वैज्ञानिकों का दावा, बुजुर्गों को दोबारा कोरोना का संक्रमण होने का खतरा ज्यादा

पिछले साल की तरह इस साल भी कोरोना के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं। कई देशों में हालात काफी खराब हो रहे हैं। हालांकि वैक्सीन आने से लोगों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अभी भी जरूरी है। कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच एक शोध में बताया गया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके ज्यादातर लोग कम से कम छह महीने तक दोबारा इसकी चपेट में नहीं आते हैं, लेकिन 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग मरीजों के दोबारा संक्रमित होने का खतरा थोड़ा ज्यादा है। ‘द लांसेट’ जर्नल के एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है। डेनमार्क के स्टेटेंस सीरम इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने देश की राष्ट्रीय कोविड-19 जांच रणनीति के तहत इससे संबंधित आंकड़े इकट्ठे किए। इसके जरिए साल 2020 में दो-तिहाई आबादी की जांच की गई।

Elderly are more vulnerable to reinfection, finds Lancet report
Image Credit : Fit

 युवाओं के मुकाबले बुजुर्गों को खतरा ज्यादा

वैज्ञानिकों का कहना है कि अध्ययन में 65 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों के कोविड-19 की चपेट में आने की कहीं अधिक संभावना होने का पता चला। अध्ययन के तहत वैज्ञानिकों ने उम्र व लैंगिक आधार पर और संक्रमण के समय में अंतर पर गौर करते हुए पॉजिटिव और नेगेटिव जांच परिणामों के अनुपात का आकलन किया। वैज्ञानिकों का मानना है कि अध्ययन के नतीजे महामारी के दौरान बुजुर्ग आबादी की सुरक्षा के लिए उपाय किए जाने का महत्व बताते हैं। अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि 65 साल से ज्यादा उम्र के लोग दोबारा संक्रमण से सिर्फ 47 फीसदी सुरक्षित हैं,जबकि युवा दोबारा संक्रमित होने से 80 फीसदी सुरक्षित हैं। इस अध्ययन से यह भी पता चला कि युवाओं के संक्रमित होने का खतरा कम है, जबकि बुजुर्गों को इसका ज्यादा खतरा है।

65 साल से कम के 0.60% लोग दोबारा हुए पॉजिटिव

इस अध्ययन में पाया गया कि जो लोग मार्च और मई 2020 के बीच कोरोना की पहली लहर के दौरान इससे संक्रमित हुए थे, उनमें से केवल 0.65 फीसदी लोग सितंबर से दिसंबर 2020 तक दूसरी लहर के दौरान फिर से कोरोना की चपेट में आए। जो लोग पहले कोरोना संक्रमित नहीं हुए थे, उनके दूसरी लहर के दौरान संक्रमित होने पर उनमें संक्रमण की दर पांच गुना ज्यादा थी। अध्ययन में बताया कि 65 साल से कम उम्र के लोग जो पहली लहर के दौरान संक्रमित हुए थे, उनमें से दूसरी लहर के दौरान 0.60 फीसदी लोग संक्रमित हुए।

65 साल से ऊपर के 0.88% लोगों को दोबारा संक्रम

वैज्ञानिकों ने बताया कि बुजुर्गों के दोबारा संक्रमित होने का खतरा कहीं ज्यादा है। 65 साल और उससे अधिक उम्र के 0.88 फीसदी लोग जो पहली लहर के दौरान संक्रमित हुए थे, वे दूसरी लहर के दौरान भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। अध्ययन में कहा गया कि 65 साल से अधिक उम्र के लोग जो पहले कोविड-19 संक्रमित नहीं हुए थे, उनमें से दो फीसदी दूसरी लहर के दौरान संक्रमित हुए। अध्ययन की समय सीमा के चलते वैज्ञानिकों ने कहा कि कोविड-19 से दोबारा संक्रमित होने से बचने के लिए सुरक्षा का अनुमान लगाना संभव नहीं था।

कोरोना वैक्सीन सभी के लिए जरूरी

वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कोरोना से संक्रमित हो चुके लोगों का भी वैक्सीन लगवाने की जरूरत है। दुनियाभर के लोगों खासकर बुजुर्गों को इम्यून सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। कोपेनहेगेन स्थित स्टाटेंस सीरम इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता स्टीन एथेलबर्ग ने कहा कि शोध से यह बात साबित हो जाती है कि बुजुर्गों को संक्रमण से बचाने के लिए कारगर नीतियों पर अमल के अलावा टीकाकरण जरूरी है। लंदन स्थित इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर रोजमैरी बॉयटन और डेनियल अल्टमान ने भी कहा कि वैश्विक स्तर पर टीकाकरण ही कोरोना का एकमात्र समाधान है। इससे पहले हुए अध्ययन के नतीजों के मुताबिक,ताजा अध्ययन में कहा गया कि छह महीने के अंदर दोबारा संक्रमण से सुरक्षा कम होने के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन अभी यह पक्के तौर पर नहीं तय हो पाया है कि एक बार संक्रमित होने के बाद कितने दिनों तक वायरस से सुरक्षा मिलती है


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