'गैंगस्टर' विकास दुबे हुआ ढेर; जानें कौन था गैंगस्टर विकास दुबे? कहाँ से शुरू हुआ घटनाक्रम?

60 से अधिक आपराधिक मामलों के मुख्य आरोपी कानपुर के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे शुक्रवार को इनकाउंटर में मारा गया। 5 लाख का इनामी विकास दुबे पिछ्ले सप्ताह 2 जुलाई को हुई 8 पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य आरोपी था। वह पिछ्ले गुरुवार की रात से ही फरार था। एक सप्ताह तक फरार रहने के बाद उसे 9 जुलाई को उज्जैन के महाकालेश्वर मन्दिर से नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके एक दिन बाद ही 10 जुलाई को वह स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया, जब एसटीएफ के काफिले की एक कार उसे मध्य प्रदेश के उज्जैन से उत्तर प्रदेश के शिवली ले जा रही थी, कानपुर में पलट गई।

खबर है कि मवेशियों को बचाते बचाते गाड़ी का बैलेन्स बिगड़ गया और बारिश के कारण फिसलन होने की वजह से गाड़ी पलट गई। संयोग से विकास भी उसी गाड़ी में सवार था। मौका पाते ही विकास ने एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनी और भागने लगा। पुलिस ने चेतावनी दी तो विकास ने फायरिंग की। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की जिससे विकास को 4 गोलियाँ लगीं, 3 सीने में और 1 हाथ पर। तत्काल ही उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया। शव की कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आने क बाद उसका पोस्टमार्टम किया गया और शव को सील कर दिया गया।

कौन था विकास दुबे?

विकास दुबे करीब 60 आपराधिक मामलों में मुख्य आरोपी था। विकास दुबे उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के चौबेपुर ब्लॉक के बिकारु गाँव का था। बीते 30 वर्षों से कानपुर और आस-पास के जिलों में उसका खौफ था और आए दिन रसूखदार लोगों की हत्या के पीछे विकास दुबे का नाम आता था। वह कई बार जेल भी गया लेकिन उसका खौफ इतना था कि कभी कोई सबूत मजबूती से खड़ा नहीं हो पाया।

विकास दुबे ने मायावती की सरकार के समय अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हुए पैसे भी कमाए। इसके बाद की सरकारों के वक़्त वह राजनैतिक साठगांठ बना कर बचने की कोशिश करता रहा और अपना बर्चस्व भी बढ़ाता रहा। फिर चाहे जमीन की खरीद-फरोख्त हो, अवैध कब्जा हो या किसी का मर्डर करना, हर काम वह आसानी से करता गया और सबूतों के अभाव में बचता गया। कोई भी डर के कारण उसके खिलाफ बयान भी नहीं देता था।

विकास’कांड’ का घटनाक्रम:

2 जुलाई 2020, दिन गुरुवार: हाल में ही कानपुर में हुए एक मर्डर का आरोप विकास दुबे पर लगा था और पुलिस में उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले में पुलिस विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई तो उसके गाँव बिकरू में घुसते ही पुलिस को बीच रास्ते में जेसीबी खड़ी मिली। पुलिस इस माजरे को समझ पाती कि उससे पहले ही विकास के गुंडों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरु कर दी थी।

छतों से फायरिंग से वे आश्चर्यचकित हो गए, जिसके परिणामस्वरूप घात लगाए बैठे विकास दुबे और उसके साथियों ने आठ पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या कर दी। अंधेरे का फायदा उठा कर आरोपी घटनास्थल से अलग अलग दिशा में भाग गये थे। इस नरसंहार के बाद से ही विकास दुबे फरार था। पुलिस ने उस पर 5 लाख का इनाम घोषित किया था।

3 जुलाई: सुबह तक विकास दुबे के बिकरू गांव में भारी लाव-लश्कर से साथ कई पुलिस अधिकारी और फोरेंसिक टीम पहुंच गई और विकास दुबे के घर को सील कर दिया गया। हालांकि विकास दुबे तब तक फरार हो चुका था।

4 जुलाई: पुलिस ने ड्यूटी में लापरवाही के चलते चौबेपुर एसओ को निलंबित कर दिया और इसके साथ ही बिकरू गांव में पुलिस ने विकास दुबे का घर ढहा दिया उसकी लग्जरी कारें भी तोड़ डालीं।

5 जुलाई: खबर आई कि विकास दुबे की गैंग का एक आदमी दयाशंकर अग्निहोत्री पकड़ा गया है। उसने मीडिया के सामने बताया कि गांव में पुलिस पहुंच रही है इस भनक की उसे थाने से ही पता चली थी। इसके पुलिस प्रशासन के होश उड़ गए।

6 जुलाई: विकास के लिए मुखबिरी करने के शक में दो दरोगा और 1 एक सिपाही को निलंबित कर दिया गया। विकास के पत्नी, नौकर और एक पड़ोसी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

7 जुलाई: खबर आई कि विकास दुबे को फरीदाबाद में देखा गया है। पुलिस उसे होटल में पकड़ने गई थी लेकिन वह ऐन वक्त पर वहां से फरार हो गया। हालांकि इस बात की पूरी तरह पुष्टि नहीं हो पाई थी कि वह विकास दुबे था या नहीं।  फरीदाबाद से ही पुलिस ने विकास के दो आदमियों को पकड़ लिया था। शक के दायरे में एसटीएफ के डीजी अनंत देव को हटा दिया गया।

8 जुलाई: चौबेपुर थाने के एक और थाना प्रभारी को गिरफ्तार कर लिया गया और विकास दुबे के भतीजे अमर दुबे के पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया गया। उस पर भी 50 हजार का ईनाम था।

