15 वीं शताब्दी में “चुराईं गईं” मुर्तियाँ भारत को मिलेंगी वापस, संस्कृति मंत्रालय ने दी जानकारी

15 वीं शताब्दी में “चुराईं गईं” मुर्तियाँ भारत को मिलेंगी वापस, संस्कृति मंत्रालय ने दी जानकारी (image credit- HT)

आज यानी मंगलवार को मोदी सरकार के नाम एक और सफलता हाथ लगी है । दरअसल, मोदी सरकार के कठिन परिश्रम के बाद भारत को महान सफलता हासिल हुई है। लगभग 500 साल पहले चुराई गई 15वीं शताब्दी की मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, माँ सीता और लक्ष्मण की मुर्तियां जो कि तमिलनाडु के मंदिर से चोरी हो गईं थीं, वह अब भारत को वापस मिलने जा रही हैं।

यह है पूरा मामला

दरअसल, पीतल से निर्मित भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता की प्रतिमाएं भारतीय धातु कला का बेजोड़ नमूना हैं। इन मूर्तियों को तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले में स्थित विजयनगर काल के एक मंदिर से 1978 में ब्रिटिश द्वारा चुरा लिया गया था। जिसे अब ब्रिटिश पुलिस ने मंगलवार को लंदन में भारतीय उच्चायोग को सौंप दिया है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से जारी एक वक्तव्य में यह जानकारी दी गई।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल, लंदन स्थित उच्चायोग में तीन प्रतिमाओं को सौंपे जाने के समारोह में डिजिटल माध्यम से शामिल हुए।

अब तक 40 से अधिक प्रतिमाओं को लाने में रहे हैं सफल

अपने उद्बोधन में संस्कृति मंत्री प्रह्लाद ने कहा, “यह हर्ष का विषय है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद विदेश से हमें केवल 13 मूर्तियां वापस मिली थीं, लेकिन 2014 से अब तक हम 40 से अधिक प्रतिमाओं को वापस लाने में सफल रहे हैं और आने वाले वर्षों में और कलाकृतियां लाने का प्रयास कर रहे हैं।”

वह आगे कहते हैं कि, “हम वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने के लिए ब्रिटिश संग्रहालय से बातचीत कर रहे हैं। “इतना ही नहीं, भारतीय उच्चायुक्त गायत्री कुमार ने इसे ‘शुभ दिन’ कहा और मूर्तियों को ठीक करने के प्रयासों के लिए पुलिस को धन्यवाद दिया।

उन्होंने हाल के उदाहरणों को याद किया जब भारत से चोरी की गई मूर्तियों को बरामद किया गया था और मिशन द्वारा भारत में वापस लाया गया था।


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