कोरोना के कारण 13.6 करोड़ नौकरियों पर छाए संकट के बादल

कोरोनावायरस के चलते लोगों की जिंदगी पर तो खतरा मंडरा ही रहा है, साथ ही इससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था भी संकट में आ गई है। इस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन किया गया है। देश में भी 21 दिनों का लॉकडाउन चल रहा है। ऐसे हालात में सभी देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है। व्यापार ठप पड़ा है और सभी क्षेत्रों में भारी नुकसान हो रहा है। सभी तरह के यातायात साधनों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। जिन देशों का ज्यादातर राजस्व पर्यटन उद्योग पर निर्भर है, उन्हें तो और भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारत में भी इसका सबसे ज्यादा असर उन्हीं क्षेत्रों पर पड़ा है, जहां सबसे ज्यादा पर्यटक आते थे।

Corona's havoc, held at Rs 13.6 crore
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छंटनी के मूड में कई कंपनियां

ताजनगरी आगरा की एक ट्रैवेल एजेंसी के ऑपरेटर सुनील गुप्ता बताते हैं कि 2019 में एक करोड़ से ज्यादा लोग ताजमहल देखने आए, लेकिन फरवरी 2020 के बाद चीजें बदल गईं। उन्होंने कहा कि सितंबर तक पर्यटकों के आने की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों को छह महीने तक घर बैठे सैलरी देनी पड़ेगी। सुनील गुप्ता के 145 कर्मचारी फिलहाल घर पर हैं और उनकी कंपनी की 80 से ज्यादा कारें धूल फांक रही हैं। गुप्ता बड़े ट्रैवेल ऑपरेटर हैं। इसलिए वो ऐसा कर रहे हैं। बाकी ट्रैवेल एंजेसियां सैलरी देने की हालत में नहीं है। ऐसे हालात में बहुत सी एजेंसियां छंटनी के मूड में है। लिहाजा लाखों लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।

रोजी-रोटी पर छाया संकट

नौकरियां जाने का खतरा सबसे ज्यादा वहां बढ़ गया है, जहां लोगों को नियमित सैलरी नहीं मिलती, उदाहरण के तौर पर पर्यटन उद्योग। इस सेक्टर में शामिल लोगों को नियमित सैलरी नहीं मिलती। बहुत से लोग बिना कॉन्ट्रैक्ट के काम करते हैं। इसमें गाइड भी शामिल हैं, जिनकी रोजी-रोटी पर खतरा बना हुआ है। इस उद्योग में दुकानों, होटलों में काम करने वाले लोग शामिल हैं।

अक्टूबर 2020 के बाद ही सुधरेंगे हालात

उद्योग संस्था CII (Confederation of Indian Industry) का कहना है कि आधे से ज्यादा पर्यटन व हॉस्पिटैलिटी सेक्टर बंद हो सकते हैं और इन दो उद्योंगों में ही करीब दो करोड़ नौकरियां खत्म होने की आशंका है। संस्था का कहना है कि अक्टूबर 2020 के बाद ही इन उद्योगों की हालत सुधरने की उम्मीद है। यही हालात मैन्युफैक्चरिंग और नॉन मैन्युफैक्चरिंग जैसे दूसरे सेक्टर के भी हैं। मांग में कमी के कारण जिन लोगों की नौकरी अभी बरकरार है, उन पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। National Sample Survey (NSS) और Periodic Labour Force Surveys (PLFS) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल मिलाकर 13.6 करोड़ (136 मिलियन) लोगों की नौकरी पर खतरा बढ़ गया है। इसमें वो लोग शामिल हैं जो बिना किसी कॉन्ट्रैक्ट के काम करते हैं जैसे- मजदूर, छोटी कंपनियों के कर्मचारी और खुद का रोजगार करने वाले लोग।

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दुनिया भर में ढाई करोड़ लोग होंगे बेरोजगार

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी ने भी अनुमान लगाया था कि इस महामारी के कारण दुनिया भर में लगभग 2.5 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित नीतिगत कार्रवाई के जरिए वैश्विक बेरोजगारी पर कोरोनावायरस के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनावायरस के चलते पैदा हुए आर्थिक और श्रम संकट से दुनिया भर में करीब 2.5 करोड़ लोग बेरोजगार हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि जैसा 2008 के संकट में देखा गया था, अगर हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित नीतिगत कार्रवाई पर गंभीरता से अमल करें तो वैश्विक बेरोजगारी पर प्रभाव काफी कम हो सकता है।


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