सरकार ने प्लास्टिक कचरे से बनाईं एक लाख किलोमीटर सड़कें, इस साल दोगुने का लक्ष्य

केंद्र सरकार की महत्त्वपूर्ण योजना स्वच्छ भारत अभियान में भागीदारी करने के लिए सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने प्लास्टिक के कचरे का उचित इस्तेमाल करने का फैसला किया है। जो प्लास्टिक कचरा रीसाइकिल करने के लायक नहीं है, अब उसे सड़कें और राजमार्ग बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार अब तक प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल कर एक लाख किलोमीटर सड़क बना चुकी है और मौजूदा वित्त वर्ष में इसे दोगुना करने का लक्ष्य है।

A worker at the construction site of the first plastic road in Gurugram, in 2018.
Image Credit : Hindustan Times

प्लास्टिक कचरे से बनी एक लाख किमी सड़क

प्लास्टिक कचरे से बनी सड़कों की यह क्रांति 2015 में तब शुरू हुई, जब केंद्र सरकार ने देशभर के सभी सड़क निर्माताओं के लिए सड़क बनाने में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया था। इस पहल की घोषणा 2016 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने की थी। तब से लेकर अब तक सरकार ने 11 राज्यों में एक लाख किलोमीटर सड़क बनाने में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया है।

एक किमी सड़क पर 30 हजार रुपए की बचत

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले हर एक किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए दस टन बिटुमिन (कोलतार) का इस्तेमाल किया जाता था। केंद्र सरकार की इस पहल के बाद, अब एक किलोमीटर सड़क बनाने के लिए नौ टन बिटुमिन और एक टन प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मतलब है कि इस तकनीक का इस्तेमाल करके केंद्र सरकार हर एक किलोमीटर पर एक टन बिटुमिन की बचत कर रही है, जिसकी कीमत 30 हजार रुपए है।

राजगोपालन वासुदेवन हैं इस तकनीक के जनक

प्लास्टिक के कचरे से सड़क बनाने का यह आइडिया मदुरै के थिएगराजर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर राजगोपालन वासुदेवन के दिमाग की उपज है। कई देशी-विदेशी कंपनियों ने राजगोपालन वासुदेवन को इस टेक्नोलॉजी का पेटेंट खरीदने का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने पैसों का मोह छोड़कर भारत सरकार को यह टेक्नोलॉजी मुफ्त में दी। ‘प्लास्टिक मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर वासुदेवन का मानना है कि प्लास्टिक कचरे से बनी सड़कों में गड्ढे नहीं होते। पारंपरिक सड़कों के मुकाबले प्लास्टिक कचरे से बनी सड़कें बाढ़ और बेतहाशा गर्मी जैसे मौसमों में भी ज्यादा टिकाऊ साबित होती हैं। वासुदेवन के इस सराहनीय कार्य के लिए भारत सरकार की ओर से उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

प्लास्टिक कचरा कैसे बनता है इस्तेमाल के लायक

प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल के लिए हर शहर के नगर निकाय पहले पूरे शहर से प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करते हैं। इसके बाद इस कचरे को साफ किया जाता है, सुखाया जाता है और इसके छोटे-छोटे टुकड़े किए जाते हैं। प्लास्टिक कचरे में मिठाई कै रैपर से लेकर शॉपिंग बैग तक सब शामिल होते हैं। प्लास्टिक कचरा संयंत्र में इस कचरे को चार मिमी तक के टुकड़ों में काटा जाता है। इसके बाद इन टुकड़ों को बिटुमिन के मिश्रण में मिलाया जाता है, जोकि 160 डिग्री पर गर्म किया जाता है। इसी तैयार मिश्रण को सड़क बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सड़क निर्माण के अलावा, प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल बेंच बनाने में भी किया जाता है। पिछले साल अक्टूबर में भारतीय रेलवे के पश्चिम रेलवे जोन ने मुंबई के चर्चगेट स्टेशन पर प्लास्टिक कचरे से बनी तीन बेंच लगाई थीं।

भारत में रोज निकलता है 25940 टन प्लास्टिक कचरा

भारत में रोजाना करीब 25940 टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जोकि करीब 4300 हाथियों के वजन के बराबर है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक, इसमें से 60 फीसदी कचरा रीसाइकिल हो जाता है। बाकी कचरे को लैंडफिल में फेंक किया जाता है, जिससे नालियां जाम हो जाती हैं। प्लास्टिक कचरे के अति सूक्ष्म कण समुद्र में चले जाते हैं या इन्हें जला दिया जाता है जिससे वायु प्रदूषण फैलता है। ऐसे में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इस कचरे का इस्तेमाल सड़क बनाने में किया जा रहा है, जोकि एक अच्छी पहल है।


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