दुनिया में एक कोरोना केयर सेंटर ऐसा भी, जहां नहीं हुई एक भी मरीज की मौत, जानिए पूरी खबर

दुनिया में एक कोरोना केयर सेंटर ऐसा भी, जहां नहीं हुई एक भी मरीज की मौत (image credit- Bhaskar)

जहां एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना वायरस से लड़ रही है, वहीँ दूसरी तरफ हजारों बिस्तर वाला दुनिया का सबसे बड़ा एक कोरोना केयर सेंटर ऐसा भी है जहां अब तक एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है। मेडिकल स्टाफ में जीरो इंफेक्शन है। सेंटर की कमान संभाले आईटीबीपी ने यह सब बड़ी आसानी से मुमकीन किया। सेंटर में हजारों बिस्तर लगे हैं। जहां जहां तक नजर जाएंगी, मरीज ही मरीज आएँगे।

बात हो रही है, दिल्ली के बाहर मौजूद छतरपुर स्थित राधा स्वामी सत्संग न्यास के कैंपस की, जिसे इन दिनों दुनिया का सबसे बड़ा कोविड केयर सेंटर में बदल दिया गया है।

सेंटर की कमान भारतीय अर्धसैनिक बल आईटीबीपी के हाथ में है। जरूरत पड़ने पर 10 हजार बिस्तर और लगाए जाने की भी व्यवस्था है। फिलहाल दो हजार बिस्तरों पर संक्रमितों का उपचार किया जा रहा है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए पृथक वार्ड की भी व्यवस्था है।

दरअसल, भारत में प्रतिदिन कोरोना संक्रमण के करीब एक लाख नए मामले ट्रेस हो रहे हैं। यह संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जुलाई के पहले सप्ताह में सरदार पटेल कोविड केयर केंद्र शुरू किया था।

दिल्ली सरकार, दिल्ली के नगर निगम, राधा स्वामी सत्संग न्यास और कई अन्य गैर सरकारी संगठन सहयोग दे रहे हैं। सभी की कमान आईटीबीपी के पास में है।

राधा स्वामी सत्संग न्यास में अब तक करीब पांच हजार संक्रमित भर्ती हो चुके हैं। इन सब के बीच खास बात है कि एतिआत के तौर पर बिना लक्षणों वाले या हल्के लक्षणों वाले मरीज भर्ती किए जाते हैं। यहां एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है।

दुनिया में एक कोरोना केयर सेंटर ऐसा भी, जहां नहीं हुई एक भी मरीज की मौत (image credit- Bhaskar)

डॉ. प्रशांत मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि, 1800 सामान्य बिस्तर हैं जबकि 200 बिस्तरों पर ऑक्सीजन सपोर्ट है। इमरजेंसी के लिए आईसीयू भी तैयार रहता है।

अस्थाई अस्पताल को बेहद ही कम समय में तैयार किया गया है। डॉ. मिश्रा बताते हैं, हमारे डॉक्टर अभी तक अस्पताल या ऐसी जगह काम करते रहे थे जहां प्रॉपर इंफ्रास्ट्रक्चर था। लेकिन, यहां हमने गृह मंत्रालय के निर्देश में महामारी के समय ये अस्थाई अस्पताल बनाया है।

आईटीबीपी ने ऐसे किया सब कुछ मुमकिन

डॉ. मिश्रा बताते हैं सीमित समय में ये काम करना काफी चुनौतीपूर्ण था। 25 जून को इस केंद्र को बनाने को लेकर पहली मीटिंग हुई थी। 05 जुलाई को हमने पहले मरीज को भर्ती कर लिया था। आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देशवाल ने इस काम के लिए टीम गठित की, हमारे लिए यही निर्देश है कि जो भी यहां से जाए अच्छा महसूस करता हुआ जाए। केंद्र में 17 दिन के बच्चे से लेकर 78 साल तक के बुजुर्ग आ चुके हैं।


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