कश्मीर मुद्दे पर इस्तीफा देने वाले आईएएस कन्नन गोपीनाथन ने ठुकराया नौकरी पर लौटने का ऑफर

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटाए जाने के विरोध में इस्तीफा देने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन को केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस की महामारी के मद्देनजर नौकरी पर लौटने को कहा है, लेकिन गोपीनाथन ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में वह आईएएस अधिकारी के बजाय एक आम नागरिक की तरह लोगों की मदद करने को तैयार हैं। सरकार ने गोपीनाथन को इस आधार पर नौकरी पर लौटने को कहा है कि उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। गोपीनाथन ने इसे उत्पीड़न की कार्रवाई बताते हुए दोबारा नौकरी ज्वाइन करने से इनकार कर दिया है।

IAS Officer Kannan Gopinathan Who Quit Over J&K Asked To Join Duty Amid COVID-19, Refuses
Image Credit : NDTV

सरकार ने कहा, इस्तीफा स्वीकार नहीं

दमन, दीव और दादरा नगर हवेली के प्रशासन के निर्देश पर सरकार की ओर से गोपीनाथन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस्तीफा तब प्रभावी होता है जब यह स्वीकार किया जाता है और तभी किसी सरकारी कर्मचारी को उसके कार्यभार से मुक्त किया जाता है। पत्र में कहा गया है कि आपको अपने निर्धारित कार्यों में भाग लेने का निर्देश दिया गया था, लेकिन आज तक आपने प्रशासन के कर्तव्यों के बारे में रिपोर्ट नहीं की है। पत्र में कहा गया कि कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया गया है और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों और राज्य प्राधिकरण को देश में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कदम उठाने को कहा गया है। इसलिए आपको तुरंत ड्यूटी पर रिपोर्ट करने का निर्देश दिया जा रहा है।

गोपीनाथन ने ठुकराया सरकार का ऑफर

गोपीनाथन ने नौकरी पर लौटने के आदेश वाले सरकारी पत्र और उस पर दिए गए अपने जवाबी पत्र की तस्वीर को अपने ट्विटर पेज पर शेयर किया है। इसके साथ ही गोपीनाथन ने ट्वीट किया, ‘मुझे इस्तीफा दिए आठ महीने चुके हैं। सरकार केवल लोगों और अधिकारियों का उत्पीड़न करना जानती है। मैं जानता हूं कि वह आगे भी मेरा उत्पीड़न करना चाहती है, लेकिन फिर भी मैं इस कठिन समय में सरकार के लिए स्वयंसेवक के रूप में काम करने की पेशकश करता हूं, लेकिन मैं आईएएस के रूप में नौकरी पर नहीं लौटूंगा।’

कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटने के खिलाफ छोड़ी थी नौकरी

पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के विरोध में गोपीनाथन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका आरोप था कि कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाकर लाखों लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से वंचित किया जा रहा है। कन्नन ने यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था कि उन्हें विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात खुलकर रखने की जरूरत महसूस होती है, जो उन्हें एक लोकतांत्रिक देश का नागरिक होने का अनुभव कराती है।

केरल की बाढ़ में की थी लोगों की मदद

2012 बैच के आईएएस अधिकारी कन्नन केरल के कोट्टयम के रहने वाले हैं। वह केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली में विद्युत विभाग के सचिव के पद पर तैनात थे। उन्होंने पिछले साल 21 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के एक हफ्ते बाद भी सरकार ने उन्हें नौकरी पर लौटने को कहा था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था। कन्नन ने 2018 में केरल में आई भीषण बाढ़ के दौरान राहत सामग्री अपने कंधों पर रखकर लोगों तक पहुंचाई थी। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद वह युवाओं के आदर्श बन गए थे।


Connect With US- Facebook | Twitter | Instagram

Leave a Reply