इटली में हुए सर्वे का खुलासा, 80 फीसदी लोग फिलहाल नहीं बनना चाहते मां-बाप

कोरोना वायरस के कारण भारत सहित पूरी दुनिया की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कई देशों में इस वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया है। भारत में भी 24 मार्च से अब तक लॉकडाउन चल रहा है, जिसके कारण सभी तरह की गतिविधियां ठप पड़ी हैं। इस महामारी के कारण लोग अपने घरों में कैद हैं और परिवार के साथ समय बिता रहे हैं वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस वक्त अपना परिवार बढ़ाना ही नहीं चाहते, यानी वे फिलहाल माता-पिता बनना नहीं चाहते। कोरोना के कहर के बीच माता-पिता बनने की चाहत रखने वालों की संख्या काफी कम हो गई है। इटली में हुए एक सर्वे के मुताबिक, करीब 80 फीसदी लोग इस महामारी के बीच गर्भधारण नहीं करना चाहते।

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Image Credit : Healthline

फैसले की वजह आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौतियां

लोग इस फैसले का कारण भविष्य में आर्थिक कठिनाइयों के साथ मौजूदा हालात और महामारी को मान रहे हैं। करीब 58 फीसदी लोग भविष्य में आने वाली आर्थिक चुनौतियों के कारण इस वक्त बच्चे के बारे में नहीं सोच रहे हैं। कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। स्कूल, कॉलेज, फैक्ट्री, दुकानें, ऑफिस सब बंद हैं और लोगों को नौकरी जाने तक का खतरा सता रहा है। ऐसे में आने वाला वक्त आर्थिक रूप से काफी मुश्किल हो सकता है। दूसरा कारण है कोरोना के कारण बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और गर्भधारण पर इस महामारी का असर। करीब 58 फीसदी लोग इस वक्त इसलिए बच्चा नहीं चाहते क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी होने वाली संतान पर इस बीमारी का असर न हो जाए। इस वक्त दुनियाभर के अस्पतालों में कोरोना के मरीजों का इलाज चल रहा है, ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं न मिलने की भी आशंका है।

ऑनलाइन सर्वे में सामने आई लोगों की अनिच्छा

इस महामारी के वक्त लोग बच्चा चाहते हैं या नहीं। इसको लेकर इटली में एक ऑनलाइन सर्वे किया गया है। यह सर्वे यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरेंस ने किया है, जिसमें करीब 1482 लोगों का ऑनलाइन इंटरव्यू लिया गया। इस सर्वे का नतीजा Journal of Psychosomatic Obstetrics and Gynecology में प्रकाशित हुआ है। नतीजे में यह सामने आया है कि करीब 1214 (81.9 फीसदी) लोग इस महामारी के दौर में माता-पिता बनने की इच्छा नहीं रखते हैं। वहीं महामारी से पहले 268 लोग बच्चे की योजना बना रहे थे, लेकिन कोरोना का कहर बढ़ने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। इटली के असिस्टेड रिप्रोडक्शन टेक्नोलॉजी की एलिसाबेट्टा मिसेली का कहना है कि लॉकडाउन के कारण इस तरह का फैसला लेने वालों की संख्या बढ़ी है। इसका सबसे बड़ा कारण है, आमदनी की चिंता। 40 फीसदी लोग अपने वेतन और नौकरी को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। यह सर्वे इटली में लॉकडाउन के तीसरे हफ्ते में किया गया। इसमें 18 से 46 साल की उम्र की 944 महिलाओं (63.7 फीसदी) और 538 पुरुषों ( 36.3 फीसदी) ने हिस्सा लिया।

यूनिसेफ ने कहा था दुनियाभर में बढ़ेगी जन्मदर

इटली के सर्वे में जहां यह सामने आया है कि लोग फिलहाल बच्चे की प्लानिंग नहीं कर रहे हैं, वहीं कुछ दिन पहले यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष) ने कहा था कि कोरोना वायरस की महामारी के बीच पूरी दुनिया में करीब 116 मिलियन बच्चे पैदा होंगे। संयुक्त राष्ट्र की मानें तो मार्च से लेकर दिसंबर तक भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में शिशु जन्म दर सर्वाधिक होगी और भारत व चीन में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा होगी। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 11 मार्च से 16 दिसंबर के बीच इन 9 महीनों में भारत में 2.1 करोड़ जबकि चीन में 1.35 करोड़ बच्चे जन्म लेंगे। नाइजीरिया में 60.4 लाख, पाकिस्तान में 50 लाख और इंडोनेशिया में 40 लाख बच्चों का जन्म होगा। अमेरिका जन्म की अनुमानित संख्या के मामले में छठे नंबर पर है. यहां 30 लाख से अधिक बच्चों का जन्म 11 मार्च और 16 दिसंबर के बीच होने का अनुमान है। यूनिसेफ ने कहा है, ‘इन देशों में महामारी से पहले भी उच्च नवजात मृत्यु दर थी और मौजूदा स्थितियों के साथ इन स्तरों में वृद्धि देखी जा सकती है।’ यूनिसेफ ने यह भी कहा है कि कोरोना की रोकथाम के उपाय जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित कर सकते हैं। इसमें बच्चे की देखभाल, लाखों गर्भवती मांओं और उनके बच्चों का जोखिम बढ़ सकता है।


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