सरकार ने एडवाइजरी जारी कर कहा, सुरक्षित नहीं है ‘जूम’ का इस्तेमाल

कोरोना वायरस के कारण इन दिनों पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा है। स्कूल, कॉलेज, दफ्तर, दुकानें सब बंद हैं। ऐसे में कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (घर से काम करने) की छूट दे रखी है। कई लोग वीडियो कॉल पर अपने दफ्तरों और सहकर्मियों से जुड़ने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप ‘जूम’ का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से निजी बातचीत करने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी बीच सरकार की ओर से कहा गया है कि यह ऐप सुरक्षित नहीं है और इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करें। गृह मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी करके कहा है कि जूम मीटिंग ऐप वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए सुरक्षित प्लेटफार्म नहीं है। यह एडवाइजरी इस ऐप के जरिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने वाले प्राइवेट सेक्टर और ऑनलाइन क्लास चलाने वाले स्कूलों के लिए जारी की गई है।

How to Use Zoom Meeting App on Your Computer
Image Credit : Gadgets 360

सरकार ने जारी की गाइडलाइन

सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन जारी की है जिसकी मदद से किसी गैर अधिकृत व्यक्ति का कॉन्फ्रेंस में दखल और अवांछित गतिविधि को रोका जा सकेगा। अगर इस गाइडलाइन का पालन किया जाए तो उपयोगकर्ताओं के अलावा कोई दूसरा व्यक्ति उनकी गतिविधि को प्रभावित नहीं कर सकता है। इसमें पासवर्ड और यूजर एक्सेस के जरिए डीओएस अटैक को भी रोका जा सकता है। गाइडलाइन के मुताबिक, इस ऐप के खतरों से बचने के लिए यूजर्स अब हर मीटिंग के लिए नया यूजर आईडी और पासवर्ड इस्तेमाल करें। वेटिंग रूम फीचर को एनेबल करें, ताकि कोई भी यूजर तब ही कॉल में शामिल हो सके जब कॉन्फ्रेंस करने वाला इसकी इजाजत दे। इसके साथ ही कहा गया है कि ज्वाइन ऑप्शन को डिसेबल कर दें। स्क्रीन शेयरिंग का ऑप्शन सिर्फ होस्ट के पास रखें। किसी व्यक्ति के लिए रिज्वाइन का ऑप्शन बंद रखें और फाइल ट्रांसफर के ऑप्शन का कम से कम इस्तेमाल करें।

सीईआरटी ने कहा, डेटा लीक होने का खतरा

यूजर्स को इस ऐप के इस्तेमाल से बचने को इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जूम के जरिए होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंस में आपकी मर्जी के बिना कोई तीसरा शख्स शामिल हो सकता है। इतना ही नहीं, इसमें वीडियो कॉलिंग में की जा रही आपकी बातचीत भी हैक की जा सकती है। इस ऐप के जरिए कोई भी आपका जरूरी मैसेज भी पढ़ सकता है। इसके अलावा, जूम की कमजोर सिक्योरिटी का फायदा उठाकर हैकर्स आपके कंप्यूटर में वायरस तक डाल सकते हैं। देश की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी) और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ने भी कुछ दिन पहले जूम की सिक्योरिटी को लेकर लोगों को आगाह किया था और कहा था कि यह ऐप साइबर हमलों का जरिया बन सकता है। इसके जरिए साइबर अपराधी सरकारी और निजी कार्यालयों से डेटा चोरी करके उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। सीईआरटी ने कहा है कि जूम ऐप में डेटा लीक होने का खतरा है। एजेंसी ने सुझाव दिया है कि जूम ऐप के इस्तेमाल से पहले ऐप को अप-टू-डेट रखें और मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करें।

ऐप की प्राइवेसी और सुरक्षा पर उठे सवाल

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जूम ऐप में प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे हैं। टिक टॉक और जूम के ज्यादातर सर्वर चीन में हैं और इनमें कुछ कमजोरियां हैं। तकनीकी विश्लेषण कहता है कि इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप से मीटिंग का डाटा लीक हो सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि कारोबारी और सरकारी अधिकारी इस ऐप का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। हालांकि जूम के सीईओ एरिक एस युआन ने एक बयान में कहा कि जूम यूजर्स की सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लेता है। उन्होंने कहा कि कंपनी इन सभी दिक्कतों को लेकर कड़े कदम उठा रही है और वे 90 दिन में सुरक्षा के सारे मसलों का हल निकाल लेंगे।

100 लोग एक साथ कर सकते हैं वीडियो कॉन्फ्रेंस

जूम ऐप का इस्तेमाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए किया जाता है। इसके जरिए एक साथ 100 लोगों को कॉन्फ्रेंस में रखा जा सकता है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है, जिसके कारण बैठकों और स्कूलों में पढ़ाई के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा था। अब तक इस ऐप को 50 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और ये संख्या लगातार बढ़ रही है। जूम ऐप के मालिक एरिक युआन हैं जो एक चीनी-अमेरिकी हैं। वह कंपनी के सीईओ भी हैं। उन्होंने अमेरिका के कैलिफोर्निया के सिलिकॉन वैली में अपनी कंपनी शुरू की थी। जूम ऐप की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि पिछले तीन महीने में एरिक युआन की संपत्ति 112% बढ़कर 7.5 बिलियन डॉलर हो गई और वो ब्लूमबर्ग की अरबपतियों की लिस्ट में 192 नंबर पर आ गए हैं।

कई देशों में बैन हो चुका है यह ऐप

देश में सरकारी बैठकों के लिए जूम ऐप का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। इससे पहले दुनिया के कई देश इस ऐप पर पाबंदी लगा चुके हैं। भारत से पहले सिंगापुर में भी इस ऐप पर बैन लगाया जा चुका है। वहां इस ऐप पर होने वाली ऑनलाइन क्लास के दौरान ही अश्लील तस्वीरें दिखने लगी थीं। जूम की मदद से आपके वेबकैम को हैक किया जा सकता है। इस बात को आधार बना कर अमेरिका ने भी इस ऐप के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने भी जूम ऐप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा रखा है। गूगल, नासा और स्पेस एक्स एजेंसी ने भी इसे बैन किया हुआ है। ये ऐप इतना खतरनाक है कि ब्रिटेन में इस ऐप के जरिए कैबिनेट की एक मीटिंग हुई थी, जो कुछ ही देर बाद इंटरनेट पर अपलोड हो गई, जिससे इस ऐप की सुरक्षा पर काफी सवाल उठ रहे हैं। ब्लीडिंग कंप्यूटर नाम की एक संस्था की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पांच लाख से ज्यादा जूम अकाउंट को डार्क वेब में बेचा जा रहा है। इसके अलावा कई जगहों पर जूम यूजर्स का डेटा फ्री में ही बेचा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक यूजर्स को इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि उनका डेटा बेचा जा रहा है। इस डेटा में आपका यूजरनेम, पासवर्ड और कई अन्य जानकारियां शामिल हैं।


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