ठंड में ठिठुरते भिखारी को DSP ने पहना दी अपनी जैकेट, जब गौर से देखा तो रह गए हैरान

ठंड में ठिठुरते भिखारी को DSP ने पहना दी अपनी जैकेट, जब गौर से देखा तो रह गए हैरान
ठंड में ठिठुरते भिखारी को DSP ने पहना दी अपनी जैकेट, जब गौर से देखा तो रह गए हैरान

अक्सर पुलिस विभाग से में कुछ ना कुछ ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो लोगों को आश्चर्य में डाल देते हैं। ताज़ा मामला ग्वालियर का है, जहां एक डीएसपी जब गरीबों को खाना दे रहे थे, तो उन्हीं लोगों में एक कचरा बीनने वाला डीएसपी का साथी निकला। यह भी पढ़ें: पति की हिम्मत के आगे हार गईं हजार किमी की बाधाएं, गर्भवती पत्नी की परीक्षा के लिए 1200 किमी की यात्रा स्कूटर से की तय

दरअसल, यह कचरा बटोरने वाली व्यक्ति एक शानदार पुलिसकर्मी ही नहीं, बल्कि शार्प शूटर हुआ करता था। वह ग्वालियर के झांसी रोड इलाके में सालों से सड़कों पर लावारिस घूमता पाया गया। मामले के सामने बाद अब डीएसपी की चर्चा हो रही है। यह भी पढ़ें: पति संग 1,200 किमी का रास्ता स्कूटर से तय कर परीक्षा देने आई गर्भवती महिला को अडानी फाउंडेशन हवाई मार्ग से पहुंचाएगा घर

यह है पूरा मामला

10 नवंबर चुनाव की मतगणना की रात 1:30 बजे जब सुरक्षा व्यवस्था में तैनात डीएसपी रत्नेश तोमर और डीएसपी विजय भदौरिया सड़क किनारे ठंड से ठिठुर रहे और कचरे में खाना ढूंढ रहे भिखारी को देखते है तो एक अधिकारी जूते और दूसरा अपनी जैकेट दे देता है। जब दोनों वहां से जाने लगते है तो भिखारी डीएसपी को नाम से आवाज लगाता है। अचंभित होकर जब पलट कर गौर से भिखारी को पहचानते हैं तो वह खुद भी हैरान रह जाते हैं, क्योंकि भिखारी उनके साथ के बैच का सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा था। यह भी पढ़ें: कुत्ते को उठाकर पानी में फेंकने वाला युवक गिरफ्तार, बोला- खेल-खेल में हुई गलती

जानकारी के अनुसार, मनीष पिछले 10 बरसों से सड़कों पर लावारिस घूम रहे थे। इनकी मानसिक संतुलन भी काफी बिगड़ गया है। सन 1999 बैच के सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा अचूक निशानेबाज थे। वह थानेदार भी रहे। मनीष मिश्रा कभी इस हाल में पहुंच जाएंगे, किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।

डीएसपी रत्नेश तोमर और डीएसपी विजय भदौरिया ने काफी देर तक मनीष मिश्रा से पुराने दिनों की बातें कीं। जिसके बाद उन्होंने मनीष को अपने साथ ले जाने की जिद की लेकिन वह राजी नहीं हुए। आखिर में एक एनजीओ के जरिए मनीष मिश्रा को आश्रम भिजवा दिया गया। यह भी पढ़ें: 20 वर्ष की उम्र में हाथ खोकर भी, कम्बोडियन कला में महारत हासिल की Morn Chear ने

परिवार के अधिकतर लोग शासकीय सेवा में

मनीष मिश्रा के परिवार की बात की जाए तो उनके भाई भी टीआई हैं। पिता व चाचा एडिशनल एसपी से रिटायर हुए हैं। चचेरी बहन दूतावास में पदस्थ है और मनीष मिश्रा ने खुद 2005 तक नौकरी की है। आखिरी समय तक वह दतिया जिले में पदस्थ रहे इसके बाद मानसिक संतुलन खो बैठे। पत्नी से उनका तलाक हो चुका है जो न्यायिक सेवा में पदस्थ है। यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में मंदिर में घुसकर तोड़ी देवी-देवताओं की मूर्तियां, हिन्दू परिवारों को भी पीटा, पड़ोसीयों ने बचाई जान


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