9 जुलाई: एक नाटकीय घटनाक्रम में उज्जैन में महाकाल के दर्शन के दौरान सुबह उसे 7 से 10 बजे के करीब गिरफ्तार किया गया। उसके गिरफ्तार होते ही कई तरह के सवाल उठे कि इतनी जगह नाकेबंदी के बाद भी वह उज्जैन कैसे पहुंच गया। फरीदाबाद में प्रभात मिश्रा को गिरफ्तार किया गया जिसकी पुलिस हिरासत से भागने के दौरान हुई मुठभेड़ में चोटिल होने के कारण अस्पताल में मौत हो गई। साथ ही बऊआ दुबे की भी इटावा में इनकाउंटर में मौत हो गई।

विकास की गिरफ्तारी:

विकास दुबे को गुरुवार सुबह उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह करीब 9 बजे गिरफ्तार किया गया था। वह गिरफ्तारी के वक्त चिल्ला रहा था कि मैं विकास दुबे हूँ, कानपुर वाला। इसके बाद पुलिस उसे पहले महाकाल थाना इसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम, फिर नरवर थाना और आखिरी में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर लेकर गई। यहां उससे करीब दो घंटे तक पूछताछ की गई।

गुरुवार शाम में खबर आई थी कि विकास की पत्नी ऋचा, उसके बेटे और नौकर को लखनऊ में हिरासत में लिया गया है। बता दें, उसने अपनी पत्नी को घिमऊ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़वाया था और वह जीत भी गई थी। उसने अपने चचेरे भाई को भी जिला पंचायत सदस्य बनवाया था। उसका हर पार्टी के नेताओं के साथ उठना बैठना था।

विकास की गिरफ्तारी के बाद चर्चा थी कि उसे उज्जैन में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जायेगा लेकिन बाद में उसे यूपी एसटीएफ के हवाले कर दिया गया। गुरुवार दिन भर चर्चा रही कि विकास को एसटीएफ चार्टेड प्लेन से कानपुर ले जायेगी, लेकिन शाम में बताया गया कि अब विकास को सड़क मार्ग से ले जाया जायेगा। चर्चा यह थी कि यूपी एसटीएफ विकास को लेने उज्जैन पहुँचेगी लेकिन उज्जैन पुलिस विकास को रात में गुना बॉर्डर तक छोड़ने गई। रात 12:30 बजे गुना टोल नाका पार किया और आगे जा कर यूपी पुलिस को विकास हैंडओवर कर दिया।

यूपी पुलिस का काफिला उसे सड़क मार्ग से कानपुर ले जा रहा था लेकिन शहर से 17 किलोमीटर पहले बर्रा थाना क्षेत्र में सुबह करीब 6:30 बजे काफिले की एक गाड़ी पलट गई। विकास उसी गाड़ी में बैठा था। इसका फायदा उठा कर विकास ने पुलिस की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर कर आत्मसमर्पण कराने के लिए कहा। विकास ने पुलिस पर जवाबी फायरिंग की। इस दौरान हुई मुठभेड़ में विकास को 4 गोलियाँ लगीं, 3 सीने में और एक हाथ में। घटनास्थल से उसे लाला लाजपत राय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद उसका पोस्टमार्टम किया गया।

हादसे को लेकर यूपी एसटीएफ के अफसर अभी कुछ बोलने से बच रहे हैं। माना जा रहा है कि तेज बारिश की वजह से गाड़ी पलट गई थी। विकास की गिरफ्तारी को आत्मसमर्पण कहा जा रहा है।

क्या सच क्या झूठ?

विकास की गिरफ्तारी की अलग-अलग कहानियां सामने आ रही हैं। ये भी कहा जा रहा है कि महाकाल मंदिर के पुजारी ने उसे दर्शन करते देखा तो पुलिस को सूचित किया जबकि इसके विपरीत कुछ लोगों का कहना है कि मंदिर के गार्ड ने उसे पहचान लिया और तुरंत पुलिस को खबर की। लेकिन कुल मिला कर जो समझ में आ रहा है वो ये है कि उसने जानबूझ कर खुद को गिरफ्तार कराया है या अन्य शब्दों में कहें तो उसने पुलिस इनकाउन्टर से बचने के लिये आत्मसमर्पण वाले अंदाज में अपने आप को हिरासत में पहुंचा दिया। ये सलाह भी विकास दुबे को उसके वकील मित्रों से मिली होगी।

गिरफ्तारी के वक़्त विकास जोर जोर से चिल्ला कर बता रहा था कि वह विकास दुबे है, कानपुर वाला। शायद वह सभी को अपने पकड़े जाने की खबर देना चाहता था ताकि पुलिस उसका इनकाउंटर न करे। चूँकि विकास दुबे काफी सारे सफेदपोश लोगों का काला चिठ्ठा खोल सकता था तो जाहिर सी बात है कि उन लोगों को विकास से खतरा था। सवाल ये भी उठता है कि इतने बड़े अपराधी को गाड़ी में ले जाते वक़्त उसके हाथ क्यों नहीं बंधे थे?

मीडियाकर्मियों का दावा है कि वे भी उस काफिले के साथ ही उज्जैन से आ रहे थे, लेकिन दुर्घटना स्थल से कुछ पहले मीडिया और सड़क पर चल रही निजी गाड़ियों को रोक दिया गया था। न्यूज एजेंसी एएनआई ने भी इसका फुटेज जारी किया है। आखिर क्यों मीडिया को आगे बढ़ने से कुछ देर के लिए रोक दिया गया था? यदि विकास ने भागने की कोशिश की तो उसके पैर में गोली क्यों नहीं मारी गई? इस तरह के और भी कई सवाल उठ रहे हैं जिनका अभी पुलिस को जवाब देना होगा।

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