जी-20 का कोरोना से साझा लड़ाई का संकल्प, वैश्विक अर्थव्यवस्था में डालेंगे 50 खरब डॉलर

कोरोना वायरस के संबंध में गुरुवार को जी20 देशों से हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक विकास के बजाय मानव जाति के हितों को अधिक महत्व के केंद्र रख कर आवाह्न किया है। उन्होंने कहा कि “अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है, लेकिन हमारी व्यवस्थाएं स्पष्ट रूप से कमजोर है”। इस वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान सभी देशों ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई की सहमति जताई है।

Coronavirus: In COVID-19 era, even the G20 summit was virtual
फोटो क्रेडिट :सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,कोरोना संकट से हजारों जानें जा चुकी हैं। इसका सामाजिक और आर्थिक नुकसान भी उतना ही हैरान करने वाला है। मैं एक हकीकत पर ध्यान दिलाना चाहूंगा, जिसका खुलासा इस महामारी ने किया है। 2008 की मंदी को कम करने की लिए जी20 अग्रणी मंच के तौर पर उभर कर सामने आया था। इसने वित्तीय स्थिरता और वृद्धि को बढ़ावा दिया।” और उन्होंने कहा कि, “इस प्रक्रिया में हमने ग्लोबलाइज़ेशन के लिए मुख्य रूप से आर्थिक एजेंडे ही अपनाए हैं। चाहे आतंकवाद से लडने की बात हो या फिर जलवायु परिवर्तन का मामला हो, मानवता के साझा हितों को प्रोत्साहित करने में बहुपक्षीय मंच कम अग्रसर रहे हैं। कोरोना संकट इसका एक और उदाहरण है।”

फोटो क्रेडिट :डेक्कन हेराल्ड

इसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान जी20 देशों ने अर्थव्यवस्था के हुए नुकसान की भरपाई के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर (375 लाख करोड़ रुपए) भी डालने को कहा है। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा की, “कोरोना कोई सीमाएं नहीं मानता है। ये हमारा साझा दुश्मन है।” वहीं हमारे प्रधानमंत्री ने कहा; “जी20 देशों के पास दुनिया की जीडीपी का 80% और आबादी का 60% हिस्सा है। अब हमारे पास कोरोना के कुल मामलों का 90% और इससे हुई मौतों का 80% हिस्सा है।”


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