चीन के अखबार ‌ग्लोबल टाइम्स का भारत पर तंज, -24 फ़ीसदी जीडीपी के साथ सरहद पर तनाव नहीं झेल पाएगा भारत

Indian economy can't back costly border tensions - Global Times
चीन के अखबार ‌ग्लोबल टाइम्स का भारत पर तंज, -24 फ़ीसदी जीडीपी के साथ सरहद पर तनाव नहीं झेल पाएगा भारत (Image

भारतीय अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट और चीनी सीमा विवाद के बीच चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने तंज कसा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि मायनस 24 फ़ीसदी जीडीपी होने के साथ भारत सरहद पर तनाव नहीं झेल पाएगा। ग्लोबल टाइम्स के लेख में लिखा गया है, भारत की अर्थव्यवस्था डूब रही है और ऐसा लगता है कि मोदी सरकार इसे ठीक करने के बजाए इसे और गर्त में ले जा रही है।

ग्लोबल टाइम्स के लेख में लिखा गया है, संकट की इस घड़ी में सरकार अर्थव्यवस्था सुधारने के बजाए हथियार खरीद पर जोर दे रही है। हथियार खरीदने का संबंध जियोपॉलिटिकल हो सकता है लेकिन यह अर्थव्यवस्था के लिहाज से सही साबित नहीं होता है। भारत की मौजूदा अर्थव्यवस्था से लगता है कि देश सरहद पर तनाव लंबे समय तक नहीं झेल सकता है।

पहले भी चीन भारत पर गलत आरोप लगाते आया है। एक बार फिर से चीन ने गलत आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय सैनिक चीनी क्षेत्र में घुस आए। भारत सरकार भले ही सीमा पर नया विवाद पैदा करना चाहती हो, लेकिन इससे लगता है कि सरकार कोरोना वायरस महामारी और अर्थव्यवस्था पर काबू पाने की असमर्थता को सीमा पर विवाद के जरिए छिपा रही है। भारत को वास्तविक आर्थिक नतीजों को पहचानने की जरूरत है, क्योंकि सर्दियों की तैनाती के लिए महंगा सैन्य रसद और आपूर्ति से उसकी अस्थिर घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।

आगे लेख में लिखा गया है कि एलएसी पर अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती का समर्थन करना महंगा है। इससे रसद के साथ भारत की वित्तीय क्षमता पर भी असर पड़ेगा। रोजाना के काफी पैसे खर्च होंगे। जैसे-जैसे सर्दी करीब आ रही है, आवश्यक सैन्य आपूर्ति के लिए सैन्य खर्च और भी अधिक बढ़ जाएगा। भारत के सेनाध्यक्ष जैसे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने पहले ही दावा किया था कि सेना कठोर सर्दियों में तैनाती के लिए तैयार थी, इस तरह के कट्टरपंथी और सख्त स्वर सैन्य आपूर्ति के भारी दबाव के तहत नाजुक और कमजोर लग सकते हैं।


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