भारत में चीता लाने की हो रही है तैयारी

भारत में पहले वन्य जीवों की स्थिति बहुत ही अच्छी थी लेकिन भारत में बढ़ते निर्माण के कारण जंगलों की कटाई शुरू हो गई और वन्य जीवों की प्रजातियां भी धीरे-धीरे विलुप्त होने लगी है। इनमें सबसे ज्यादा बाघ, शेर और चीतों जैसे वन्य जीवों की प्रजाति विलुप्त हुई है। 1952 में एशियाई चीता को भारत में विलुप्त घोषित किया गया था। चीतों की प्रजाति पर भी कई सर्वे किए जा रहें हैं ताकि भारत में चीतों की सही स्थिति का पता लगाया जा सके। हाल ही में आयी एक रिपोर्ट के अनुसार अंतिम भारतीय चीता की मृत्यु 1948 के आसपास हुई थी। जिसके बाद से भारतीय चीतों के संरक्षण पर काम किया गया और उनके लिए भारतीय वन संरक्षण द्वारा सुरक्षा संबंधी कई योजनाएं बनाई गई।

India's move to bring cheetah back
Image credit: Jagran Josh

भारत में चीतों की संख्या बढ़ाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में विदेशों से चीतों को लाया गया और चिडियाघरों में रखा गया है। पिछले कुछ समय से शिकार, आवास व निवास, मानव हस्तक्षेप और निमार्ण कार्य चीतों की संख्या में लगातार कमी होने का मुख्य कारण है। वन्य विशेषज्ञों ने चीतों के संरक्षण के बारे में कहा कि चीता के जीवित रहने के लिए, चरागाह का एक बड़ा क्षेत्र, अनूकूल वातावरण और एक शिकार आधार की आवश्यकता होती है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चीतों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को अफ्रीकी चीतों को भारतीय आवास में पेश करने का निर्देश दिया है। भारतीय सरकरा भारत में चीतों की संख्या के बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठा रकही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2012 में एससी ने मध्य प्रदेश में पालपुर कूनो अभ्यारण्य में विदेशी चीतों की शुरूआत को रोक दिया था और एक ही अभ्यारण्य में शेरों को फिर से लाने के लिए एक अन्य परियोजना के साथ उनके संघर्ष की आशंका भारत सरकार को थी।

इसके आलावा पहले भी भारत में चीतों के संरक्षण के लिए भारत की शीर्ष अदालत ने चीता की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए इस प्रायोगिक परियोजना में एनटीसीए का मार्गदर्शन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है।जो चीतों की संख्या बढ़ाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है।इसी सिलसिले में हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) ने भारतीय चीता को क्लोन करने के लिए एक परियोजना शुरू की थी जो ज्यादा सफल नहीं रही।

अगर भारत में चीतों की संख्या बढानी है तो सरकार को विभिन्न चुनौतियों जैसे शावकों की कम जीवित दर, पशु-मानव संघर्ष का समाना करना पड़ेगा। फिलहाल 7000 चीते जंगली है, जिनमें अधिकांश अफ्रीकी शामिल हैं है। जंगली बिल्लियों की संख्या ज्यादा होने के कारण, जंगल में चीतों के लिए शिकार और विशेष देखभाल करने की जरूरत है।


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