गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में चीन के 60 सैनिक मारे गए थे, शी जिनपिंग विफल रहे: अमेरिकी अखबार का दावा

An army convoy moving towards the Zojilla pass in Drass (representational image) | ANI
गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में चीन के 60 सैनिक मारे गए थे, शी जिनपिंग विफल रहे: अमेरिकी अखबार का दावा (Image Credit: The Print)

लद्दाख में भारत-चीन के सैन‍िकों के बीच हुई मुठभेड़ की खबर के बाद गलवान घाटी चर्चा में आ गई है। दरअसल, लद्दाख में आमने-सामने पहुंच चुकीं भारत और चीनी सेनाओं के बीच अमेरिकी अखबार न्यूजवीक की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक गलवन घाटी में हुई झड़प में चीन के करीब 60 सैनिक मारे गए थे, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सेना चीनी सैनिकों पर भारी पड़ी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, गलवन घाटी में हुई झड़प में चीन के करीब 60 सैनिक मारे गए थे, और भारतीय सेना पीएलए पर भारी पड़ी थी। इतना ही नहीं गलवन में हुए एक्शन के बाद चीन खौफ में भी है। जानकारी के मुताबिक ब्लैक टॉप और हेल्मेट टॉप के आस-पास चीन अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है, क्योंकि सेटेलाइट तस्वीरों में चीनी कैंप दिखाई दे रहे हैं।

फिंगर 8 से फिंगर 5 तक वर्ष 1999 में सड़क बनाई

चीन का फिंगर एरिया को लेकर अड़ियल दिखाई दे रहा है। चीनी सेना फिंगर-4 से पूरी तरह पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। वहीं, सूत्रों की मानें तो चीनी सेना का दावा है कि फिंगर 8 से फिंगर 5 तक उसने वर्ष 1999 में सड़क बनाई थी, ऐसे में यह इलाका चीन का है।

दोनों देशों की रजामंदी के बिना नहीं होगा बॉर्डर

भारत का आरोप है कि चीन ने ऐसा कर दोनों देशों के बीच एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुयल कंट्रोल) की शांति को लेकर हुए समझौता का उल्लंघन किया है। क्योंकि मौजूदा तनाव से पहले तक चीनी सेना फिंगर 8 के पीछे यानी सिरजैप और खुरनाक फोर्ट पर तैनात रहती थी।

फिंगर 5 तक कैंप बनाकर चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के स्टेटस-को बदलने की कोशिश की है, और दोनों देशों के बीच हुए शांती समझौते के तहत दोनों देश एलएसी पर बिना रजामंदी के किसी भी तरह का ‘बॉर्डर-फॉर्टिफिकेशन’ नहीं कर सकते हैं।


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