बाबा काल भैरव हैं यहां के थानेदार, बिना अनुमति कोई नहीं कर सकता शहर में प्रवेश

बाबा काल भैरव हैं यहां के पर्मानेंट कोतवाल, उनकी कुर्सी पर नहीं बैठता कोई थानेदार
Image Credit: News18

भगवान विश्वनाथ की नगरी काशी में एक ऐसा अनोखा पुलिस थाना है, जहां थानेदार की कुर्सी में बाबा काल भैरव विराजमान है। पिछले कई वर्षों से थानेदार की कुर्सी पर किसी भी अधिकारी ने बैठने की हिमाकत नहीं की है। बाबा भैरव का सम्मान करते हुए, थानेदार उनके बगल में कुर्सी लगाकर बैठते हैं।

यह परंपरा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। हालांकि, किसी को इस बात की जानकारी नहीं है कि इस परंपरा की शुरुरत किसने की और कब से यह परंपरा चली आ रही है। जब भी कोई नया थानेदार नियुक्ति के बाद इस थाने आता है, तो वह अपनी कुर्सी पर नहीं बैठता है। 

थाने में कार्यरत पुलिसकर्मियों के मुताबिक, थाने में आने जाने वालों पर बाबा भैरव की नजर रहती है इसलिए भैरव बाबा को कोतवाल भी कहा जाता है। दिन की शुरुआत के वक़्त बाबा भैरव की पूजा के बिना थाने में कोई काम शुरू नहीं होता है। 

ऐसी मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ ने शहर की बागडोर भैरव बाबा को सौंप दी है। भैरव बाबा ही अब शहर की सुरक्षा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि बिना भैरव बाबा की अनुमति, कोई भी व्यक्ति शहर में प्रवेश नहीं कर सकता है। शहर की सुरक्षा के लिए थानेदार की कुर्सी पर भैरव बाबा विराजमान हैं।

आख़िर क्या है इतिहास:

मान्यतानुसार, सन् 1715 में बाजीराव पेशवा ने यहां बाबा काल भैरव का मंदिर बनवाया था। जिसके बाद से यहां प्रतिदिन 4 बार बाबा काल भैरव की पूजा हुए करती थी। ब्रह्महत्या के दोषी बाबा काल भैरव को सारे लोकों की यात्रा करने के बाद भी मुक्ति नहीं मिल सकी। 

जब बाबा काल भैरव ब्रह्महत्या से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु के पास गए, तो उन्होंने बाबा काल भैरव को काशी भेजा। काशी आने के बाद बाबा भैरव ब्रह्महत्या से मुक्त हो गए और आखिर में इसी नगरी में बस गए।

यह थाना विश्वेश्वर गंज कोतवाली के तहत आता है। यहां के थानेदार कहते हैं कि जब से मैं यहां आया हूं, उससे भी कई वर्षों से बाबा भैरव ही कुर्सी पर विराजमान हैं। यहां कोतवाल की कुर्सी पर बाबा भैरव विराजते हैं।

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