रोजाना 15 किलोमीटर का सफर व्हीलचेयर से करते हैं तय, मुख्यमंत्री से मिलने के बाद मिली थी अस्थाई नौकरी

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रोजाना 15 किलोमीटर का सफर व्हीलचेयर से करते हैं तय, मुख्यमंत्री से मिलने के बाद मिली थी अस्थाई नौकरी (आभार: Navbharat Times)

कहते है कि अगर आपके हौसले बुलंद हैं, तो मुसीबत भी अपना रुख मोड़ लेती है। पश्चिम बंगाल के झारग्राम के गोपीबल्लबपुर गांव के रहने वाले जगन्नाथ प्रतिदिन 15 किलोमीटर व्हीलचेयर चलाकर नौकरी पर जाते हैं। परिवार की जिम्मेदारी अपने सर लिए जगन्नाथ, झारग्राम के जिला कार्यालय में अस्थाई कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं।

जगन्नाथ महीने के 9 हज़ार रुपए कमाते हैं, जिससे उनकी रोज़मर्रा की रोज़ी रोटी का इंतज़ाम हो पाता है। लेकिन, इतने काम पैसों में घर का खर्च चलाना काफी मुश्किल होता है। जगन्नाथ चाहते हैं कि सरकार उन्हें स्थाई सरकारी नौकरी दे, ताकि वे अपने परिवार की देखरेख ठीक तरह से कर सकें।

रोजाना व्हीलचेयर से अपना सफर तय करने वाले जगन्नाथ का बचपन में ही उनके पैरों ने साथ छोड़ दिया था। बावजूद, जगन्नाथ ने कभी दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं समझा। पैर ना होने के बावजूद अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए जगन्नाथ ने खूब मेहनत कर ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।

जगन्नाथ भूगोल विषय में ग्रेजुएट हैं और अपने दम पर ही परिवार का पेट पाल रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं है जब जगन्नाथ को रोजाना व्हीलचेयर पर इतना लंबा सफर तय करना हो। जगन्नाथ रोज कॉलेज जाने के लिए 55 किलोमीटर का सफर तय किया करते थे। भूगोल में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने ट्यूशन भी पढ़ना शुरू किया था, ताकि परिवार को सपोर्ट कर सकें।

जब सीएम से मिले जगन्नाथ:

जिस कोचिंग सेंटर में जगन्नाथ पढ़ाया करते थे, वहां से लौटते समय उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी का काफिला गुजरता हुआ दिखा। उन्होंने हाथ हिलाकर मुख्यमंत्री का अभी वादन किया। जिसके बाद सीएम ममता बनर्जी के नजा उन पर पड़ी और उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री से हुई। 

मुख्यमंत्री ने उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन भी दिया। कुछ दिनों बाद ही अधिकारी जगन्नाथ से मिले और कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में 3 साल का समय लगेगा। लेकिन, 3 साल गुजर जाने के बाद भी जब उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिली तो साल 2015 में उनकी मुलाकात फिर एक बार मुख्यमंत्री से हुई।

जगन्नाथ ने मुख्यमंत्री से कहा कि उन्हें अब तक नौकरी नहीं मिली है, जिसके बाद ही उन्हें यह अस्थाई नौकरी मिली। जगन्नाथ को जितनी तनख्वाह मिलती है, बमुश्किल उससे घर चल पाता है। इसलिए वह चाहते हैं कि उन्हें स्थाई नौकरी मिल, ताकि उनकी स्थिति बेहतर हो सके।


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