उत्तर प्रदेश फर्जीवाड़ा, अनामिका शुक्ला के बाद स्वाति तिवारी के नाम से टीचिंग करती पाईं चार महिलाएं

उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में पांच महीने पहले एक ही नाम के दस्तावेज और पहचान पर सरकारी स्कूलों में कई शिक्षिकाओं के काम करने का मामला सामने आया था।  जिसमें अनामिका शुक्ला के नाम उजागर हुआ था, अब
राज्य में एक बार फिर ऐसा ही मामला सामने आया है। हालांकि, इस बार स्वाती तिवारी के नाम से फर्जीवाड़े का पता चला है। यह भी पढ़ें: दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश से शर्मसार करने वाली घटना आई सामने, 70 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार

दरअसल, उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने ऐसी चार महिलाओं की पहचान की है, जो एक अन्य शिक्षका स्वाती तिवारी के दस्तावेज और पहचान पर नौकरी कर रही थीं।

स्वाति तिवारी के नाम से काम करने वाली दो महिलाओं की पहचान देवरिया में और बाराबंकी तथा सीतापुर में ऐसे एक-एक मामले सामने आए हैं। जबकि, वास्तविक स्वाति तिवारी गोरखपुर में एक सरकारी शिक्षिका हैं। यह भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश के इस जिले में मिली सोने की खदान, जिसकी कीमत लगभग 12 लाख करोड़ रुपये है

यूपी एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक सत्यसेन बताते हैं कि, ‘बजरंग भूषण नाम के एक व्यक्ति ने सूचित किया कि एक व्यक्ति उसके नाम के शैक्षणिक दस्तावेज का प्रयोग करके सीतापुर में शिक्षक की नौकरी कर रहा है। शिक्षा विभाग से विस्तृत जानकारी एकत्र करने के बाद, एसटीएफ ने सीतापुर के बेहता से फर्जी शिक्षक हृषिकेश मनी त्रिपाठी की पहचान की।’

जिसके बाद एएसपी ने बताया कि, पूछताछ के दौरान स्वाती  ने खुलासा किया कि, ‘उसके पिता देवरिया में शिक्षक हैं और उन्होंने बजरंग भूषण का शैक्षणिक दस्तावेज उसे उपलब्ध कराया था।’ इसके साथ ही हृषिकेश त्रिपाठी ने स्वीकार किया कि, ‘उसकी पत्नी स्नेहलता भी सीतापुर के सरकारी स्कूल में नौकरी करने के लिए एक अन्य शिक्षिका का दस्तावेज प्रयोग करती है।’ यह भी पढ़ें: एनसीआरबी की रिपोर्ट- यूपी की जेलों में बंद हैं सबसे ज्यादा बीटैक, पोस्ट ग्रेजुएट कैदी

एसटीएफ अधिकारी ने यह भी बताया कि, मामले के सामने आने के बाद एसटीएफ ने गोरखपुर में वास्तविक स्वाति तिवारी की पहचान की, जो वहां सरकारी शिक्षिका के रूप में पढ़ाती हैं। उन्होंने बताया कि बाराबंकी से फर्जी शिक्षक को गिरफ्तार किया गया था, जबकि देवरिया के फर्जी शिक्षकों को निलंबित किया गया है। वहीं सीतापुर की स्नेहलता फिलहाल फरार हैं। यह भी पढ़ें: पिता के इलाज के लिए दर-दर भटक रहीं एसिड अटैक सर्वाइवर, ‘छपाक’ में दीपिका संग किया था काम

गौरतलब है कि, इससे पहले जून में, पाया गया था कि करीब दो दर्जन महिलाएं राज्य में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अनामिका शुक्ला की पहचान और दस्तावेज का दुरुपयोग करके फुलटाइम शिक्षिका के रूप में काम कर रही थीं। बाद में वास्तविक अनामिका की पहचान गोंडा जिले में की गई थी, जो कि बेरोजगार थीं। यह भी पढ़ें: एक साथ 25 स्कूलों में कार्यरत रहने वाली शिक्षिका अनामिका शुक्ला गिरफ्तार, पुलिस की पूछताछ जारी


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