पति की हिम्मत के आगे हार गईं हजार किमी की बाधाएं, गर्भवती पत्नी की परीक्षा के लिए 1200 किमी की यात्रा स्कूटर से की तय

मध्यप्रदेश
पति की हिम्मत के आगे हार गईं हजार किमी की बाधाएं, गर्भवती पत्नी की परीक्षा के लिए 1200 किमी की यात्रा

लाॅकडाउन के दौरान जिस तरह कई निराशाजनक खबरें सामने आयीं उसी तरह कई उत्साहवर्द्धक व दृढ हौसले की कहानियां भी सामने आयीं हैं। झारखंड के गोंडा जिले के गंटा टोला गांव के निवासी 27 वर्षीय धनंजय कुमार अपनी 22 वर्षीय गर्भवती पत्नी सोनी हेंब्रम को डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) की द्वितीय वर्ष की परीक्षा दिलाने के लिए के लिए ग्वालियर पहुंचे। इस दौरान दंपती झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश होते हुए मध्यप्रदेश पहुंचा। जहां उन्हें ऊबड़ -खाबड़ रास्ते का सामना करना पड़ा। उन्होंने 1200 किमी का सफर स्कूटी से बारिश व धूप के बीच तय किया जबकि महिला सात महीने की गर्भवती है और यह उनका पहला बच्चा है।

वहीं दंपति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ग्वालियर प्रशासन हरकत में आया। और प्रशासन ने तुरंत आर्थिक सहायता करते हुए इस आदिवासी दंपति को सुरक्षित वापस झारखंड पहुंचाने की पेशकश की।

धनंजय ने इस संबंध में बताया कि जब वे परीक्षा के लिए जाने वाले थे तो एक-दो दिन पहले ट्रेन बंद हो गई, उसके पहले वह चल रही थी। उनका कहना है कि हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम गाड़ी रिजर्व कर ग्वालियर पहुंचते, क्योंकि उसमें 30 हजार रुपये का खर्च आता, ऐसे में उनके पास स्कूटर चलाने का हुनर व उसके सारे कागजात दुरुस्त थे और वह उसी से पत्नी को लेकर निकल पड़े।

धनंजय ने यह भी कहा कि कई लोगों ने दोपहिया वाहन से इतना लंबा सफर करने से मना किया, वे सही थे, लेकिन हमारे पास विकल्प नहीं था। रास्ते में एक बार उन्हें तेज बारिश की वजह से पेड़ के नीचे रुकना पड़ा। उन्हें भागलपुर से गुजरते हुए बाढ का का सामना करना पड़ा और लखनऊ में एक रात वे टोल टैक्स प्लाजा पर ही रुके।

धनंजय कैंटीन में काम करते हैं, लेकिन बीते तीन महीने से बेरोजगार हैं। स्कूटी में पेट्रोल भरवाने के लिए उन्होंने पत्नी के जेवर 10 हजार रुपये में गिरवी रख दिए। इसके लिए मासिक 300 रुपये का ब्याज देना होगा। उनका कहना है कि उनकी पत्नी अगर यह परीक्षा पास कर लेंगी तो वे शिक्षिका बनने की पात्रता हासिल कर लेंगी और नौकरी मिलने पर उनके परिवार के दिन सुधर जाएंगे।

वहीँ सोनी ने कहा कि पहले तो आने में परेशानी के कारण लगा कि शायद परीक्षा नहीं दे पाएंगी, लेकिन पति की हिम्मत देखकर वह भी तैयार हो गई। हालांकि रास्ते में बारिश के कारण परेशानी हुई, थोड़ा बुखार भी आया, लेकिन अब सब ठीक है और जैसे ही झारखंड में शिक्षकों की भर्ती होगी, वह भी आवेदन करेंगी, और उम्मीद है कि उनका चयन भी हो जाएगा।

इस दंपती के इस साहस भरे फैसले के बाद उनकी मदद के लिए गुरुवार को ग्वालियर कलेक्टर ने महिला सशक्तिकरण अधिकारी शालिनी शर्मा को तुरंत इस दंपति के पास भेजा। शर्मा ने बताया कि फिलहाल रेडक्रास की ओर से दंपति को पांच हजार रुपए दिए गए हैं। इसके साथ वापस सुरक्षित उनके गांव भेजने का प्रस्ताव भी दिया है।इसके अलावा उनके भोजन और जहां वे रुके हुए हैं, उसकी धनराशि भी प्रशासन देगा। उन्होंने बताया, चूंकि धनंजय की पत्नी गर्भवती है, इसलिए उनका ध्यान रखा जा रहा है। फिलहाल लगातार परीक्षाएं हैं, लेकिन रविवार को उनकी पत्नी का स्वास्थ्य परीक्षण और अल्ट्रासाउंड कराया जाएगा।


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