रामलला के अयोध्या में विराजमान के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण ने खटखटाया अदालत का दरवाजा

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा
रामलला के अयोध्या में विराजमान के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण ने खटखटाया अदालत का दरवाजा (Image Credit: Amar Ujala)

अयोध्या मुकदमे में विजयी हुए राम लला विराजमान के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण विराजमान ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। दरअसल, मथुरा की अदालत में एक सिविल मुकदमा दायर कर श्री कृष्ण विराजमान ने अपनी जन्मभूमि मुक्त कराने की गुहार लगाई है। इस याचिका के जरिये 13.37 एकड़ की कृष्ण जन्मभूमि का स्वामित्व मांगा है जिस पर मुगल काल में कब्ज़ा कर शाही ईदगाह बना दी गई थी।

शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। ये वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर की ओर से उनकी अंतरंग सखी के रूप में अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों ने दाखिल किया है।

यह है विवाद मथुरा का विवाद

जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, वहां पहले वह कारागार हुआ करता था। यहां पहला मंदिर 80-57 ईसा पूर्व बनाया गया था। इस संबंध में महाक्षत्रप सौदास के समय के एक शिलालेख से ज्ञात होता है कि किसी ‘वसु’ नामक व्यक्ति ने यह मंदिर बनाया था। इसके बहुत काल के बाद दूसरा मंदिर विक्रमादित्य के काल में बनवाया गया था। इस भव्य मंदिर को सन् 1017-18 ई. में महमूद गजनवी ने तोड़ दिया था। बाद में इसे महाराजा विजयपाल देव के शासन में सन् 1150 ई. में जज्ज नामक किसी व्यक्ति ने बनवाया।

याचिका में की गई है यह मांग

याचिका में मांग की गई है कि भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की जमीन की डिक्री करने का अधिकार सोसाइटी को नहीं हो सकता है। लिहाजा डिक्री खत्म की जाए और भगवान श्रीकृष्ण विराजमान को उनकी 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक दिया जाए। अधिवक्ताओं ने बताया कि याचिका में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह, श्रीकृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को प्रतिवादी बनाया गया है।

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट मामले के आड़े आ रहा

इतना ही नहीं, प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 इस मामले के आड़े आ रहा है। इस एक्ट के जरिये विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुकदमेबाजी को लेकर मालकिना हक पर मुकदमे में छूट दी गई थी। अलबत्ता, मथुरा-काशी समेत सभी धार्मिक या आस्था स्थलों के विवादों पर मुकदमेबाजी से रोक दिया गया था। अभी कुछ दिन पहले प्रयागराज में अखाड़ा परिषद की बैठक में साधु-संत मथुरा कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर चर्चा की थी। इसमें संतों ने काशी-मथुरा के लिए लामबंदी शुरू करने की कोशि‍श की।


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