भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान पत्थर तोड़कर कर रहे हैं गुजर-बसर

पूर्व भारतीय क्रिकेटर गाँव में मजदूरी कर अपने परिवार को पाल रहे, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किया भारतीय टीम का नेतृत्व- सूचना

लाॅकडाउन के बाद कई लोग अपने प्रोफेशनल काम छोड़कर मजदूरी करने को मजबूर हो गए हैं। कुछ ऐसी ही मजबूरी भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राजेंद्र सिंह धामी की हो गई है। राजेंद्र सिंह ने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में दिव्यांग बच्चों को क्रिकेट की ट्रेनिंग देना शुरू कर दी थी। लेकिन लाॅकडाउन लगने के बाद उन्हें वह बंद करनी पड़ी और गाँव रायकोट लौटकर अब अपने परिवार को पालने के लिए पत्थर तोड़ने की मजदूरी करनी पड़ रही है।

कलेक्टर ने अर्थिक मदद का दिया आश्वासन:

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के कलेक्टर जोगदंडे को जब इस बारे में पता चला कि राजेंद्र सिंह अपने गाँव में पत्थर तोड़कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं तो उन्होेंने उनके परिवार को आर्थिक मदद करने का आश्वासन दिया और इसके अलावा यह भी कहा कि राजेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री स्वरोजगार अधिनियम और अन्य स्कीमों की मदद से भी उन्हें नौकरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा राजेंद्र ने भी अपनी पढाई के आधार पर सरकार से नौकरी की मांग की है।

फेसबुक से मिली व्हीलचेयर क्रिकेट की जानकारी:

राजेंद्र जब दो साल के थे, तब वह पोलियोग्रस्त हो गए थे। इसके अलावा जब वे 18 साल के हुए तो वह लकवाग्रस्त हो गए। जिसके कारण उनके कमर के नीचे का शरीर स्थिर रह गया। 2014 में राजेंद्र को सोशल मीडिया साइट फेसबुक के माध्यम से दिव्यांग क्रिकेट के बारे में पता चला। इसे देखकर उनके मन में क्रिकेट खेलने की रूचि जागी। इसके बाद राजेंद्र ने भारतीय टीम के लिए 14 मैच भी खेले और भारत, बांग्लादेश और नेपाल के बीच की त्रिकोणीय श्रृखंला में भारतीय टीम का नेतृत्व भी किया।

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद शुरू की कोचिंग:

राजेंद्र सिंह ने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में दिव्यांग क्रिकेटर्स को ट्रेनिंग देना शुरू किया। लेकिन लाॅकडाउन के बाद बच्चों ने ट्रेनिंग के लिए आना बंद कर दिया। जिसके बाद उन्हें मजबूरी में वापस अपने गाँव रायकोट लौटना पड़ा। इसके अलावा लाॅकडाउन के बाद वह एक क्रिकेट टूर्नामेंट में भी हिस्सा लेने वाले थे, लेकिन कोरोनावायरस के कारण टूर्नामेंट को रद्द करना पड़ा। जिसके बाद राजेंद्र को अपने परिवार को पालने के लिए मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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