कोरोना संक्रमित बुजुर्ग ने दूसरे मरीज के लिए छोड़ा अपना बेड, अस्पताल से घर लौटकर कहा दुनिया को अलविदा

कोरोना वायरस की दूसरी लहर से देशभर में हाहाकार मचा हुआ है। कई शहरों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कोरोना मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल में बेड से लेकर ऑक्सीजन तक के लिए भटक रहे हैं। ऑक्सीजन की कमी के कारण देशभर में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार की बदइंतजामी और अव्यवस्था का खामियाजा लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। हालांकि संकट की इस घड़ी में बहुत से लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया है और जरूरतमंदों को बेड और ऑक्सीजन मुहैया कराई है। इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसे बुजुर्ग के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए किसी और की जान बचाने के लिए खुद की जान की भी परवाह नहीं की। महाराष्ट्र के नागपुर जिले के 85 साल के बुजुर्ग नारायण भाऊराव दाभाडकर जो खुद कोरोना संक्रमित थे। उन्होंने अपने अंतिम समय में भी किसी की जान बचाने के लिए कुछ ऐसा किया, जिसे सुनकर आप उन्हें नमन करना चाहेंगे।

Image Credit : News Track

दूसरे मरीज के लिए छोड़ा अस्पताल का बेड

नागपुर के नारायण भाऊराव दाभाडकर कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती थे। इसी बीच एक महिला अपने पति को लेकर अस्पताल पहुंची, लेकिन अस्पताल ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया क्योंकि वहां कोई भी बेड खाली नहीं था। वह महिला डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाने लगी। यह देख दाभाडकर ने अस्पताल प्रशासन से गुजारिश की कि उनका बेड उस महिला के पति को दे दिया जाए। उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी जिंदगी जी ली है। मेरी उम्र अब 85 साल है। इस महिला का पति युवा है। उस पर परिवार की जिम्मेदारी है। इसके बच्चे अनाथ हो जाएंगे। इसलिए मेरा बेड उसे दे दिया जाए।’ आरएसएस के स्वयंसेवक रहे नारायण भाऊराव दाभाडकर खुद कोरोना संक्रमित थे। उनका ऑक्सीजन लेवल भी 60 तक पहुंच गया था, इसके बावजूद उन्होंने अपना बेड 40 साल के उस मरीज को दे दिया और अस्पताल से वापस अपने घर आ गए। अफसोस की बात यह है कि अस्पताल से लौटने के तीन दिन बाद ही दाभाडकर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

घर लौटने के तीन दिन बाद हो गई मौत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े दाभाडकर ने दूसरे सर संघचालक माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर के साथ संघ का काम किया था। उनके इस बलिदान की हर तरफ चर्चा हो रही है। कोरोना के कारण दाभाडकर की हालत बिगड़ने पर उनके दामाद और बेटी उन्हें इंदिरा गांधी शासकीय अस्पताल ले गए, जहां काफी मशक्कत के बाद आखिरकार उन्हें बेड मिल गया। उनका इलाज अभी शुरू ही हुआ था कि एक महिला अपने पति को लेकर अस्पताल आई। अस्पताल ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया क्योंकि वहां बेड खाली नहीं था। महिला बेड के लिए डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाई तो दाभाडकर को दया आ गई और उन्होंने अस्पताल प्रशासन से अपना बेड उस महिला के पति को देने का आग्रह किया। उनके आग्रह को देख अस्पताल प्रशासन ने उनसे एक कागज पर लिखवाया कि ‘मैं अपना बेड दूसरे मरीज के लिए स्वेच्छा से खाली कर रहा हूं। दाभाडकर ने ये स्वीकृति पत्र भरा और घर लौट आए। हालांकि घर लौटने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और तीन दिन बाद उनका निधन हो गया।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दी श्रद्धांजलि

दाभाडकर की परिजन शिवानी दाणी-वखरे ने बताया कि वे हमेशा से ही लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। वे बच्चों को चॉकलेट बांटते थे। इसलिए बच्चे उन्हें चॉकलेट चाचा कहते थे। वही चॉकलेट की मिठास उनके जीवन में थी। इसीलिए अपने आखिरी वक्त में भी वे किसी के काम आए। दाभाडकर के इस बलिदान के लिए हजारों लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी फेसबुक पोस्ट में नारायण के इस अद्भुत त्याग का जिक्र करते हुए लिखा, ‘जो लोग राष्ट्रीय सेवक संघ की सद्कार्य भावना और संस्कारों को जानते हैं, उन्हें पता है कि ये ऐसा सेवाभावी संगठन है जो अपने प्राण देकर भी सेवा करने से नहीं चूकता।’

शिवराज सिंह ने बताया प्रेरणास्रोत

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी मानवता के लिए जीवन समर्पित करने वाले नारायण राव की तारीफ करते हुए ट्वीट किया, ‘दूसरे व्यक्ति की प्राण रक्षा करते हुए नारायण जी तीन दिनों में इस संसार से विदा हो गए। समाज और राष्ट्र के सच्चे सेवक ही ऐसा त्याग कर सकते हैं, आपके पवित्र सेवा भाव को प्रणाम!’ आप समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। दिव्यात्मा को विनम्र श्रद्धांजलि। ओम शांति!’ शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया, ‘मैं 85 वर्ष का हो चुका हूं, जीवन देख लिया है, लेकिन अगर उस स्त्री का पति मर गया तो बच्चे अनाथ हो जाएंगे, इसलिए मेरा कर्तव्य है कि मैं उस व्यक्ति के प्राण बचाऊं।’ ऐसा कह कर कोरोना संक्रमित आरएसएस स्वयंसेवक नारायण राव ने अपना बेड उस मरीज को दे दिया।


Like Soochna on

Follow Soochna on


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *