जानिए, क्या है प्लाजमा थेरेपी और कैसे ये बचा रही है कोरोना मरीजों की जान

कोरोना की दूसरी लहर ने देशभर में कोहराम मचा रखा है। देश में अब रोजाना संक्रमण के करीब चार लाख मामले सामने आ रहे हैं और हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी भी लोगों को दर-दर भटकने पर मजबूर कर रही है। ऐसे मुश्किल वक्त में कोरोना मरीजों की जान बचाने के लिए प्लाज्मा थेरेपी कारगर साबित हो रही है। बाजार में उपलब्ध दवाओं जैसे हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और रेमडेसिविर इंजेक्शन का दोबारा इस्तेमाल करने के अलावा डॉक्टर कोविड-19 के जोखिम और गंभीर लक्षण वाले मरीजों का इलाज करने के लिए प्लाज्मा थेरेपी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी इस थेरेपी को कारगर माना है। भारत के अलावा अमेरिका और इंग्लैंड में भी प्लाज्मा थेरेपी की मदद से कोरोना मरीजों को ठीक किया जा रहा है। वहीं, चीन ने भी दावा किया है कि प्लाज्मा थेरेपी की मदद से वहां कई मरीज ठीक हुए हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर भी प्लाज्मा डोनर्स जैसे कई ऐसे ग्रुप बनाए गए हैं, जहां प्लाज्मा डोनेट करने से जुड़ी जानकारी साझा की जा रही है और यूजर्स हाल ही में कोरोना से ठीक हुए लोगों से प्लाज्मा डोनेट करने की अपील कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि दुनिया के 20 से ज्यादा देशों में इस्तेमाल की जा रही ये थेरेपी कोरोना के इलाज में किस तरह मददगार साबित हो रही है।

Plasma therapy for COVID-19 patients begins in Goa: Minister | India News –  India TV
Image Credit : India TV

क्या है प्लाज्मा थेरेपी

प्लाज्मा थेरेपी के जरिए उन लोगों के खून से बीमार लोगों का इलाज किया जाता है, जो कोरोना के संक्रमण से ठीक हो चुके होते हैं, यानि वो कोरोना योद्धा जो वायरस को मात दे चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, प्लाज्मा रक्त का तरल भाग होता है, जिसमें लाल और श्वेत दोनों रक्त कणिकाएं और रंगहीन प्लेटलेट्स भी होते हैं, इसी में एंटीबॉडीज भी होती हैं। एंटीबॉडीज इस तरल पदार्थ में तैरती रहती हैं। इसीलिए इसे एंटीबॉडी थेरेपी भी कहा जाता है। किसी खास वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी तभी बनती है, जब इंसान उससे पीड़ित होता है।

कैसे काम करती है यह थेरेपी

विशेषज्ञों की मानें तो जो मरीज कोरोना से अभी-अभी ठीक हुआ है, उसके शरीर में एंटीबॉडी बनी होती है। जब कोरोना से ठीक होने वाले शख्स के खून में से प्लाज्मा निकाला जाता है और प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी किसी दूसरे मरीज के शरीर में डाली जाती है तो बीमार मरीज में यह एंटीबॉडी पहुंच जाती है, जैसे ही एंटीबॉडी वहां पहुंचती है, मरीज पर उसका असर होने लगता है और वायरस कमजोर होने लगता है। इससे मरीज के ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

कौन दे सकता है प्लाज्मा

हाल ही में कोरोना से ठीक हुए लोग प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। जिनकी उम्र 18 साल से 60 साल के बीच हो वह भी प्लाज्मा दान कर सकते हैं। जिन लोगों का वजन 50 किलोग्राम या उससे ज्यादा हो और वे शारीरिक रूप से स्वस्थ हों। प्लाज्मा डोनर का हीमोग्लोबिन स्तर 8 से ज्यादा होना जरूरी है।

कौन नहीं दे सकता प्लाज्मा

जिन लोगों का वजन 50 किलो से कम है वह प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकते। जो महिलाएं पहले गर्भवती रह चुकी हों, वे भी प्लाज्मा नहीं दे सकतीं। कैंसर का मरीज प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकता। हाइपरटेंशन, ब्लड प्रेशर, दिल और किडनी से जुड़ी बीमारी वाले भी प्लाज्मा दान नहीं कर सकते।

किन मरीजों को दी जा सकती है थेरेपी

डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों को प्लाज्मा दिए जाने के लिए भी दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। सामान्य तौर पर वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित और श्वसन के संक्रमण से पीड़ित मरीजों को प्लाज्मा दिया जा सकता है। हालांकि प्लाज्मा थेरेपी कोरोना के इलाज में मददगार है, लेकिन यह तकनीक स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है। यह जरूरी नहीं है कि एक व्यक्ति पर अगर कोई दवा असर करती है तो उसका एंटीबैक्टीरियल ट्रांसफ्यूजन दूसरे मरीज पर भी असर करेगा।

थेरेपी के कोई साइड इफेक्ट नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि जो मरीज कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होकर घर लौट आए हैं उनके अंदर एक ऐसी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है जो कोरोना वायरस के लिए ढाल साबित हो सकती है। ऐसे व्यक्ति ठीक होने के 14 दिन बाद और अधिकतम 4 महीने तक कई बार प्लाज्मा दान कर सकते हैं और दूसरे लोगों की जान बचा सकते हैं। प्लाज्मा डोनेट करने के बाद कोई शारीरिक कमजोरी नहीं आती है। डोनेशन के बाद ब्लड बैंक कुछ समय के लिए डोनर को अपनी निगरानी में रखता है। इसके अलावा डोनर को 3 से 4 घंटे तक कोई भी भारी सामान न उठाने और ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है।

प्लाज्मा डोनेट करते वक्त इन बातों का रखें ख्याल
  • डॉक्टरों के मुताबिक, प्लाजमा डोनेशन के लिए खाली पेट न जाएं।
  • डोनेशन के 48 घंटे पहले तक शराब का सेवन नहीं किया जाना चाहिए।
  • प्लाज्मा देने वाले व्यक्ति की कोई एंटीबायोटिक दवा नहीं चल रही होनी चाहिए।
  • प्लाजमा डोनेट करने के दो हफ्ते बाद आप फिर से डोनेट कर सकते हैं लेकिन इसके लिए दोबारा पूरी जांच की जाती है।
  • डोनेशन के लिए आपके पास 3 महीने के भीतर की कोविड निगेटिव रिपोर्ट (RT PCR Test) होना जरूरी है।
  • अगर आप एसिम्टोमैटिक थे, तो कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट आने के 14 दिनों के बाद ही डोनेशन करें।
  • अगर आपमें कोरोना के लक्षण थे तो इसके ठीक हो जाने के 14 दिनों के बाद आप डोनेशन कर सकते हैं।
  • जो लोग कोरोना की वैक्सीन लगवा चुके हैं, वे टीकाकरण की तारीख से 28 दिनों के बाद ही प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। 

Like Soochna on

Follow Soochna on

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *