फ्रांस ने अंतरिक्ष में किया दुनिया का पहला सैन्य अभ्यास, तीसरी अंतरिक्ष शक्ति बनने की तैयारी

अब तक आपने जमीन पर, हवा में और पानी पर ही युद्ध होते देखा होगा, लेकिन आने वाले वक्त में अनंत अंतरिक्ष भी जंग का मैदान बन सकता है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि दुनिया के कई बड़े देश अब अंतरिक्ष में भी सैन्य गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। अमेरिका, रूस और चीन जैसे ताकतवर देशों ने अंतरिक्ष में बढ़ते खतरों को देखते हुए अपनी अंतरिक्ष सेना तैयार की है और अब इस कड़ी में फ्रांस का नाम भी जुड़ गया है। हाल ही में इस देश ने अंतरिक्ष  में दुनिया का पहला सैन्य अभ्यास किया है। यह अभ्यास सोमवार से लेकर शुक्रवार तक चला और इसे एस्टरएक्स-2021 नाम दिया गया, जो 1965 में छोड़े गए फ्रांस के पहले सैटेलाइट के नाम पर है। फ्रांस दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अंतरिक्ष शक्ति बनने की तैयारी कर रहा है। सैन्य अभ्यास इसी रणनीति का हिस्सा है।

Image Credit : The Indian Express

जर्मनी और अमेरिका हुए शामिल

फ्रांस के इस अभ्यास में जर्मनी और अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों ने हिस्सा लिया। इस  अभ्यास के तहत उसने अंतरिक्ष में जासूसी और एंटी सैटेलाइट्स का पता लगाया। अभ्यास के दौरान 18 अंतरिक्ष मिशन की टेस्टिंग भी की गई। इस अभ्यास का मकसद अंतरिक्ष में मौजूद अपने उपग्रहों पर किसी अन्य देश या अंतरिक्ष की घटनाओं से होने वाले नुकसान की आशंका का पता लगाना था। फ्रांस के रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पैली के मुताबिक, हमारे सहयोगी और विरोधी अंतरिक्ष का सैन्यीकरण कर रहे हैं। इसलिए फ्रांस ने रूस और अमेरिका के साथ अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए एंटी-सैटेलाइट लेजर हथियार और नई निगरानी क्षमताओं को विकसित करने की योजना बनाई है। इस अभ्यास के जरिए इस बात की भी जांच की जाएगी कि अगर कभी अंतरिक्ष में युद्ध हुआ तो विभिन्न देश उस हालात का सामना कैसे करेंगे।

अमेरिका ने 2018 में की शुरुआत

अंतरिक्ष में सेना तैनात करने की शुरुआत अमेरिका से हुई। साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार अमेरिकी अंतरिक्ष बल के बारे में बात की। अंतरिक्ष सेना से ट्रंप का आशय एक और सैन्य शाखा है। फिलहाल अमेरिकी सेना की पांच शाखाएं हैं- थलसेना, वायुसेना, नौसेना, मरीन कॉप्स और कोस्ट गार्ड। अब इनमें अंतरिक्ष सेना भी जुड़ गई है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में वायुसेना सचिव डेबोरा ली जेम्स ने कहा था कि अंतरिक्ष अब शांतिपूर्ण जगह नहीं रही है। मुमकिन है कि आने वाले दिनों में अंतरिक्ष भी जंग का मैदान बन जाए। अमेरिका के लिए सिरदर्द बने रूस और चीन के कारण ही उसे अंतरिक्ष बल के बारे में सोचना पड़ा। 2018 में अमेरिकी रक्षा विभाग ने बताया था कि चीन ऐसी हाइपरसॉनिक मिसाइलें बना रहा है जो अमेरिकी डिटेक्शन सिस्टम से बच सकें। इसी वजह से पृथ्वी पर ताकतवर माने जाने वाले देशों ने अंतरिक्ष में भी अपना लोहा मनवाने की तैयारी शुरू कर दी है।

2019 में बनी थी फ्रांस की अंतरिक्ष सेना

फ्रांस के अंतरिक्ष सैन्य अभ्यास का मकसद भयंकर युद्ध की स्थिति में अपने सैटेलाइट और दूसरे उपकरणों की रक्षा करना है और उसके लिए बनाए गए अपने अंतरिक्ष कमान की क्षमता के बारे में जानना है। यह फ्रांसीसी सेना द्वारा पहला और यूरोप में भी अपनी तरह का पहला सैन्य अभ्यास है। फ्रांस में अंतरिक्ष बल का गठन दो साल पहले 2019 में किया गया था। साल 2025 तक इसमें करीब 500 कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा फ्रांस की सरकार साल 2025 तक इस मिशन पर करीब 4.3 अरब यूरो (37,305 करोड़ रुपए) का निवेश करने की तैयारी में भी है।


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