बेंगलुरु की उद्यमी ने बनाया ब्लूकैट कागज, हर महीने बचा सकते है 30 टन लकड़ी और 50 हजार लीटर पानी

कागज आजकल हर किसी की जरूरत बन चुका है। हम रोजाना इसका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आप जानते है कि कागज बनाने के लिए हर साल 3.2 मिलियन हेक्टेयर जंगल काटे जाते हैं। अगर यही सिलसिला लगातार चलता रहा तो आने वाले समय में पूरी दुनिया में जंगल लगभग खत्म हो जाएंगे। जंगल और पेड़ों को बचाने के लिए बेंगलुरु की एक युवा उद्यमी आगे आई हैं, जिनका नाम काव्या है। काव्या ने जंगल और पेड़ों को बचाने के लिए पेड़रहित ब्लूकैट कागज का निर्माण शुरू किया है। इसे बनाने के लिए एक भी पेड़ नहीं काटा जाता है। ब्लूकैट कागज से शादी के निमंत्रण पत्र व लिफाफे जैसी अन्य उपयोगी चीजें बनाई जाती हैं।

2016 में शुरू किया ब्लूकैट कागज का निर्माण

काव्या ने ब्लूकैट कागज बनाने की शुरुआत 2016 में की थी। उन्हें इस तरह कागज बनाने का आइडिया तब आया जब वह एक रिसॉर्ट चलाया करती थीं। जब उन्होंने देखा कि कागज बनाने के लिए काफी संख्या में पेड़ों की कटाई की जाती है तो उन्होंने ब्लूकैट कागज के बारे में सोचना शुरू कर दिया। काव्या ने ब्लूकैट कागज के निर्माण को सीखने के लिए काफी मेहनत की है।

हस्तनिर्मित पेपरमेकिंग की प्रक्रिया को समझने के लिए काव्या जयपुर के कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट गईं, जहां उन्होंने 15 दिन बिताए और कपड़ा उद्योग से कपास के कटोरे और कचरे को कागज में बदलने जैसी बारीकियां सीखीं और समझीं। काव्या ने वहां पाया कि कागज बनाने के लिए केवल दो चीजों की जरूरत है- लुगदी और पानी। किसी भी लुगदी, जिसमें 68 प्रतिशत से अधिक सेल्यूलोज है, वह कागज बनाने के लिए एकदम सही है। इसके बाद साल 2016 में काव्या ने ब्लूकैट पेपर बनाना शुरू किया।

औद्योगिक और प्राकृतिक कचरे से बनता है यह कागज

साल 2018 में काव्या ने ब्लूकैट कागज स्टार्टअप लॉन्च किया। इसके लिए बेंगलुरु के पीन्या में 20,000 वर्ग फुट का कारखाना स्थापित किया गया। इस ब्लूकैट कागज का निर्माण औद्योगिक और प्राकृतिक अपशिष्ट की मदद से किया जाता है। अपशिष्ट पदार्थ फैक्ट्री इकाइयों और खेतों से प्राप्त होते हैं, और इसमें पेड़ों के फाइबर की तुलना में सेल्यूलोज का प्रतिशत अधिक होता है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक कागज उद्योग में, कागज को पतला और सफेद बनाने के लिए लगभग 60-80 फीसदी रसायनों का उपयोग किया जाता है।

ब्लूकैट कागज उद्योग हर महीने 100 किसानों और पांच कारखानों से लगभग 20 टन माध्यमिक कचरा इकट्ठा करता है। इस कचरे को वह मुफ्त में नहीं लेता है। वह अपने आपूर्तिकर्ताओं को 8-120 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान करता है। यह उद्योग कचरे को ऊपर उठाकर वृक्ष-रहित कागज बनाने में प्रतिमाह लगभग 30 टन लकड़ी और एक दिन में न्यूनतम 55,000 लीटर पानी बचाता है।

दोबारा इस्तेमाल हो सकता है ब्लूकैट कागज

ब्लूकैट कागज से शादी के निमंत्रण पत्र, लिफाफे और नोटबुक जैसी कई तरह की उपयोगी चीजें बनाई जाती हैं। इनके अलावा ब्लूकैट पेपर से लैंपशेड, हैंगिंग लैंप और स्ट्रिंग लाइट्स के साथ-साथ कॉटन के कटोरे भी बनाए जाते हैं। इन सब में शादी के कार्ड को छोड़कर सभी उत्पादों का पुनः उपयोग किया जा सकता है। शादी के कार्ड को नष्ट करने के लिए काव्या ने एक और आइडिया सोचा। वह बताती हैं कि हमने शादी के कार्ड के कागज के भीतर पौधों के बीज मिलाए हैं। इसलिए, एक बार इसका उपयोग होने के बाद कोई भी इसे फाड़कर मिट्टी में लगा सकता है।

पेड़ों को बचाने के लिए हो ब्लूकैट कागज का इस्तेमाल

ब्लूकैट कागज की शुरुआत करने वाली उद्यमी काव्या ने अपने प्रयोग के बारे कहा, “एक पेड़ को बढ़ने में लगभग 7 से 20 साल लगते हैं, इसलिए हमें पेड़ों को काटने से रोकना होगा। जैसे मानव आबादी लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे पेड़ों की बर्बादी भी लगातार बढ़ती जा रही है। इसे रोकने के लिए ब्लूकैट कागज का उपयोग क्यों नहीं किया जा सकता है? मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में दुनिया भर के कारखाने पेड़ मुक्त कागज का उत्पादन करेंगे।”


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