1 जून से 200 नॉन एसी ट्रेन चलाने पर भारतीय रेल ने दी मंजूरी

1 जून से 300 नॉन एसी ट्रेन चलाने पर भारतीय रेल ने दी मंजूरी- सूचना
Image credit: India.com

कोरोना महामारी के वजह से लॉकडाउन के चलते देश भर के कई हिस्सों में अपने घरों से दूर लोग फंसे हुए है। लोगों को उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचने के लिए रेलवे मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है। रेलवे ने 1 जून से रोजाना 200 नॉन-एसी ट्रेनें चलाने की घोषणा की है। रेलवे मंत्रालय ने अभी साफ नहीं किया है कि ट्रेन की बुकिंग कब से शुरू होगी। जल्द ही रेलवे इन ट्रेनों की भी बुकिंग ऑनलाइन शुरू करेगा। रेलवे स्टेशन में टिकट काउंटर पर टिकट उपलब्ध नहीं होंगी। इन ट्रेनों की बुकिंग यात्री सिर्फ़ आईआरसीटीसी की वेबसाइट से ही कर सकते हैं। वैध कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को ही रेलवे स्टेशन पर जाने की अनुमति दी जाएगी। यह ट्रेनें श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के आलावा चलाई जाएंगी।

भारतीय रेल द्वारा 12 मई को भी 15 पैसेंजर एसी ट्रेन चलाई गई थी जिससे बड़ी संख्या में लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया था।

केंद्र सरकार द्वारा 1 मई से 19 मई के बीच करीब 1600 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाकर 21 लाख से ज़्यादा मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा चुका है। अभी भी देश भर के अलग-अलग हिस्सों में छात्र, नौकरी पेशेवर व्यक्ति, प्रवासी मजदूर फंसे हुए है जो अपने घरों तक पहुंचना चाहते हैं। सरकार मजदूरों की स्वास्थ्य जांच और रजिस्ट्रेशन कर श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिए उनके राज्यों तक पहुंचा रही है। लाखों की संख्या में मजदूर अभी भी आंखो में घर जाने की आस लिए तप्ती धूप में रजिस्ट्रेशन करने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों में फंसे मजदूर लगातार राजनीति का शिकार हो रहे हैं।

हालांकि केंद्र सरकार द्वारा बड़ा फैसला किया गया है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए अब राज्य की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। राज्यों की अनुमति के बिना ही केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों में ट्रेनों के माध्यम से मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाएगी। केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वह अपने राज्य में श्रमिक स्पेशल ट्रेन के जरिए मजदूरों को पहचाने की अनुमति नहीं दे रहीं है।

हजारों की तादाद में मजदूर बिना सरकारी सहायता के अपने घरों के लिए निकल चुके हैं। कुछ साइकिल के माध्यम से, बसों से, ट्रक में लदकर और कुछ पैदल ही अपने घर की ओर चल दिए। देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूरों की भीड़ अपने घर लौटने के लिए इकट्ठा होती है। कई बार भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस द्वारा मजदूरों पर लाठीचार्ज भी किया जा रहा है।

जहां देश भर में रोजाना 13 से 15 हज़ार ट्रेनें लाखों मुसाफिरों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया करती थी वहीं इतिहास में पहली भारतीय रेल खामोश है। 25 मार्च के बाद से ही रेल सेवा ठप्प पड़ी हुई है।


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