20 साल से यह अपनी स्कूटी पर ‘राजमा-चावल’ का स्टाल लगाकर खिलातीं हैं भूखों को खाना, आईएएस अवनीश सारन ने शेयर की कहानी

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20 साल से यह अपनी स्कूटी पर ‘राजमा-चावल’ का स्टाल लगाकर खिलातीं हैं भूखों को खाना, आईएएस अवनीश सारन ने शेयर की कहानी (image credit- Hindustan times)

देश भर में जब से लॉकडाउन हुआ है, अनेक दानदाता गरीबों की मदद के लिए सामने आये है। इसी बीच दिल्ली की रहने वाली सरिता कश्यप भी आगे आईं, जिसके पास पैसे नहीं होते, सरिता उसे फ्री में ही राजमा-चावल खिला देती हैं। उनका मानना है कि, भूखों को खाना खिलाना सच्चा सौदा होता है।

दरअसल, आईएएस अवनीश सारन ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है। जैसे कि अवनीश सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं, और अक्सर लोगों की कहानी शेयर करने में गुरेज़ नहीं करते। इस बार उन्होंने सरिता कश्यप की कहानी शेयर की है।

वह लिखते हैं, ये हैं पश्चिम बिहार दिल्ली की सरिता कश्यप, पिछले 20 साल से ये अपनी स्कूटी पर ‘राजमा-चावल’ का स्टाल लगाती हैं। अगर आपके पास पैसे नहीं हैं, तो भी आपको ये भूखा नहीं जाने देंगी। खाली समय मे बच्चों को पढ़ाती भी हैं।’

ऐसे हुई थी शुरुआत

सरिता कहती हैं, ‘एक दिन राजमा चावल बनाकर स्कूटी पर लादे और पीरागढ़ी बेचने चली गईं। पहले उन्होंने सोचा कोई खरीदकर खाएगा तो ठीक है वरना वापस लौट आएंगी। पर पहले दिन ही रिस्पॉन्स अच्छा मिला। लोगों ने खाए। पैसे भी दिए। पैक भी करवाए। उनका बिजनेस चलने लगा। वो रोज पीरागढ़ी में मेट्रो स्टेशन के पास पेड़ के नीचे स्कूटर पर राजमा चावल बेचने लगीं। अब वो अपना घर भी चला रही हैं। बेटी को भी पढ़ा रही हैं। साथ ही साथ आसपास गरीब बच्चों के लिए स्कूल की ड्रेस, किताबें और जूते भी खरीदकर देती हैं।

भूखों को खाना खिलाने से मिलती है ख़ुशी

सरिता का कहना है कि, अगर जिसके पास पैसे नहीं होते तो उसे वह फ्री में ही राजमा-चावल खिला देती हैं। वह कहती हैं कि खा लो, पैसे जब कभी भी हों दे देना। यहां तक कि गरीब बच्चों को वो पढ़ाती भी हैं। वह इन बच्चों को राजमा-चावल भी खिलाती हैं। इन सब के इतर उनका मानना है कि, कमाई तो होती रहेगी लेकिन इस काम में आने के बाद जो लोगों को खाना खिलाने की खुशी है वो कहीं नहीं मिलती।


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