न्यूज़ पोर्टल और ऑनलाइन कंटेंट भी आएगा सूचना प्रसारण मंत्रालय के दायरे में

न्यूज़ पोर्टल और ऑनलाइन कंटेंट भी आएगा सूचना प्रसारण मंत्रालय के दायरे में

केंद्र सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट, फ़िल्म और न्यूज को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने का फ़ैसला किया है। दरअसल, बुधवार को सरकार ने एक गजट नोटिफिकेशन के जरिए यह जानकारी दी। इस आदेश के बाद अब ऑनलाइन न्यूज पोर्टल और मीडिया वेबसाइट, सूचना व प्रसारण मंत्रालय के अधीन आ जाएंगे।

मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा मंगलवार की रात को जारी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। अधिसूचना में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 77 के खंड (3) के तहत प्रदत शक्तियों का उपयोग करते हुए भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियमावली, 1961 में संशोधन करके ऐसा किया गया है। यह भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश फर्जीवाड़ा, अनामिका शुक्ला के बाद स्वाति तिवारी के नाम से टीचिंग करती पाईं चार महिलाएं

गौरतलब है कि, इस समय देश में डिजिटल कंटेंट के नियमन के लिए कोई स्वायत्त संस्था या कानून नहीं है। लेकिन अब केंद्र सरकार ने ऑनलाइन मीडिया फिल्म और ऑडियो विजुअल प्रोग्राम के साथ ही न्यूज और करंट अफेयर्स कंटेंट को भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंदर लाने का फैसला किया है। यह भी पढ़ें: जूते को प्रमोट करने के लिए Rapper Cardi B के मां दुर्गा जैसे पोज पर लोगों का फूटा गुस्सा, अब मांगी माफी

केंद्र सरकार ने इसके पहले सुप्रीम कोर्ट में एक मामले में दलील दी थी कि, ऑनलाइन माध्यम का नियमन टीवी से अधिक जरूरी है । इतना ही नहीं, न्यूज पोर्टल और मीडिया वेबसाइट को रेगुलेट करने के लिए 10 सदस्यीय कमेटी भी बनाई थी।

कमेटी से ऑनलाइन मीडिया, न्यूज पोर्टल और ऑनलाइन कन्टेंट प्लेटफॉर्म के लिए उचित नीतियों की सिफारिश करने को कहा गया था। कमेटी में सूचना व प्रसारण, कानून, गृह, आईटी मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी और प्रमोशन के सचिवों को शामिल किया गया था। यह भी पढ़ें: BoycottAmazon हुआ ट्रेंड, हिंदू भावनाओं को आहत करने का है आरोप

इससे पहले साल 2019 में सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि मोदी सरकार मीडिया की आजादी पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाना चाहती है। लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए कुछ न कुछ नियम-कानून जरूर होने चाहिए, क्योंकि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं फिल्मों के लिए पहले से नियम हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दिए गए केंद्र के हलफनामे के मुताबिक, देशभर में सरकार ने 385 चैनलों को नियमित न्यूज चैनल के लाइसेंस दिए हैं। यह चैनल समाचारों के साथ मनोरंजन से इतर कार्यक्रम प्रसारित करते हैं। इनमे वार्ता, बहस कार्यक्रम और जनता तक जानकारी पहुंचाने के अन्य कई कार्यक्रम भी होते हैं। यह भी पढ़ें: कोरोनावायरस के ‌बाद चीन में अब ‘Brucellosis’ का कहर, दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा हैं संक्रमण


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