कोरोना की जंग क्या भारत ऐसे जीतेगा !

देश में कोरोना वायरस के चलते हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हाल ही में एक घोषणा की, रविवार को देश में जनता कर्फ्यू रहेगा, जो कि मात्र उनका आव्हान था और शाम 5 बजे सभी अपने घरों की बालकनी में आकर ताली , शंखनाद या थालियों की ध्वनि से उन सभी सोशल वर्कर और मेडिकल में कार्यरत कर्मचारियों को प्रोत्साहित करें, जो इस आपदा में जनता का सहयोग कर रहे हैं। जनता ने इस बात का समर्थन शनिवार शाम को ही करना शुरू कर दिया था, लेकिन इसी के साथ कुछ ऐसी भी परेशान करने वाली बातें सामने आईं जो देश को जान-बूझ कर एक गर्त में धकेलने का काम कर रही है।

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Image credit: India Today

प्रधानमंत्री की बात तो जनता ने मानी और जनता कर्फ्यू के दौरान 12 घंटों तक घरों के अंदर ही बंद रहे, फिर लोगों को लगा कि जो वायरस पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है, वो ख़त्म हो गया और लोग उसी शाम को टोलियां बना कर जुलूस निकालने लगे और तालियों के साथ थालियां बजाकर नाचते हुए पाए गए, ऐसे में यह बात तो साफ़ हो जाती है कि अधिकतर लोगों को ये ही पता नहीं था कि ये तालियां किसके लिए थीं!

सोशल मीडिया के जमाने में लोगों ने अपवाहों को भी सच मानना शुरू कर दिया है। जब से कोरोना ने भारत कदम रखा है, तभी से तरह-तरह की झूठी ख़बरों और अफवाहों का अम्बार लग गया। सबसे बड़ी अफवाह तो यही है कि यह वायरस 12 घंटों तक ही जीवित रहता है, जिसकी पुष्टि वैज्ञानिकों ने की है कि ऐसी कोई बात नहीं है, ‘यह वायरस ड्रॉप्लेट्स के माध्यम से फैलता है और अलग-अलग तरह की सर्फेस पर इसका जीवनकाल भी अलग होता है।’ कहीं कोई कुछ दवा बता रहा है तो कहीं कोई कुछ, जिसका कोई प्रमाणीकरण है ही नहीं!

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Image credit: India Today

इन सभी हरकतों से यह बात भी साफ़ हो जाती है कि भारत में सरकार द्वारा किये गए कई चाक-चौबंदो से भी कुछ नहीं होने वाला है। लोगों ने जिस तरह इस महामारी का मखौल उड़ाया है, वो उन्हीं के लिए सबसे खतरनाक साबित होने वाला है। इतना ही नहीं उनके साथ उनके आस-पास के लोगों के लिए भी यह मज़ाक बेहद डरावना सपना है। कोरोना नाम की महामारी से भी बड़ी बीमारी हमारे देश में है, जिसे कहते हैं; मानसिक विकलांगता या कहें कि किसी भी अफवाह को भी झट से सच मान लेने की दृढ़ता। यह महामारी उतना तेज़ी से खुद नहीं फ़ैल सकती जितनी कि लोगों की लापरवाही से सुचारु रहने वाली है।

तो क्या करें!

बस डॉक्टर की सलाह और सरकार के उठाये गए क़दमों का ही पालन करना अब हमारी ज़िम्मेदारी है, न केवल अपने लिए, न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता पर आज जो एक प्रश्न खड़ा हो चुका है, इस महामारी नामक जंग को जीतने के लिए हमें कुछ दिनों के लिए खुद को अलग करना होगा। क्योंकि जब आप होंगे तब समाज होगा और समाज से ही तो देश बनता है।


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