आत्मनिर्भर भारत योजना: वित्त मंत्री ने किया तीसरी किस्त का एलान, किसानों को बड़ी राहत

‘Atmanirbhar Bharat’ Phase III; the third tranche of economic package primarily focused on Agri-Infrastructure- Soochna
Image cedit: The Policy Times

आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आत्म निर्भर भारत योजना की तीसरी किस्त जारी की है। इससे पहले वित्त मंत्री द्वारा 20 लाख करोड़ के पैकेज के ब्रेकअप का एलान मीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर चुकी हैं। आज 11 घोषणाओं का एलान किया गया जिसमें से 8 घोषणाएं खेती से जुड़े इंसफैक्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स के बारे में थीं और शेष 3 घोषणाएं प्रशासनिक सुधारों के विषय में की गई हैं। आज वित्त मंत्री द्वारा एग्रीकल्चर इंस्फेक्ट्रक्चर, माइक्रो फूड इंटरप्राइज, मछली पालन, पशुओं के टीकाकरण, औषधीय पौधे सहित अन्य क्षेत्रों में घोषणाएं की गई हैं।

फसल कटाई, कोल्ड चेन, स्टोरेज सेंटर जैसी सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार तकरीबन 1 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस योजना का लाभ एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राइमरी एग्रीकल्चर को ऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े स्टार्टअप्स को मिलेगा। सरकार का कहना है कि तुरंत एक फंड बनाया जाएगा जिससे कम अवधि के लोन के रूप में यह पैसा वितरित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मतास्या संपदा योजना के जरिए मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार 20 हज़ार करोड़ का निवेश कर रही है। इस योजना के जरिए द्वीप वाले राज्यों, हिमाल यी राज्यों, पूर्वी राज्यों में मतस्य पालन करने वाले किसानों को मदद मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि 5 सालों में 70 लाख टन मछली पालन होगा और इससे करीब 50 लाख लोगों के लिए रोजगार पैदा होगा।

पालतू जानवरों जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर को टीकाराम की योजना का सरकार द्वारा एलान किया गया है। पशुओं को मुंह और खुर की बीमारी से बचाने के लिए सरकार 13 हज़ार 343 करोड़ रुपए खर्च करेगी जिससे 53 करोड़ पशुओं को टीके लगाए जाएंगे।

पशुपालन सेंटर बनाए के लिए सरकार ने 15 हज़ार रुपए खर्च करने का एलान किया है। दूध के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार दूध के लिए प्रोसेसिंग इंडस्ट्री लगाएगी। लोकल मार्केट और एक्सपोर्ट के लिए भी पैसे का इस्तेमाल कर सकेंगे। सरकार की तरफ से अभी यह साफ नहीं हुआ है कि कब से इस योजना के तहत काम चालू होगा।

शहद के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी सरकार 500 करोड़ रुपए का खर्च करेगी। इससे शहद की आमदनी बढ़ेगी और 2 लाख किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बनेगा।

ऑपरेशन ग्रीन के जरिए टमाटर, आलू और प्याज़ की खेती करने के साथ साथ अन्य फलों और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को अच्छे दाम दिलाने में सरकार मदद करेगी। इससे पहले किसानों को आलू, प्याज़, टमाटर के अलावा अन्य सब्जियों के दाम किसानों को नहीं मिल पाते थे। 6 महीने के इस प्रोजेक्ट में सरकार 500 करोड़ का निवेश करेगी। सरकार ने ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और कोल्ड स्टोरेज में भी 50-50 प्रतिशत सब्सिडी देने की घोषणा की है।

कानूनों में बदलाव कर सरकार किसानों को आमदनी की गारंटी देगी। किसानों को फसल बीते वक़्त पता चलेगा कि पूरी उपज बिकेगी या और फसल के क्या दाम मिलेंगे। सरकार के इस फैसले के बाद किसानों के उत्पीड़न में कमी आयेगी और वे बिना किसी जोखिम के खेती कर सकेंगे।

केंद्र सरकार द्वारा यह कहा गया है कि एक नया कानून बनाया जाएगा जिसके तहत किसान अब अन्य राज्यों में भी बिना किसी रोक टोक फसल बेच सकेंगे। सरकार ई-ट्रेडिंग को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। सरकार के इस फैसले से उन किसानों को फायदा पहुंचेगा जो सिर्फ लाइसेंस रखने वाली एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर कमेटी में ही अपनी फसल बेच पाते थे।

खेती में प्रतिस्पर्धा को बढ़ने और किसानों को अच्छे दाम देने के लिए सरकार 1955 के आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव करेगी। हालांकि सरकार ने स्पष्ट नहीं किया है कि कानून में कब बदलाव किया जाएगा। तिलहन, दलहन, आलो, और प्याज़ उगाने वाले किसानों और खाने का तेल बेचने वाले लोगों को रेगुलेशन के दायरे से बाहर किया जाएगा। इन चीज़ों के लिए किसानों पर कोई स्टॉक लिमिट नहीं थोपी जाएगी।

गंगा किनारे 800 हैक्टेयर के दायरे में कॉरिडोर बनाकर औषधीय पौधों की खेती की योजना सरकार बना रही है। इससे औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों की 5 हज़ार करोड़ रुपए तक की आमदनी होगी। इस योजना में सरकार के 4 हज़ार करोड़ रुपए खर्च होंगे।

मंगलवार को प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत योजना कि घोषणा करते वक़्त लोकल के लिए वोकल का नारा दिया था। इसी बारे को ध्यान में रखते हुए माइक्रो फूड इंटरप्राइज को 10 हज़ार करोड़ की मदद दी जाएगी। तकरीबन 2 लाख यूनिट को लाभ पहुंचेगा। कश्मीर में केसर, पूर्वोत्तर में बांस, बिहार में मखाना और उत्तर प्रदेश में खेती करने वाले उद्यमियों को कृषि उपज संस्थाओं, सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और सरकारी संस्थाओं द्वारा यह मदद मिलेगी।


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