बाल विवाह को रोकने के लिए घर-घर जाकर जागरूक करती हैं बसंती देवी, राष्ट्रपति भी कर चुके हैं सम्मानित

बाल विवाह को रोकने के लिए घर – घर जाकर जागरूक करती हैं बसंती देवी, राष्ट्रपति भी कर चुके हैं सम्मानित – सूचना

भारत देश में बाल विवाह कानूनन अपराध है। लेकिन फिर भी भारत के कई क्षेत्रों में आज भी बाल विवाह होते हैं। बाल विवाह को रोकने और इसके बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए उत्तराखंड की एक महिला शिक्षक घर-घर जाकर लोगों को इसके बारे में बताती हैं। इनका नाम बसंती बेन है। जब यह 12 वर्ष की थी तब ही इनके पति का निधन हो गया था। बसंती 12 वर्ष की उम्र में ही विधवा हो गई थी, जिसके बाद बसंती ने पहले शिक्षा का महत्व समझा और आगे जाकर एक शिक्षिका बनी। जिसके बाद उन्होंने सोचा था कि वे लोगों को बाल विवाह के बारे में जागरूक करेगी ताकि उनकी तरह कोई और महिला कम उम्र मे विधवा न हो और उन्हें किसी भी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

घर-घर जाकर करती है, लोगों को जागरूक

उत्तराखंड में रहने वाली बसंती देवी उत्तराखंड के अल्मोड़ा के कसौनी गाँव में घर-घर जाकर लोगों को बाल विवाह के बारे में जागरूक करती हैं। वे लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में भी समझती हैं। बसंती देवी ने उनके अभियान के बारे में कहा था कि, जब मैं अपने जागरूकता अभियान के जरिए बाल विवाह रोकने में सफल होती हूँ तो मुझे लगता है कि यहीं मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। बसंती को सबसे बड़ी सफलता तब मिली थी, जब उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बाल विवाह के खिलाफ चाइल्ड मैरिज एक्ट 2006 लागू किया था। इसके बाद बसंती ने लोगों को कानून की मदद से भी जागरूक करना शुरू कर दिया था।

राष्ट्रपति ने ‘वनरोपण अभियान’ के लिए किया सम्मानित

बसंती बेन ने कोसी नदी बचाने के लिए ‘वनरोपण अभियान’ भी चलाया था। जिसके लिए बसंती ने 200 महिलाओं का समूह बनाया और उस समूह को ‘महिला मंगल दल’ नाम दिया। इस समूह की महिलाओं ने गाँव में वृक्षारोपण किया और लोगों को पर्यावरण के बारे में जागरूक किया। उनके इस अथक प्रयास के लिए राष्ट्रपति ने भी उन्हें सम्मानित किया था। उनके इस प्रयास के कारण आज भी कसौनी गाँव ओक और कफाल के पेड़ों से लहरा रहा है। उनके इस काम की तारीफ पर्यावरणविद रवि चोपड़ा ने भी की थी। उन्होंने कहा था कि समाज की भलाई के लिए हमें ऐसे लोगों की जरूरत है।

गाँव वाले और दोस्त तारीफ करते हुए नहीं थकते

बसंती को इस काम के लिए उनके गाँव वाले और दोस्त उनकी काफी सराहना करते हैं। उनके ही गाँव में रहने वाले अमित उप्रेति ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, “बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला बसंती बेन अब तक कई लोगों को बाल विवाह के बारे में जागरूक कर चुकी हैं और कई बच्चियों को स्वास्थ्य और शिक्षा की भी मदद कर चुकी हैं।” इसके अलावा बसंती की एक सहेली ने उनके बारे में कहा, “बसंती जो करने का ठान लेती हैं, तो वह उसे करके ही रहती हैं। वह बच्चियों की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। पर्वत पर रहने वाले बच्चों की बसंती ने काफी मदद की हैं।” इस तरह के लोग समाज को आगे बढ़ाने और कुप्रथाओं से बचाने में अहमभूमिका निभाते हैं।


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