कभी ओला कैब चलाने वाले ओम पैठाने आज हैं आर्मी ऑफिसर, जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी

जिंदगी में कुछ बड़ा करने के लिए पैसों की नहीं, बल्कि जज्बे और मेहनत की जरूरत होती है। अगर आपमें कुछ करने का हौसला है तो दुनिया की कोई ताकत आपको रोक नहीं सकती। आज हम आपको ऐसे ही एक शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने और सीमित संसाधनों के बावजूद न सिर्फ आसमान की बुलंदियों को छुआ, बल्कि अपनी कामयाबी से दूसरे लोगों को प्रेरित भी किया। इस शख्स का नाम है ओम पैठाने, जिन्होंने ओला कैब ड्राइवर से लेकर आर्मी ऑफिसर बनने तक का सफर पूरा किया है। ओम जो कभी सड़कों पर ओला कैब चलाते थे और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते थे, अब इंडियन आर्मी ऑफिसर बनकर देश की सेवा कर रहे हैं। जानिए कौन हैं ओम और कैसे उन्होंने यह लंबा सफर तय किया।

From Ola driver to Army officer: Here's an inspirational story of  Om Paithane
Image Credit : The Youth

रिटायर्ड कर्नल से मिली प्रेरणा

ओम का परिवार महाराष्ट्र के बीड जिले के लिंबारुई गांव से ताल्लुक रखता है। उनके पिता भी ड्राइवर थे, लेकिन एक एक्सीडेंट में उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए। इसके बाद वह वॉचमैन का काम करने लगे। उस वक्त ओम कंप्यूटर साइंस में बीएससी के फाइनल ईयर में थे, लेकिन उनका बैकलॉग आ गया। तब अपने परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ कैब चलाने का काम भी शुरू कर दिया। ओम की साधारण सी जिंदगी उस दिन बदल गई जब सेना के एक रिटायर्ड ऑफिसर कर्नल बख्शी ने उनकी कैब बुक की। ओम ने उनसे यूं ही साधारण बातचीत शुरू की और उन्होंने भी उनसे काफी बातें की। कर्नल ने ओम को कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (सीडीएस) की परीक्षा और इसमें मौजूद मौकों के बारे में काफी कुछ बताया।

पहली बार में ही हुआ सेलेक्शन

कर्नल बख्शी ने ओम को लेफ्टिनेंट कर्नल गणेश बाबू का रेफरेंस दिया जो उस वक्त आर्म्ड फोर्सेज ऑफिसर्स सेलेक्शन ओरिएंटेशन प्रोग्राम के डायरेक्टर थे। इसके बाद ओम ने छह महीने तक ओला कैब चलाई। 2016 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद ओम ने सीडीएस की परीक्षा दी और पहली ही कोशिश में उनका सेलेक्शन हो गया। इसके बाद ओम ने भोपाल में सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) की परीक्षा दी ताकि वे ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में ट्रेनिंग ले सकें। एक साल की ट्रेनिंग के बाद 10 मार्च 2018 को ओटीए से पासआउट होने वाले 257 कैडेट्स में ओम पैठाने भी एक रहे।

ओटीए ने सिखाया अनुशासन

ओम कहते हैं कि उनके इस रोमांचक सफर में उनकी प्रेरणा के असली स्रोत रिटायर्ड कर्नल बख्शी थे। जैसे ही उनका सेलेक्शन हुआ उन्होंने सबसे पहला फोन कर्नल बख्शी को किया और उन्हें अपने सेलेक्शन के बारे में बताया। ओम के मुताबिक, कर्नल ने उनका पूरी तरह से मार्गदर्शन किया। ओम कहते हैं कि वे पहले काफी लापरवाह थे और अपनी उस जिंदगी से खुश भी थे, लेकिन यह जिंदगी उससे काफी बेहतर है। ओटीए में मिली ट्रेनिंग ने ओम को अनुशासन और शिष्टाचार सिखाया है और इस बात की उन्हें खुशी भी है और गर्व भी।


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