मध्यप्रदेश को साफ सुथरी और सस्ती बिजली उत्पादन का हब बनाया जाएगा। मोदी ने बताया की हमारी संस्कृति में सूर्यदेव का विशेष महत्व रहा है। मोदी ने संस्कृत के एक श्लोक से समझाया कि को उपासना के योग्य सूर्य हैं, वे हमें पवित्र करें। सूर्यदेव की इस ऊर्जा को आज पूरा देश महसूस कर रहा है। रीवा में ऐसा ही एहसास हो रहा है।”

प्रधानमंत्री के संबोधन की अहम बातें:

मोदी ने बिजली की आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि, 21 वीं सदी में ऊर्जा एक बड़ा माध्यम बनेगी क्योंकि यह श्योर, प्योर और सिक्योर है। श्योर इसलिए की संसाधनों के खत्म होने के बाद भी सूर्य हमेशा चमकता रहेगा। प्योर इसलिए, क्योंकि इससे पर्यावरण साफ स्वच्छ बना रहेगा और सिक्योर इसलिए की इससे बिजली की जरूरतों को पूरा किया जाएगा। 

मोदी ने कहा कि अब तक रीवा सफेद बाघों के लिए जाना जाता है लेकिन अब पूरे विश्व में सोलर प्लांट के लिए विख्यात होगा। यह प्लांट ऊर्जा का बहुत बड़ा केंद्र बनने के साथ साथ मध्यप्रदेश के उद्योगों और दिल्ली मेट्रो तक को इसका लाभ मिलेगा। रीवा की तर्ज पर मध्यप्रदेश के शाजापुर, नीमच और छतरपुर में भी सोलर प्लांट का कार्य शुरू होगा।

भारत आत्मनिर्भर होने कई राह में सक्रिय है। इस प्रोजेक्ट के बाद भारत का नाम विश्व में सौर ऊर्जा के मामले में टॉप 5 में शुमार हो गया है। भारत ने यह बताया है कि किस तरह से अर्थव्यवस्था और पर्यावरण एक दूसरे के पर्याय हो सकते हैं। 

मोदी ने कहा कि, LED बल्ब के उपयोग के बात बिजली का बिल कम होने के साथ ही कार्बन उत्सर्जन भी कम हुआ है। LED बल्ब से  करीब साढ़े 4 करोड़ टन कम कार्बन डाइऑक्साइड पर्यायवरण में जाने से रुका है। हम निरंतर हवा, पानी शुद्ध रखने की सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

मोदी ने बताया कि, दुनिया की और मानवता की अपेक्षा को देखते हुए हैं पूरे देश को जोड़ने में जुटे हुए हैं। इसी सोच का परिणाम आइसा यानी इंटरनेशनल सोलर एलियंस है। वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड के पीछे यही भावना है। जिस तरह से भारत में सोलर पॉवर पर काम हो रहा है, ये चर्चा और बढ़ने वाली है।

नरेंद्र मोदी ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए 2 गज़ की दूरी और हाथ को 20 सेकंड तक साबुन से धुलने की सलाह भी दी। मोदी ने कहा कि हमें महामारी की इस चुनौती से निपटने के लिए इन नियमों का पालन करना पड़ेगा। मोदी ने कहा कि, जब आप मध्यप्रदेश को, पूरे देश को आगे बढ़ाने के लिए बाहर निकाल रहे हैं, तो अपनी जिम्मेदारी भी हमेशा याद रखें।

वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिए संबोधन में कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी ‘मैन ऑफ आईडियाज़’ हैं। रीवा का यह प्रोजेक्ट ऊर्जा के क्षेत्र में हमें चेंजर साबित होगा। यह प्लांट 2.97 रुपए प्रति यूनिट सस्ती बिजली दे रहा है। शिवराज ने कहा कि भविष्य में मध्यप्रदेश 10 हज़ार मेगावॉट बिजली का उत्पादन कर आत्मनिर्भर भारत योजना में अपनी भूमिका निभाएगा।

रीवा में स्थित सोलर प्लांट प्रोजेक्ट को 4000 करोड़ रुपए की लागत से 1590 हैक्टेयर एरिया में बनाया जाएगा। एशिया के सबसे बड़े इस प्लांट में 1×2 के 2 करोड़ से ज़्यादा सोलर प्लेट्स का इस्तेमाल किए जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इस सोलर प्लांट से उत्पन्न होने वाली बिजली का 23 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली मेट्रो को चलाने में खर्च होगा और बाकी 76 प्रतिशत बिजली का उपयोग मध्यप्रदेश में किया जाएगा। इस प्लांट की 3 इकाइयों की मदद से 750 मेगावॉट बिजली बनेगी। प्लांट का कार्य शुरू हो चुका है और 2.60 करोड़ पेड़ों के बराबर कार्बन का उत्सर्जन बचाएगा।

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