विकास दुबे के एनकाउंटर केस ने लिया बड़ा मोड़, गिरफ्तार एसओ विनय तिवारी ने किए कई खुलासे

विकास दुबे के एनकाउंटर केस ने लिया बड़ा मोड़, गिरफ्तार एसओ विनय तिवारी ने किए कई खुलासे (image credit- Ndtv)

कानपुर के बिकरु गांव में 8 पुलिसवालों की हत्या कर भागने वाले आरोपी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद अब केस ने बड़ा मोड़ लिया है।

दरअसल, बिकरू कांड में जेल भेजे गए तत्कालीन चौबेपुर थाना एसओ विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

गौरतलब है कि, चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा को गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद अब आरोपियों के बयान बुधवार को एसपी ग्रामीण ने दर्ज किए। जिसमें दोनों आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और वारदात में किसी भी तरह से हाथ होने से इंकार किया। यह भी देखेंगैंगस्टर’ विकास दुबे हुआ ढेर; जानें कौन था गैंगस्टर विकास दुबे? कहाँ से शुरू हुआ घटनाक्रम?

लेकिन बड़ी बात यह है कि कुछ सवालों पर दोनों आरोपी फंस गए। करीब पौन घंटे तक एसपी ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की।

फोन पर विकास से बात करने की बात दरोगा ने कबूली लेकिन मुखबिरी के आरोप को नकार दिया। इसके पहले, दोनों आरोपियों को मुखबिरी करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। सीडीआर से पुष्टि हुई थी कि दबिश से पहले केके शर्मा की विकास दुबे से फोन पर बातचीत हुई थी।

इसके साथ ही इस मामले में कई कॉल रिकॉर्डिंग भी वायरल हुई थीं। इनके निलंबन की जांच एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार श्रीवास्तव कर रहे हैं। कोर्ट से अनुमति लेने के बाद एसपी ग्रामीण बुधवार को कानपुर देहात जेल में बंद दोनों पुलिसकर्मियों से पूछताछ करने पहुंचे।

सूत्रों के मुताबिक एसपी ने दोनों से पूछा कि विकास से कब से क्या संबंध थे। उस रात दबिश की सूचना विकास दुबे को क्यों दी गई।

इस पर दोनों आरोपियों ने इन आरोपों को नकार दिया। पूछे गए अधिकतर सवालों में उन्होंने आरोपों को नकार दिया। कुछ एक दो सवालों का जवाब ही दिया। 

बिकरू कांड के बाद कई वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसमें एक फोटो व वीडियो अमर दुबे की शादी का था जिसमें आरोपी दरोगा केके शर्मा मंच पर खड़ा दिखाई दे रहा था।

इसको लेकर भी एसपी ग्रामीण ने उससे प्रश्न पूछा कि आखिर अपराधियों की शादी में वो क्यों गया था। केके स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।

उसका कहना था कि वो हलका इंचार्ज था, इसलिए गांव जाता रहता था। उसको बुलाया गया था तो वह चला गया। इससे यह साबित नहीं होता कि वो वारदात में शामिल था।


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